इंगलिश मीडियम नहीं! ये हैं यूपी के सरकारी स्कूल, सुविधाएं जानकर बदल जाएगी आपकी सोच, देखें तस्वीरें
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सरकारी स्कूलों का नाम आते ही स्कूलों की एक बदहाल सी तस्वीर सामने आ जाती हैं, लेकिन यूपी के शामली में उच्च प्राथमिक स्कूल व प्राथमिक स्कूल प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए मिसाल बन रहे हैं। इन स्कूलों के आगे निजी स्कूलों की चमक फीकी पड़ रही है। कई मामलों में तो यह अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का मुकाबला करते नजर आते हैं। और यह सब संभव हुआ है योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और अध्यापकों के प्रयासों से।
आइए जानते हैं आखिर क्यों चर्चा में ये स्कूल :-
सुधर सकती है सरकारी स्कूलों की व्यवस्था
सूबे की सरकार और अधिकारियों की मंशा सही हो तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था भी सुधर सकती है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्राइवेट स्कूलों जैसा माहौल मिल सकता है। परिषदीय विद्यालयों में चयनित किए गए मॉडल स्कूलों में से जिले में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जिनकी चमक दमक प्राइवेट स्कूलों जैसी है। शामली के गांव गढ़ीश्याम और भाजू के उच्च प्राथमिक स्कूल गांव गढ़ीश्याम का उच्च प्राथमिक स्कूल, भाजू गांव का उच्च प्राथमिक स्कूल, लांक और जगनपुर के प्राथमिक स्कूल जनपद के अन्य सरकारी स्कूलों से अलग दिखते हैं।
गढ़ीश्याम का उच्च प्राथमिक स्कूल बना मिसाल
गांव लांक और जगनपुर के स्कूल भी पीछे नहीं
बच्चे सलीके से बैठकर करते हैं भोजन
स्कूल में प्रोजेक्टर से होती है पढ़ाई
यहां प्रोजेक्टर से पढ़ाई और कंप्यूटर का ज्ञान बच्चों को दिया जा रहा है। अंग्रेजी माध्यम से एनसीईआरटी की किताबों से शिक्षण कराया जा रहा है। दोपहर दो से पांच बजे तक अतिरिक्त क्लास भी चलती है। उन्होंने बताया कि नवाचार परीक्षा के दौरान 17 विषयों में स्कूल के बच्चों ने टॉप किया था। मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में 24 गोल्ड मेडल जीते हैं। सवाल यह है कि जब यह स्कूल चकाचक हो सकते हैं, तो जिले के अन्य सरकारी स्कूल क्यों नहीं, ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए बेहतर माहौल दिया जा सके।
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