सरकारी अस्पताल खुद ही ‘बीमार', सुविधाओं का टोटा, निजी अस्पताल पड़ता है महंगा, मरीज लाचार
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गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज लाचार हैं। निजी अस्पताल में इलाज महंगा है और सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। यह हालात तब हैं जबकि केंद्र और यूपी सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं पर खासा जोर दे रही है, मगर अभी भी मेरठ के सरकारी अस्पताल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सुविधाओं के अभाव में लाखों मरीजों को परेशानी हो रही है।
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, पीएल शर्मा जिला चिकित्सालय और जिला महिला अस्पतालों में हर साल करीब 15 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। इन्हें लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। चिकित्सक जांच लिखते हैं तो पता चलता है कि यह जांच सुविधा उपलब्ध ही नहीं है। नतीजतन, मायूस होकर वहां से जाना पड़ता है। इसके अलावा गंभीर रोगियों का इलाज भी इन अस्पतालों में नहीं मिलता है।
मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल को हर साल सरकार करोड़ों रुपये बजट देती है, हर मद के लिए अलग बजट है। सिर्फ दवाइयों के लिए ही 25 करोड़ से ज्यादा का बजट दिया जाता है। इसके बावजूद मरीजों को गंभीर बीमारी होने पर दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है।
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मरीजों को यहां से रेफर किए जाने पर तंज कस चुके हैं। साल 2017 में मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का निरीक्षण करने के दौरान उन्होंने कहा था कि जब यह सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, तो फिर यहां से मरीज रेफर क्यों किए जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज में नहीं ये सुविधाएं
लेजर तकनीक से आंखों का इलाज, जले हुए मरीज के लिए बर्न वार्ड, कैंसर के मरीजों के लिए रेडियोथैरेपी और लिवर और हृदय रोग।
जिला अस्पताल में नहीं हैं इनका इलाज
मस्तिष्क से संबंधित न्यूरो सर्जरी, कैंसर से संबंधित आंकोलोजी, त्वचा से संबंधित प्लास्टिक सर्जरी, गुर्दे से संबंधित नेफ्रोलॉजी, कैंसर से संबंधित रेडियोथैरेपी, बच्चों की बीमारी से संबंधित पीडियाट्रिक्स सर्जरी, हार्मोंन से संबंधित एंडोक्राइनोलॉजी (अंत:स्राव विद्या), महिलाओं की बीमारियों से संबंदित स्त्री एवं प्रसूति रोग।
जल्द मिलेंगी सुविधाएं
मेडिकल कॉलेज में जल्द ही काफी सुविधाएं मिलने लगेंगी। सुपर स्पेशियलिटी शुरू होने वाला है। इसके अलावा बर्न वार्ड आदि जो सुविधाएं अधूरी हैं, वे भी जल्द शुरू होने वाली हैं। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
इलाज देने के प्रयास जारी
जो सुविधा उपलब्ध हैं और जो उपलब्ध नहीं हैं, उन सभी का बोर्ड लगा है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। एमआरआई यूनिट बनकर तैयार है। जो सुविधाएं यहां नहीं हैं, उनके लिए मरीजों को मेडिकल रेफर कर दिया जाता है। - डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल