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पीएफआई से जुड़े होने के शक में 11 से 13 घंटे पूछताछ
सार
पीएफआई से जुड़े होने के शक में 11 से 13 घंटे पूछताछमोदीनगर।शाम को सभी को मोदीनगर थाना पुलिस के हवाले कर एटीएस और आईबी की टीमें चली गईं।फिलहाल परवेज की तलाश पूरी शिद्दत के साथ की जा रही है।
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विस्तार
पीएफआई से जुड़े होने के शक में 11 से 13 घंटे पूछताछ
मोदीनगर। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पश्चिमी यूपी प्रभारी परवेज अहमद के पुलिस हिरासत से भाग जाने के बाद सुर्खियों में आए गांव कलछीना से मंगलवार सुबह पांच बजे 11 लोग हिरासत में लिए गए। पीएफआई से जुड़े होने के शक में उन्हें मोदीनगर थाने ले जाकर एंटी टेरेरिज्म स्कवॉयड (एटीएस) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम ने 13 घंटे तक पूछताछ की। उनका पीएफआई से सीधे संपर्क न मिलने पर शाम को छह बजे मुचलका पाबंद कर सभी को छोड़ दिया गया।
एटीएस ने 22 सितंबर को भी कलछीना में छापा मारा। तब परवेज घर पर ही मिला था। उसके परिवार की महिलाओं और पड़ोसियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए उसे पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया था। वह मौके से भाग निकला और अब तक हाथ नहीं आया है। पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाली।
उसके पिता इमरान और भाई फुरकान से पूछताछ की। दो दिन बाद ही पश्चिमी यूपी में पीएफआई के कई एजेंट पकड़े गए। उनसे की गई पूछताछ में कलछीना के 11 लोगों के परवेज से करीबी संबंध होने की जानकारी मिली। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसी आधार पर मंगलवार की कार्रवाई की गई। सभी से एटीएस और आईबी ने अलग-अलग पूछताछ की। इनमें से एक यू-ट्यूब चैनल चलाता है जबकि दो शिक्षक हैं। शाम को सभी को मोदीनगर थाना पुलिस के हवाले कर एटीएस और आईबी की टीमें चली गईं। उधर, हिरासत में लिए गए लोगों के परिजन और गांव के लोग थाने पर जमा हो गए। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो वे चले गए।
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इन्हें किया गया मुचलका पाबंद
भोजपुर पुलिस ने मोहम्मद हसन पुत्र फारूख, इस्तकार पुत्र दीन मोहम्मद, बदरुद्दीन पुत्र महबूब, रियाजुल हसन पुत्र जुल्फिकार, हामिद पुत्र फैयाज, शाहरुख पुत्र हामिद, औरंगजेब पुत्र खामिद, शाह आलम पुत्र दिलशाद, नसरुद्दीन पुत्र महबूब अली, जाकिर पुत्र शमशेर और मोहम्मद शाहिद पुत्र इस्तयाक का धार्मिक भावनाएं भड़काने तथा शांतिभंग के आरोप में मुचलका पाबंद किया। इस संबंध में उप जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला का कहना है कि पुलिस की ओर से 11 लोगों के विरुद्ध शांति भंग करने और धार्मिक भावना भड़काने का आरोप लगाते हुए मुचलका पाबंद करने के लिए एक रिपोर्ट प्रेषित की गई है।
मदद के बहाने भड़का रही पीएफआई
हिरासत में लिए गए लोगों ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के दौरान पीएफआई के एजेंटों में कलछीना गांव में खाद्य सामग्री बांटी थी। इसके बाद एजेंटों ने धार्मिक किताबें और कुछ परचे बांटे। पुलिस का मानना है कि पीएफआई इसी पैटर्न पर काम कर रही है। उसके एजेंट पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें भड़काते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि एटीएस को क्षेत्र के और भी कई लोगों की तलाश है। फिलहाल परवेज की तलाश पूरी शिद्दत के साथ की जा रही है। उसके मिलने पर कई राज खुल सकते हैं।
पहले भी सुर्खियों में रहा है कलछीना
कलछीना गांव में पीएफआई के एजेंटों और पदाधिकारियों के सक्र्रिय होने की पहले भी काफी चर्चा रही है। वर्ष 2019 में राम मंदिर फैसले और सीएए के विरोध में चले आंदोलन के दौरान कलछीना सुर्खियों में रहा था। खुफिया विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने यहां डेरा डालकर संदिग्धों पर नजर रखी थी।
भोजपुर पुलिस से उठा एटीएस का भरोसा
22 सितंबर को जब एटीएस ने कलछीना में छापा मारा तो वहां पहले से ही आसपास के लोग जुट चुके थे। उनके विरोध के कारण ही परवेज हिरासत से भाग जाने में कामयाब रहा था। तब भोजपुर थाना पुलिस की भूमिका को संदेह की नजर से देखा गया था। माना गया कि भोजपुर पुलिस में से किसी ने एटीएस के आने की सूचना लीक की जिससे अभियान असफल हुआ। मंगलवार को एटीएस की टीम ने भोजपुर थाना पुलिस को सूचना ही नहीं दी। वह अपने साथ मोदीनगर थाना पुलिस को लेकर गई जबकि कलछीना गांव भोजपुर थाना के क्षेत्र में है। इससे माना गया कि एटीएस का भरोसा भोजपुर पुलिस से उठ गया। इस बार कोई विरोध नहीं हुआ। हालांकि, इस बारे में पूछे जाने पर अफसरों ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
