फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   goverment change nigam is out of reach from bjp

सरकार बदली पर निगम भाजपा की पकड़ से बाहर 

Fri, 28 Apr 2017 11:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Fri, 28 Apr 2017 11:40 AM IST
विज्ञापन
goverment change nigam is out of reach from bjp
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
प्रदेश में सरकार बदली, लेकिन नगर निगम पर भाजपा का शिकंजा नहीं कसा जा सका। ये बात निकाय चुनाव के लिए वार्ड परिसीमन को लेकर आपत्तियों में स्पष्ट हो गयी है। भले ही निगम में महापौर के साथ आधे से ज्यादा पार्षद भाजपा के हों, लेकिन वार्ड परिसीमन में जो खेल हुआ, वह कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। अब आपत्तियों को लेकर प्रशासन परेशान है। 
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव के बाद अब भाजपा की नजर नगर निकाय चुनावों पर है। हालांकि सरकार किसी की भी रही हो, लेकिन नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने ही परचम लहराया है। लेकिन सपा शासनकाल में भाजपा महापौर की पकड़ निगम पर मजबूत नजर नहीं आयी। अब यूपी में भाजपा सरकार आ चुकी है, लेकिन निगम पर शिकंजा अभी भी नजर नहीं आ रहा है। वार्ड परिसीमन को लेकर सबसे ज्यादा आपत्तियां भाजपा की ही तरफ से आयी हैं और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी का बयान कि यह परिसीमन किसी को लाभ देने के लिए हुआ है, वह सबसे ज्यादा अहम है। 
विज्ञापन


इन आपत्तियों ने किया निगम को कटघरे में खड़ा 
वार्ड परिसीमन 2011 की जनसंख्या के आधार पर हुआ है। इसमें शासन से जो जनसंख्या के आंकड़े आये वह परिसीमन के आंकड़ों से मेल नहीं खा रहे हैं। इसके कई हजार संख्या कम है। इसके अलावा शहर के करीब 60 मौहल्ले ऐसे हैं, जिनका नाम किसी भी वार्ड में दर्ज नहीं है। जबकि वार्ड परिसीमन के नक्शे में एक-एक मौहल्ले का नाम दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा परिसीमन में मुख्य मार्ग, रेल मार्ग आदि का ध्यान रखा जाता है। जिसके तहत उन्हें क्रास नहीं किया जायेगा, क्रासिंग के बाद नया वार्ड होगा। लेकिन कुछ मौहल्लों को इसी क्रासिंग के नियमों का उल्लंघन करते हुए दूसरे वार्डों में डाल दिया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आपत्ति निस्तारण में जुटा प्रशासन 
बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट के तमाम कर्मचारी परिसीमन आपत्तियों के निस्तारण में जुटे नजर आये। अपर जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने भी कई बार कर्मचारियों के बीच जाकर दिशा निर्देश दिये। सूत्रों की मानें तो यदि आपत्तियों पर ज्यादा गहनता से अध्ययन हुआ तो परिसीमन निरस्त हो सकता है। ऐसे में इसकी गाज नगर आयुक्त सहित निगम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिर सकती है। 


रेपिड सर्वे में भी घर बैठकर तैयार कर ली सर्वे रिपोर्ट
परिसीमन के साथ ही पिछड़ी जाति के रेपिड़ सर्वे में भी भारी गड़बड़ी की बात भाजपाई कर रहे हैं। महानगर उपाध्यक्ष विवेक रस्तोगी का कहना है कि यह सर्वे डोर टू डोर होता है। लेकिन किसी भी कर्मचारी ने घर घर जाकर सर्वे नहीं किया। नियमानुसार घर घर जाकर सर्वे के  बाद चॉक मिट्टी से घर के दरवाजे पर रिपोर्ट अंकित करनी होती है। लेकिन ऐसा सर्वे कहीं नजर नहीं आ रहा है। जबकि जिलाधिकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त को 80 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा होने की बात कह चुके  हैं। तो तय है कि रेपिड सर्वे में भी पूरी तरह फर्जीवाड़ा हुआ है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed