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भक्ति से ही भगवान को बांधा जा सकता है : अंश वशिष्ठ
Wed, 26 Aug 2026 06:40 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 26 Aug 2026 06:40 PM IST
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श्रीमद्भागवत कथा में पूतना वध एवं गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। दामोदर लीला, पूतना वध, भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार तथा गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
दामोदर लीला का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि माता यशोदा ने माखन चोरी और मटकी फोड़ने पर भगवान श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधना चाहा। भगवान को बांधने के लिए माता ने जितनी भी रस्सियां जोड़ीं वे हर बार दो अंगुल छोटी पड़ती रहीं। अंततः माता के प्रेम, परिश्रम और वात्सल्य के आगे भगवान बंध गए। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण को दामोदर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह लीला संदेश देती है कि भगवान को ज्ञान, तप या धन से नहीं बल्कि निष्कपट प्रेम और भक्ति से बांधा जा सकता है।
भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाते हुए पंडित अंश वशिष्ठ ने बताया कि महर्षि गर्गाचार्य ने नंद बाबा के घर पहुंचकर गुप्त रूप से श्रीकृष्ण और बलराम जी का नामकरण संस्कार किया।
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इसके बाद गोवर्धन लीला का सुंदर वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र यज्ञ के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने मूसलाधार वर्षा कर दी। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय प्रदान किया।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भक्ति में लीन रहे। पूरे कथा पंडाल का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर आचार्य ध्रुव वशिष्ठ ने यजमान शिवम अरोरा ने परिवार के साथ व्यास पूजन कराया। कथा में पहुंचे जीएसटी कमिश्नर ओम प्रकाश रतूड़ी ने भी व्यास पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन में हरीश अरोरा, नीरज अरोरा, संजय अरोरा, प्रवीण अरोरा, पार्षद विनय अरोरा, आलोक सिसौदिया आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राज राजेश्वरी मंडप सम्राट पैलेस गढ़ रोड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित अंश वशिष्ठ ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। दामोदर लीला, पूतना वध, भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार तथा गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
दामोदर लीला का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि माता यशोदा ने माखन चोरी और मटकी फोड़ने पर भगवान श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधना चाहा। भगवान को बांधने के लिए माता ने जितनी भी रस्सियां जोड़ीं वे हर बार दो अंगुल छोटी पड़ती रहीं। अंततः माता के प्रेम, परिश्रम और वात्सल्य के आगे भगवान बंध गए। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण को दामोदर कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह लीला संदेश देती है कि भगवान को ज्ञान, तप या धन से नहीं बल्कि निष्कपट प्रेम और भक्ति से बांधा जा सकता है।
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भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाते हुए पंडित अंश वशिष्ठ ने बताया कि महर्षि गर्गाचार्य ने नंद बाबा के घर पहुंचकर गुप्त रूप से श्रीकृष्ण और बलराम जी का नामकरण संस्कार किया।
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इसके बाद गोवर्धन लीला का सुंदर वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र यज्ञ के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने मूसलाधार वर्षा कर दी। ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय प्रदान किया।
कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ भक्ति में लीन रहे। पूरे कथा पंडाल का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर आचार्य ध्रुव वशिष्ठ ने यजमान शिवम अरोरा ने परिवार के साथ व्यास पूजन कराया। कथा में पहुंचे जीएसटी कमिश्नर ओम प्रकाश रतूड़ी ने भी व्यास पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन में हरीश अरोरा, नीरज अरोरा, संजय अरोरा, प्रवीण अरोरा, पार्षद विनय अरोरा, आलोक सिसौदिया आदि रहे।