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मोदीनगर। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पश्चिमी यूपी प्रभारी परवेज अहमद के पुलिस हिरासत से भाग जाने के बाद सुर्खियों में आए गांव कलछीना से मंगलवार सुबह पांच बजे 11 लोग हिरासत में लिए गए। पीएफआई से जुड़े होने के शक में उन्हें मोदीनगर थाने ले जाकर एंटी टेरेरिज्म स्कवॉयड (एटीएस) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की टीम ने 13 घंटे तक पूछताछ की। उनका पीएफआई से सीधे संपर्क न मिलने पर शाम को छह बजे मुचलका पाबंद कर सभी को छोड़ दिया गया।
एटीएस ने 22 सितंबर को भी कलछीना में छापा मारा। तब परवेज घर पर ही मिला था। उसके परिवार की महिलाओं और पड़ोसियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए उसे पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया था। वह मौके से भाग निकला और अब तक हाथ नहीं आया है। पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाली।
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उसके पिता इमरान और भाई फुरकान से पूछताछ की। दो दिन बाद ही पश्चिमी यूपी में पीएफआई के कई एजेंट पकड़े गए। उनसे की गई पूछताछ में कलछीना के 11 लोगों के परवेज से करीबी संबंध होने की जानकारी मिली। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसी आधार पर मंगलवार की कार्रवाई की गई। सभी से एटीएस और आईबी ने अलग-अलग पूछताछ की। इनमें से एक यू-ट्यूब चैनल चलाता है जबकि दो शिक्षक हैं। शाम को सभी को मोदीनगर थाना पुलिस के हवाले कर एटीएस और आईबी की टीमें चली गईं। उधर, हिरासत में लिए गए लोगों के परिजन और गांव के लोग थाने पर जमा हो गए। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो वे चले गए।
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इन्हें किया गया मुचलका पाबंद
भोजपुर पुलिस ने मोहम्मद हसन पुत्र फारूख, इस्तकार पुत्र दीन मोहम्मद, बदरुद्दीन पुत्र महबूब, रियाजुल हसन पुत्र जुल्फिकार, हामिद पुत्र फैयाज, शाहरुख पुत्र हामिद, औरंगजेब पुत्र खामिद, शाह आलम पुत्र दिलशाद, नसरुद्दीन पुत्र महबूब अली, जाकिर पुत्र शमशेर और मोहम्मद शाहिद पुत्र इस्तयाक का धार्मिक भावनाएं भड़काने तथा शांतिभंग के आरोप में मुचलका पाबंद किया। इस संबंध में उप जिलाधिकारी शुभांगी शुक्ला का कहना है कि पुलिस की ओर से 11 लोगों के विरुद्ध शांति भंग करने और धार्मिक भावना भड़काने का आरोप लगाते हुए मुचलका पाबंद करने के लिए एक रिपोर्ट प्रेषित की गई है।
मदद के बहाने भड़का रही पीएफआई
हिरासत में लिए गए लोगों ने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के दौरान पीएफआई के एजेंटों में कलछीना गांव में खाद्य सामग्री बांटी थी। इसके बाद एजेंटों ने धार्मिक किताबें और कुछ परचे बांटे। पुलिस का मानना है कि पीएफआई इसी पैटर्न पर काम कर रही है। उसके एजेंट पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें भड़काते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि एटीएस को क्षेत्र के और भी कई लोगों की तलाश है। फिलहाल परवेज की तलाश पूरी शिद्दत के साथ की जा रही है। उसके मिलने पर कई राज खुल सकते हैं।
पहले भी सुर्खियों में रहा है कलछीना
कलछीना गांव में पीएफआई के एजेंटों और पदाधिकारियों के सक्र्रिय होने की पहले भी काफी चर्चा रही है। वर्ष 2019 में राम मंदिर फैसले और सीएए के विरोध में चले आंदोलन के दौरान कलछीना सुर्खियों में रहा था। खुफिया विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने यहां डेरा डालकर संदिग्धों पर नजर रखी थी।
भोजपुर पुलिस से उठा एटीएस का भरोसा
22 सितंबर को जब एटीएस ने कलछीना में छापा मारा तो वहां पहले से ही आसपास के लोग जुट चुके थे। उनके विरोध के कारण ही परवेज हिरासत से भाग जाने में कामयाब रहा था। तब भोजपुर थाना पुलिस की भूमिका को संदेह की नजर से देखा गया था। माना गया कि भोजपुर पुलिस में से किसी ने एटीएस के आने की सूचना लीक की जिससे अभियान असफल हुआ। मंगलवार को एटीएस की टीम ने भोजपुर थाना पुलिस को सूचना ही नहीं दी। वह अपने साथ मोदीनगर थाना पुलिस को लेकर गई जबकि कलछीना गांव भोजपुर थाना के क्षेत्र में है। इससे माना गया कि एटीएस का भरोसा भोजपुर पुलिस से उठ गया। इस बार कोई विरोध नहीं हुआ। हालांकि, इस बारे में पूछे जाने पर अफसरों ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।