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गठबंधन की जीत ने जगाई लोकसभा चुनाव में उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Dec 2017 01:51 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सत्ताधारी पार्टी भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी के खिलाफ बने विपक्षी पार्टियों के गठबंधन की जीत ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भी उम्मीद जगा दी है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय कैंपस चुनाव में अध्यक्ष पद हथियाने के बाद बुलंद हौसले के साथ मेरठ कालेज के चुनाव में उतरे विपक्षी दलों ने यहां भी एबीवीपी को करारी शिकस्त देते हुए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कब्जा किया। रासना के शालीग्राम शर्मा स्मारक डिग्री कॉलेज में तो रालोद का पैनल निर्विरोध निर्वाचित हो गया। पार्टी की तरफ बढ़ते युवाओं के रुझान से रालोद नेताओं की भी बांछें खिलने लगी हैं। रालोद-एनएसयूआई गठबंधन ने एनएएस डिग्री कॉलेज में भी साझा पैनल उतारा है। वहीं डीएन डिग्री कॉलेज में इस गठबंधन के साथ समाजवादी छात्रसभा भी शामिल हो गई है।
लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा को युवाओं का भरपूर साथ मिला। युवाओं ने मोदी लहर में बहकर पार्टी को जबर्दस्त समर्थन दिया और केंद्र से लेकर राज्य तक सरकार बनवाई। अलग-अलग लड़कर लगातार पिट रहे विपक्षी दलों में एक होने की कवायद तो विधानसभा चुनाव में भी हुई लेकिन सपा और कांग्रेस के अलावा उस गठबंधन में रालोद व बसपा शामिल नहीं हुए। विपक्षी दलों के वोटर बटने से इसका फायदा उठाने में भी भाजपा सफल रही। कॉलेजों में चल रहे छात्रसंघ चुनावों में विपक्ष ने एक होकर भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी की तगड़ी घेरेबंदी की है। 15 मार्च को सीसीएसयू में संपन्न हुए कैंपस छात्रसंघ चुनाव में रालोद-एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद झटका था। समाजवादी छात्रसभा का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। जबकि एबीवीपी तीसरे नंबर पर रही थी। यहां फार्मूला हिट होने के बाद यूनिवर्सिटी के सबसे बड़े मेरठ कॉलेज में भी इसी फार्मूले को अपनाया गया। यहां रालोद-एनएसयूआई के साथ छात्रसभा भी आ गई। तीनों के संयुक्त पैनल ने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। अध्यक्ष पद पर गठबंधन को रिकॉर्ड 1853 वोट हासिल हुईं।
रालोद नेताओं के चेहरे खिले
छात्रसंघ चुनावों में रालोद के सितारे बुलंदी पर चल रहे हैं। सीसीएसयू कैंपस छात्रसंघ अध्यक्ष पद झटकने के बाद मेरठ कालेज में भी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद हथिया लिया है। युवाओं के पार्टी की तरफ वापसी करने और पार्टी की टोपी और पटका युवाओं के गले में दिखाई देने से नेताओं की बांछें खिलनी शुरू हो गई हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश संगठन प्रभारी एवं छात्र राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी डॉ. राजकुमार सांगवान इसे सकारात्मक संकेत बताते हैं। कहते है कि केंद्र सरकार से मिली मायूसी से हताश हुए युवा रालोद की तरफ वापसी कर रहा है। लोकसभा चुनाव 2014 में युवा वोटरों के छिटकने से पार्टी को नुकसान हुआ था।
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लोकसभा चुनाव 2014 और यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा को युवाओं का भरपूर साथ मिला। युवाओं ने मोदी लहर में बहकर पार्टी को जबर्दस्त समर्थन दिया और केंद्र से लेकर राज्य तक सरकार बनवाई। अलग-अलग लड़कर लगातार पिट रहे विपक्षी दलों में एक होने की कवायद तो विधानसभा चुनाव में भी हुई लेकिन सपा और कांग्रेस के अलावा उस गठबंधन में रालोद व बसपा शामिल नहीं हुए। विपक्षी दलों के वोटर बटने से इसका फायदा उठाने में भी भाजपा सफल रही। कॉलेजों में चल रहे छात्रसंघ चुनावों में विपक्ष ने एक होकर भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी की तगड़ी घेरेबंदी की है। 15 मार्च को सीसीएसयू में संपन्न हुए कैंपस छात्रसंघ चुनाव में रालोद-एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद झटका था। समाजवादी छात्रसभा का प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। जबकि एबीवीपी तीसरे नंबर पर रही थी। यहां फार्मूला हिट होने के बाद यूनिवर्सिटी के सबसे बड़े मेरठ कॉलेज में भी इसी फार्मूले को अपनाया गया। यहां रालोद-एनएसयूआई के साथ छात्रसभा भी आ गई। तीनों के संयुक्त पैनल ने अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद पर कब्जा जमा लिया। अध्यक्ष पद पर गठबंधन को रिकॉर्ड 1853 वोट हासिल हुईं।
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रालोद नेताओं के चेहरे खिले
छात्रसंघ चुनावों में रालोद के सितारे बुलंदी पर चल रहे हैं। सीसीएसयू कैंपस छात्रसंघ अध्यक्ष पद झटकने के बाद मेरठ कालेज में भी अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद हथिया लिया है। युवाओं के पार्टी की तरफ वापसी करने और पार्टी की टोपी और पटका युवाओं के गले में दिखाई देने से नेताओं की बांछें खिलनी शुरू हो गई हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश संगठन प्रभारी एवं छात्र राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी डॉ. राजकुमार सांगवान इसे सकारात्मक संकेत बताते हैं। कहते है कि केंद्र सरकार से मिली मायूसी से हताश हुए युवा रालोद की तरफ वापसी कर रहा है। लोकसभा चुनाव 2014 में युवा वोटरों के छिटकने से पार्टी को नुकसान हुआ था।
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