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आंखों से आंसू चुरा रहे गैजेट्स
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Mar 2017 03:29 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कंप्यूटर और मोबाइल बच्चों की आंखों से आंसू चुरा रहे हैं। गैजेट्स के अधिक प्रयोग से ड्राय आई प्रॉब्लम बढ़ रही हैं। स्कूलों में आयोजित होने वाले नेत्र परीक्षण शिविरों में ये परेशानी अधिक सामने आ रही हैं। छोटी उम्र में ही बच्चों की आंखों पर मोटे-मोटे चश्मे लग रहे हैं।
लैपटॉप और गैजेट का अधिकतम प्रयोग स्कूली बच्चों की आंखों पर घातक असर कर रहा है। गैजेट पर देर तक काम करना, बिना पलक झपकाए स्क्रीन को एकटक देखने से आंखों पर बनी आंसू की परत टूटने लगती है। इससे आंखों की नमी घटकर सूखापन आने लगता है। पब्लिक स्कूलों में होने वाले नेत्र जांच शिविर में 100 में से 60 बच्चों में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) की शिकायत मिल रही है।
सीवीएस के यह हैं लक्षण
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) के कारण आंखों में जलन, लगातार चश्मे का नंबर बढ़ना, आंखों में सूखापन, फिल्यरी मसल्स में सिकुड़न, स्ट्रेन, सिरदर्द, तनाव, याददाश्त कमजोर होना आदि लक्षण हैं।
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अपनाएं 20-20 का फॉर्मूला
आंखों को दुरुस्त बनाए रखने के लिए 20-20 का फार्मूला अपनाएं। चिकित्सकों के अनुसार प्रति 20 मिनट पर कंप्यूटर या गैजेट से नजरें हटाएं। अपनी सीट से उठकर टहलें। हर 20 सेकेंड पर आंखों को झपकाते रहें। कभी भी एकटक होकर गैजेट को न देखें। गैजेट से आंखों की दूरी हमेशा 20 इंच की जरूर रखें। 20 फीट की दूरी को 20 सेकेंड तक देखें। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने भी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए 20-20 के सूत्र को पुख्ता बताया है।
गैजेट का प्रयोग कम करें
20-20 फार्मूला आंखों के लिए कंप्यूटर प्रोटोकाल है। लगातार 4 घंटे तक मोेबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से रेटिना और आंखों की मांसपेशियों पर दबवा बनता है। 20-20 सूत्र से आंखों को आराम मिलता है और ड्राइनेस की संभावना कम होती है। बहुत ज्यादा गैजेट प्रयोग करने के कारण बच्चों में सीवीएस की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। 8 से 10 मामले बच्चों के आते हैं। - डॉ. संदीप मित्थल, वरिष्ठ नेत्ररोग विशेषज्ञ
मोबाइल ज्यादा घातक
विशेषज्ञों के मुताबिक आंखों के लिए मोबाइल अधिक घातक है। आज के समय में दसवीं और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास स्मार्ट फोन हैं। वे लगातार फेसबुक, व्हाट्सएप का प्रयोग करते हैं। इससे आंखों की रोशनी कम होने लगती है। पहले बड़े बुजुर्ग कहते थे कि चिकनाई (दूध, घी) कम खाने से आंखों की रोशनी कम होती है, लेकिन अब मोबाइल के प्रयोग से रोशनी कम हो रही है।
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लैपटॉप और गैजेट का अधिकतम प्रयोग स्कूली बच्चों की आंखों पर घातक असर कर रहा है। गैजेट पर देर तक काम करना, बिना पलक झपकाए स्क्रीन को एकटक देखने से आंखों पर बनी आंसू की परत टूटने लगती है। इससे आंखों की नमी घटकर सूखापन आने लगता है। पब्लिक स्कूलों में होने वाले नेत्र जांच शिविर में 100 में से 60 बच्चों में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) की शिकायत मिल रही है।
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सीवीएस के यह हैं लक्षण
कंप्यूटर विजन सिंड्रोम (सीवीएस) के कारण आंखों में जलन, लगातार चश्मे का नंबर बढ़ना, आंखों में सूखापन, फिल्यरी मसल्स में सिकुड़न, स्ट्रेन, सिरदर्द, तनाव, याददाश्त कमजोर होना आदि लक्षण हैं।
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अपनाएं 20-20 का फॉर्मूला
आंखों को दुरुस्त बनाए रखने के लिए 20-20 का फार्मूला अपनाएं। चिकित्सकों के अनुसार प्रति 20 मिनट पर कंप्यूटर या गैजेट से नजरें हटाएं। अपनी सीट से उठकर टहलें। हर 20 सेकेंड पर आंखों को झपकाते रहें। कभी भी एकटक होकर गैजेट को न देखें। गैजेट से आंखों की दूरी हमेशा 20 इंच की जरूर रखें। 20 फीट की दूरी को 20 सेकेंड तक देखें। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने भी आंखों को सेहतमंद रखने के लिए 20-20 के सूत्र को पुख्ता बताया है।
गैजेट का प्रयोग कम करें
20-20 फार्मूला आंखों के लिए कंप्यूटर प्रोटोकाल है। लगातार 4 घंटे तक मोेबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने बैठे रहने से रेटिना और आंखों की मांसपेशियों पर दबवा बनता है। 20-20 सूत्र से आंखों को आराम मिलता है और ड्राइनेस की संभावना कम होती है। बहुत ज्यादा गैजेट प्रयोग करने के कारण बच्चों में सीवीएस की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। 8 से 10 मामले बच्चों के आते हैं। - डॉ. संदीप मित्थल, वरिष्ठ नेत्ररोग विशेषज्ञ
मोबाइल ज्यादा घातक
विशेषज्ञों के मुताबिक आंखों के लिए मोबाइल अधिक घातक है। आज के समय में दसवीं और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के पास स्मार्ट फोन हैं। वे लगातार फेसबुक, व्हाट्सएप का प्रयोग करते हैं। इससे आंखों की रोशनी कम होने लगती है। पहले बड़े बुजुर्ग कहते थे कि चिकनाई (दूध, घी) कम खाने से आंखों की रोशनी कम होती है, लेकिन अब मोबाइल के प्रयोग से रोशनी कम हो रही है।