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संसार की सभी बेटियों में देवियों का वास : प्रदीप मिश्रा
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मेरठ। शताब्दीनगर में शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संसार में जितनी भी बेटियां और नारियां हैं, सभी में देवियों का वास है। सभी मां शक्ति का रूप हैं। सनातन धर्म की सभी नारियों को ऐसे वस्त्र पहनने चाहिएं, जिससे न धर्म संकट में आए और न धन संकट में आए और न ही सनातन धर्म संकट में आए। सनातन धर्म सबसे पवित्र है। हमारे संस्कार ही सनातन धर्म की पहचान है। सनातन धर्म के अनुसार हर नारी को सिर पर पल्ला रखना चाहिए। संसार अब पहले जैसा नहीं रहा है। जमाना बहुत खराब है। हमारा सनातन धर्म गलत दिशा में न जाए इसका ध्यान रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
अपना बल प्रबल करो, सनातन धर्म मजबूत करो
- कथावाचक ने कहा कि किसी साधु को अपना भगवान मत बनाओ, सिर्फ भगवान शिव पर विश्वास रखो। जरूरत पड़ने पर कोई काम नहीं आएगा। एक लोटा जल लेकर शिव के मंदिर में जाओगे। शिवलिंग पर जल चढ़ाओगे तो शिव की कृपा होगी। शिव ही नैया पार लगाएंगे। जैसा भाव पार्वती का भगवान शंकर को पाने का था। ऐसा भाव अपने अंदर जागृत करो। भगवान शंकर मिल जाएंगे।
सारे धाम शिव के चरणों में
- श्रीगणेश का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब श्री विनायक का सिर धड़ से अलग हुआ तो पार्वती ने गंगा मैया से कहा कि गंगा तुम तो मेरी बड़ी बहन हो, अगर मेरे विनायक का सर दोबारा जुड़ गया तो मैं तुम्हारे लिए सवा लाख दीपक जलाऊंगी। जब भगवान श्री गणेश का सिर जुड़ा तो माता पार्वती ने भगवान शंकर से कहा गंगा घाट चलो गंगा मैया को सवा लाख दीपक जलाने हैं। भगवान शंकर ने कहा कि जिस गंगा पर दीपक जलाने की बात कर रही हो, वह गंगा तो मुझमें से ही निकलती है। सारे ग्रह सारे नक्षत्र शिवलिंग में ही वास करते हैं। सारे धाम शिव के चरणों में ही हैं। इसीलिए भगवान शंकर को महामृत्युंजय कहा गया है जो मृत्यु को भी जीत सकता है। इस दौरान उन्हें अंधकासुर का प्रसंग सुनाया।
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कुछ लोगों ने कथा के बारे में भ्रम फैलाया
- पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कुछ लोगों ने कथा के बारे में भ्रम फैलाया। कथा में भगदड़ की बात कही गई। जानकारी मिलने पर कथा में पहुंचे भक्तों के घरों से फोन आए। लोगों को चिंता हुई। पुलिस और प्रशासन के द्वारा कथा स्थल पर अच्छी व्यवस्था की गई है। सारे इंतजाम सही किए गए हैं। कुछ लोगों की गलत सोच के कारण लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम किया गया।
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अपना बल प्रबल करो, सनातन धर्म मजबूत करो
- कथावाचक ने कहा कि किसी साधु को अपना भगवान मत बनाओ, सिर्फ भगवान शिव पर विश्वास रखो। जरूरत पड़ने पर कोई काम नहीं आएगा। एक लोटा जल लेकर शिव के मंदिर में जाओगे। शिवलिंग पर जल चढ़ाओगे तो शिव की कृपा होगी। शिव ही नैया पार लगाएंगे। जैसा भाव पार्वती का भगवान शंकर को पाने का था। ऐसा भाव अपने अंदर जागृत करो। भगवान शंकर मिल जाएंगे।
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सारे धाम शिव के चरणों में
- श्रीगणेश का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब श्री विनायक का सिर धड़ से अलग हुआ तो पार्वती ने गंगा मैया से कहा कि गंगा तुम तो मेरी बड़ी बहन हो, अगर मेरे विनायक का सर दोबारा जुड़ गया तो मैं तुम्हारे लिए सवा लाख दीपक जलाऊंगी। जब भगवान श्री गणेश का सिर जुड़ा तो माता पार्वती ने भगवान शंकर से कहा गंगा घाट चलो गंगा मैया को सवा लाख दीपक जलाने हैं। भगवान शंकर ने कहा कि जिस गंगा पर दीपक जलाने की बात कर रही हो, वह गंगा तो मुझमें से ही निकलती है। सारे ग्रह सारे नक्षत्र शिवलिंग में ही वास करते हैं। सारे धाम शिव के चरणों में ही हैं। इसीलिए भगवान शंकर को महामृत्युंजय कहा गया है जो मृत्यु को भी जीत सकता है। इस दौरान उन्हें अंधकासुर का प्रसंग सुनाया।
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कुछ लोगों ने कथा के बारे में भ्रम फैलाया
- पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि कुछ लोगों ने कथा के बारे में भ्रम फैलाया। कथा में भगदड़ की बात कही गई। जानकारी मिलने पर कथा में पहुंचे भक्तों के घरों से फोन आए। लोगों को चिंता हुई। पुलिस और प्रशासन के द्वारा कथा स्थल पर अच्छी व्यवस्था की गई है। सारे इंतजाम सही किए गए हैं। कुछ लोगों की गलत सोच के कारण लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम किया गया।