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आरटीआई में मांगी जा रही थाने की जीडी कॉपी  

Thu, 28 Jul 2016 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Thu, 28 Jul 2016 03:08 AM IST
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GD copy of the police station asking for RTI
पुलिस कैप लोगो। - फोटो : अमर उजाला
पुलिस महकमे में आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगने का काम ज्यादा बढ़ गया है। थाने की गोपनीय माने जाने वाली जनरल डायरी (जीडी) की कॉपी से लेकर अपने केसों में विवेचना की स्थिति की सूचना आरटीआई के तहत मांगी जा रही है। महिलाएं भी आरटीआई के सहारे पूछ रही हैं कि उनके केस की जांच कहां तक पहुंची।
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थाने में रोजाना की लिखतपढ़त, पुलिसकर्मियों की रवानगी और आमद के अलावा, थाने पर आने वाली हर सूचना और शिकायत को जनरल डायरी (जीडी) में दर्ज किया जाता है। किसी मुल्जिम की तलाश में दबिश, कोई गिरफ्तारी, बरामदगी या घटना का हवाला भी जीडी में डाला जाता है। 24 घंटे में से कुछ घंटे ऐसे होते हैं, जब जीडी रोक दी जाती है और स्थिति के हिसाब से उसमें एंट्री की जाती है। उच्चाधिकारी जब भी जीडी का निरीक्षण करते हैं तो उसमें पुलिस का खेल ही सामने आता है। 
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जीडी की कॉपी बनी महत्वपूर्ण
सूचना
का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत जो सूचना मांगी जा रही हैं उनमें सबसे ज्यादा जीडी की कॉपी हैं। पूछा जाता है कि कंट्रोल रूम पर दी गई सूचना में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, थानेदार की उम्र क्या है, शिकायती पत्रों में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, पीड़ित द्वारा थाने में जो एफआईआर दर्ज कराई थी, उसमें विवेचक ने नामजद मुल्जिमों के कौन-कौन से नाम चार्जशीट में भेजे।
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किन-किन धाराओं में केस दर्ज हुआ। चोरी के मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की, मुल्जिम पकड़े गये तो सामान कितना बरामद हुआ। एफआईआर की कॉपी पर आरटीआई मांगी जा रही है। करीब 13 प्रतिशत आरटीआई महिला संबंधी अपराधों पर मांगी जा ही है। जिसमें दुष्कर्म, छेड़छाड़, मारपीट और दहेज उत्पीड़न के मामले हैं।

यह है रिकॉर्ड
2015
में जिले में पुलिस विभाग से 3200 सूचनाएं आरटीआई के तहत मांगी गईं। जबकि एक जनवरी 2016 से 25 जुलाई 2016 तक 1958 सूचना मांगी गई है। आरटीआई सेल से जुलाई माह की 60 सूचना बची हैं, जो मांगे जाने की तिथि से तीस दिन के अंदर दी जाएंगी।

हर सीओ सहायक जन सूचना अधिकारी:
पुलिस
विभाग की सूचनाएं देने के लिए पुलिस लाइन में आरटीआई सेल बना है। जिसमें एक इंस्पेक्टर और छह पुलिस कर्मी तैनात हैं। एसपी क्राइम जन सूचना अधिकारी है, जबकि सभी सर्किल के सीओ सहायक जनसूचना अधिकारी हैं।


कोट
आरटीआई
के तहत जिले में रोजाना करीब दस सूचनाएं मांगी जाती हैं। जो पुलिस महकमे के अलग-अलग विभाग से संबंधित होती हैं।-  हरिराम सिंह, इंस्पेक्टर आरटीआई सेल
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