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फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, खेतों में जलभराव से फसलें हुई खराब
Sun, 24 Aug 2025 09:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 24 Aug 2025 09:45 PM IST
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221.50 मीटर पर खतरे का निशान, 219.30 मीटर पहुंचा जलस्तर
हस्तिनापुर। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में कई दिनों से हो रही बारिश के कारण लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। खतरे का निशान 221.50 मीटर है और इस समय नदी का जलस्तर 219.30 मीटर है। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि रविवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर एक लाख 64 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया, जो पिछले चार दिनों में सर्वाधिक है।
पांच अगस्त को खादर क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण कई गांव के जंगल और खेत अभी भी जलमग्न है। हजारों हेक्टेयर फसल पानी में गलकर नष्ट हो चुकी है। गांव के चारों ओर पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को अपने खेतों पर जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चारे की फसल भी खराब हुई है। जिससे पशुओं के लिए चारे का संकट बढ़ा है।
खादर क्षेत्र में कई स्थानों पर गंगा कटान कर रही है जिसमें आसपास खड़ी किसानों की तैयार फसल गंगा में समा रही है। खादर क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के जंगलों में पानी भरने के कारण संपर्क मार्ग को पर भी चलना आसान नहीं है, क्योंकि बाढ़ के कारण टूटी सड़कों से पानी उतरने से आवागमन में परेशानी हो रही है।
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हस्तिनापुर। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में कई दिनों से हो रही बारिश के कारण लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। खतरे का निशान 221.50 मीटर है और इस समय नदी का जलस्तर 219.30 मीटर है। बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि रविवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर एक लाख 64 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया, जो पिछले चार दिनों में सर्वाधिक है।
पांच अगस्त को खादर क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण कई गांव के जंगल और खेत अभी भी जलमग्न है। हजारों हेक्टेयर फसल पानी में गलकर नष्ट हो चुकी है। गांव के चारों ओर पानी भरा होने के कारण ग्रामीणों को अपने खेतों पर जाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चारे की फसल भी खराब हुई है। जिससे पशुओं के लिए चारे का संकट बढ़ा है।
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खादर क्षेत्र में कई स्थानों पर गंगा कटान कर रही है जिसमें आसपास खड़ी किसानों की तैयार फसल गंगा में समा रही है। खादर क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के जंगलों में पानी भरने के कारण संपर्क मार्ग को पर भी चलना आसान नहीं है, क्योंकि बाढ़ के कारण टूटी सड़कों से पानी उतरने से आवागमन में परेशानी हो रही है।
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