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गैस रिफलिंग से शादी समारोह के पंडाल में आग, 25 झुलसे
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 25 Nov 2015 02:07 AM IST
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ढबाईनगर में मंगलवार शाम गैस रिफलिंग के दौरान दुकान में आग लग गई। लपटों ने बराबर में चल रहे शादी समारोह के पांडाल को भी चपेट में ले लिया। इससे वहां चीख पुकार के बाद भगदड़ मच गई। सूचना पर पहुंचे दमकल विभाग के कर्मियों और पुलिस ने बमुश्किल आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक आग से 25 लोग झुलस गए थे। घायलों में ज्यादातर बच्चे हैं। उन्हें मेडिकल कॉलेज और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। चीख पुकार से अस्पताल भी गूंज उठा। वहीं रात में तीन घायलों को दिल्ली रेफर कर दिया गया।
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ढबाईनगर गली नंबर- 14 निवासी निजामुद्दीन की दो बेटियों का मंगलवार को निकाह था। क्षेत्र के अहमदनगर निवासी इकबाल के बेटे नफीस और यूसुफ के बेटे आदिल की बरात यहां आई हुई थी। शाम करीब साढ़े चार बजे पांडाल में कार्यक्रम चल रहा था। तभी एक धमाके की आवाज सुनाई दी।
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लोगों ने बाहर आकर देखा तो बराबर में गैस रिफलिंग करने वाले इंतजार पुत्र निजामुद्दीन की दुकान में आग लग गई थी। देखते ही देखते करीब 25 फीट ऊंची लपटों ने शादी समारोह के पांडाल को भी चपेट में ले लिया। जब तक लोग संभल पाते आग ने भीषण रूप धारण कर लिया। यह देख पांडाल में भगदड़ मच गई।
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बच्चों और महिलाओं में चीख पुकार मच गई। सूचना पर दमकल विभाग के सीएफओ आईएस सोनी कर्मचारियों और तीन गाड़ियों के साथ मौके पर पहुंचे। इस बीच पुलिस भी आ गई। दमकल विभाग की गाड़ियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बच्चों सहित 25 लोग झुलस गए। उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां आधा दर्जन बच्चों की हालत गंभीर है।
झुलसे लोगों के परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में इलाज में देरी होने पर सपा नेता रफीक अंसारी के साथ हंगामा कर दिया। जिसके बाद डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कराया। तीन घायलों को रात में दिल्ली रेफर कर दिया गया। इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा ने बताया कि जिस दुकान में गैस सिलेंडर रखे थे उसमें आग पकड़ने से बड़ा हादसा हुआ।
आग से ये झुलसे
निजामुद्दीन, जिशान (10), ऊजैफ (9), आस मोहम्मद (25), रिहान (6), अश्रया (8), सोफिया (10), शहनवाज (19), रहीसुद्दीन (70), चांद मोहम्मद (8), सुजेब (11), इकराम की पत्नी, सादिक (14), अनम (11), रेशमा सहित 18 घायल हैं। घायलों में सोफिया और एक बच्चे की हालत नाजुक है।
अपनों को पहचानना भी हो रहा था मुश्किल
आग से बच्चे और लोग सबसे अधिक झुलसें है। 6 साल के बच्चे से लेकर 70 साल तक के बुजुर्ग भी आग की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि एक तरफ जहां लोग अपनों को बचाने के लिए दौड़ पड़े वहीं झुलसे हुए बच्चों की पहचान भी करना भी मुश्किल हो रहा था।