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व्यववस्था बेहाल: पांच करोड़ के ट्रैक पर घास, सड़क पर टेस्ट, साल भर में एक भी वाहन की नहीं हुई टेस्टिंग

Sat, 09 Oct 2021 11:26 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 09 Oct 2021 11:26 AM IST
सार

मेरठ में पांच करोड़ रुपये की लागत से बने ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के ट्रैक पर पिछले एक साल से एक भी वाहन की टेस्टिंग नहीं हुई है। ट्रैक पर जहां घास उगी हुई है वहीं वाहनों की टेस्टिंग सड़क पर कराई जा रही है। 

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Grass on the track of five crores, driving tests are being taken on the road, not a single vehicle was tested in a year
ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के ट्रैक पर उगी घास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ में पांच करोड़ रुपये की लागत से बने ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के ट्रैक पर घास उग आई है। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आने वालों का टेस्ट ट्रैक की जगह सड़क पर लिया जा रहा है।  इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। नंगला बट्टू और प्रभात नगर के लोगों ने यूनिवर्सिटी रोड पर आने के लिए इंस्टीट्यूट से ही रास्ता बना लिया है। इंस्टीट्यूट परिसर में बंदरों और निराश्रित पशुओं का जमावड़ा रहता है।

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लर्निंग के बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदकों से वाहन चलवाकर देखा जाता है। जो आवेदक इस प्रक्रिया में पास होता है उसे ही लाइसेंस दिया जाता है। आरटीओ परिसर में ड्राइविंग ट्रैक नहीं है। शासन ने साकेत स्थित आईटीआई परिसर में पांच करोड़ रुपये की लागत से ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण कराया है। इस ट्रैक पर वाहन चलाने में पास होने वालों को ही ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाना था। करीब 12 महीने से इस ट्रैक और इंस्टीट्यूट का कोई उपयोग नहीं हुआ। लोगों का कहना है कि आवेदकों से पहले की तरह ही सड़क पर वाहन चलवाकर देखा जाता है। (ब्यूरो)
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ट्रैक पर नहीं लगे कैमरे और सेंसर 
आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक पर कैमरे और सेंसर लगाए जाने हैं। इनके लगने से वहीं आवेदक पास हो सकेगा जिसने लर्निंग लाइसेंस लेकर गाड़ी चलानी सीखी होगी। हल्की सी भी गलती करने पर सेंसर पकड़ लेते है और सिस्टम उसे फेल कर देता है। जहां भी ये ट्रैक काम कर रहा है वहां 30 से 35 फीसदी अभ्यर्थी ही टेस्ट में पास हो पाते हैं। परिवहन अधिकारियों ने बताया कि ट्रैक पर कैमरे और सेंसर लगाने का ठेका शासन स्तर से होना है। ठेका नहीं होने के चलते काम शुरू नहीं हो सका है। 

बायोमेट्रिक सिस्टम भी नहीं लग पाया 
वर्तमान में परमानेंट लाइसेंस के लिए अभ्यर्थियों को फोटो खिंचवाने और बायोमेट्रिक कराने के लिए आरटीओ में जाना होगा। परिवहन आयुक्त ने इंस्टीट्यूट में ही बायोमेट्रिक सिस्टम स्थापित करने के आदेश दिए थे। लेकिन ये व्यवस्था अभी तक चालू नहीं हो सकी है। 

ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का काम लगभग पूरा हो चुका है। कैमरे और सेंसर लगने बाकी हंै। कर्मचारियों की कमी से बायोमेट्रिक सिस्टम नहीं लग सका है। -हिमेश तिवारी, आरटीओ मेरठ

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