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नई पीढ़ी को दीनी और दुनियावी तालीम से संवारें : सैयद हबीबुल्लाह
Sat, 14 Feb 2026 09:02 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 14 Feb 2026 09:02 PM IST
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कालंद गांव स्थित मदरसा इस्लामिया जामा मस्जिद में जलसे का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। कालंद गांव स्थित मदरसा इस्लामिया जामा मस्जिद में शनिवार को सालाना जलसे का आयोजन हुआ। जलसे में उलेमाओं ने अपने बयान में तालीम, अखलाक और समाज सुधार के मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर सैयद हबीबुल्लाह मदनी ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमानों के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी दिलाएं। दोनों तरह की तालीम से ही नई पीढ़ी सही राह पर चलकर समाज और देश के लिए बेहतर भूमिका निभा सकती है। उलेमाओं ने कहा कि कुरआन और नबी की सुन्नतों पर अमल करना ही कामयाबी का रास्ता है। उन्होंने झूठ, लालच और बुराइयों से दूर रहने की नसीहत दी। साथ ही जरूरतमंदों की मदद करने और पड़ोसियों के हक अदा करने पर जोर दिया गया। जलसे में सामाजिक कुरीतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि शादियों और अन्य कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची से बचना चाहिए तथा सादगी अपनानी चाहिए। समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद अली नवाज, मौलाना शकील अहमद कासमी, मौलाना मोहम्मद महताब कासमी, कारी नूर मोहम्मद, मुफ्ती अब्दुल समद, मौलाना सालिम, कारी अब्दुल समद, उस्मान प्रधान, हासिम, ताजिम प्रधान, मुस्तफा, इनाम बारी समेत क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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सरधना। कालंद गांव स्थित मदरसा इस्लामिया जामा मस्जिद में शनिवार को सालाना जलसे का आयोजन हुआ। जलसे में उलेमाओं ने अपने बयान में तालीम, अखलाक और समाज सुधार के मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में विशेष तौर पर सैयद हबीबुल्लाह मदनी ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मुसलमानों के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा भी दिलाएं। दोनों तरह की तालीम से ही नई पीढ़ी सही राह पर चलकर समाज और देश के लिए बेहतर भूमिका निभा सकती है। उलेमाओं ने कहा कि कुरआन और नबी की सुन्नतों पर अमल करना ही कामयाबी का रास्ता है। उन्होंने झूठ, लालच और बुराइयों से दूर रहने की नसीहत दी। साथ ही जरूरतमंदों की मदद करने और पड़ोसियों के हक अदा करने पर जोर दिया गया। जलसे में सामाजिक कुरीतियों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि शादियों और अन्य कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची से बचना चाहिए तथा सादगी अपनानी चाहिए। समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद अली नवाज, मौलाना शकील अहमद कासमी, मौलाना मोहम्मद महताब कासमी, कारी नूर मोहम्मद, मुफ्ती अब्दुल समद, मौलाना सालिम, कारी अब्दुल समद, उस्मान प्रधान, हासिम, ताजिम प्रधान, मुस्तफा, इनाम बारी समेत क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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