{"_id":"5e31ee1c8ebc3e4b10384a2d","slug":"ganga-express-way-meerut-news-mrt466269758","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा एक्सप्रेस-वे : गांवों में भूमि चिह्नांकन शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा एक्सप्रेस-वे : गांवों में भूमि चिह्नांकन शुरू
विज्ञापन
मेरठ।
मेरठ से प्रयागराज तक बनाए जाने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए गांवों में जमीन चिह्नांकन शुरू हो गया है। देश का सबसे लंबा (628 किलोमीटर) गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ के 34 गांवों से होकर गुजरेगा। इसकी शुरुआत एनएच-58 स्थित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से होगी। अंतिम छोर प्रयागराज स्थित गांव खेमांदपुर, सोरांव होगा। उप्र एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इसको बनाने का जिम्मा लिया है। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिए एलएन मालवीय कंसल्टेंट की नियुक्ति हो चुकी है।
गंगा एक्सप्रेस-वे की डीपीआर बनाने के लिए एक्सप्रेस-वे परियोजना में आने वाले गांव, भूमि और खेतों का ब्योरा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए सोलाना, बहादरपुर सहित हापुड़ रोड पर बिजौली, गोविंदपुर, कौल में जमीन पर निशान लगने शुरू कर दिए गए हैं। जमीन को चिह्नित करने के बाद प्रस्तावित भूमि किसानों से अधिग्रहित की जाएगी। ये एक्सप्रेस-वे प्रयागराज, ज्योतिबाफूलेनगर, हापुड़, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होकर मेरठ तक पहुंचेगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से लिंक होगा
जिन गांवों को गंगा एक्सप्रेस वे में शामिल किया गया है, वही गांव दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे में शामिल हैं। परतापुर क्षेत्र के बहादुरपुर, शौलाना, इटायरा गांव से ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे निकाला जा रहा है। इससे दिल्ली से आने वाले वाहन सीधे गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़कर प्रयागराज निकल सकेंगे। इसके अलावा अधिकांश गांव हापुड़ रोड के शामिल हैं। यहां से भी मेरठ से बुलंदशहर तक हाईवे का निर्माण किया गया है।
विज्ञापन
ये गांव किए शामिल
बहादुरपुर, शौलाना, इटायरा, सैदपुर हुसनेपुर, चूड़ियाला, नंगला पाटू, खेड़ा बलरामपुर, खानपुर, खंदावली, चंदसारा, धनोटा, यूसुफाबाद, भगवानपुर, बिजौली, खरखौदा, गोविंदपुर, नित्यानंदपुर, कौल, मिल्का मेहदिया, छतरी, खड़खड़ी, बधौली, खासपुर, अतराड़ा, अजरारा, रजपुरा, अटौला, असरा, शाफियाबाद लौटी, मुंडाली, जसौरी, धीरखेड़ा।
यह है गंगा एक्सप्रेसवे
प्रयागराज से मेरठ
कुल लंबाई - 628 किलोमीटर
कुल लागत - 35952 करोड़
कुल लेन - छह
शिलान्यास - वर्ष 2020
निर्माण पूरा करने का लक्ष्य - वर्ष 2024
विज्ञापन
मेरठ से प्रयागराज तक बनाए जाने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए गांवों में जमीन चिह्नांकन शुरू हो गया है। देश का सबसे लंबा (628 किलोमीटर) गंगा एक्सप्रेस-वे मेरठ के 34 गांवों से होकर गुजरेगा। इसकी शुरुआत एनएच-58 स्थित दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से होगी। अंतिम छोर प्रयागराज स्थित गांव खेमांदपुर, सोरांव होगा। उप्र एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने इसको बनाने का जिम्मा लिया है। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने के लिए एलएन मालवीय कंसल्टेंट की नियुक्ति हो चुकी है।
गंगा एक्सप्रेस-वे की डीपीआर बनाने के लिए एक्सप्रेस-वे परियोजना में आने वाले गांव, भूमि और खेतों का ब्योरा तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए सोलाना, बहादरपुर सहित हापुड़ रोड पर बिजौली, गोविंदपुर, कौल में जमीन पर निशान लगने शुरू कर दिए गए हैं। जमीन को चिह्नित करने के बाद प्रस्तावित भूमि किसानों से अधिग्रहित की जाएगी। ये एक्सप्रेस-वे प्रयागराज, ज्योतिबाफूलेनगर, हापुड़, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, फर्रुखाबाद, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होकर मेरठ तक पहुंचेगा।
विज्ञापन
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे से लिंक होगा
जिन गांवों को गंगा एक्सप्रेस वे में शामिल किया गया है, वही गांव दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे में शामिल हैं। परतापुर क्षेत्र के बहादुरपुर, शौलाना, इटायरा गांव से ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे निकाला जा रहा है। इससे दिल्ली से आने वाले वाहन सीधे गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़कर प्रयागराज निकल सकेंगे। इसके अलावा अधिकांश गांव हापुड़ रोड के शामिल हैं। यहां से भी मेरठ से बुलंदशहर तक हाईवे का निर्माण किया गया है।
विज्ञापन
ये गांव किए शामिल
बहादुरपुर, शौलाना, इटायरा, सैदपुर हुसनेपुर, चूड़ियाला, नंगला पाटू, खेड़ा बलरामपुर, खानपुर, खंदावली, चंदसारा, धनोटा, यूसुफाबाद, भगवानपुर, बिजौली, खरखौदा, गोविंदपुर, नित्यानंदपुर, कौल, मिल्का मेहदिया, छतरी, खड़खड़ी, बधौली, खासपुर, अतराड़ा, अजरारा, रजपुरा, अटौला, असरा, शाफियाबाद लौटी, मुंडाली, जसौरी, धीरखेड़ा।
यह है गंगा एक्सप्रेसवे
प्रयागराज से मेरठ
कुल लंबाई - 628 किलोमीटर
कुल लागत - 35952 करोड़
कुल लेन - छह
शिलान्यास - वर्ष 2020
निर्माण पूरा करने का लक्ष्य - वर्ष 2024