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मीटर रीडिंग शून्य करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, बिजली विभाग को लगा चुके करोड़ों रुपये का चूना, दो गिरफ्तार
Thu, 03 Sep 2020 01:11 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:11 AM IST
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electricity meter
- फोटो : अमर उजाला
एसओजी और नौचंदी पुलिस ने मेरठ में बिजली मीटर की रीडिंग शून्य करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस टीम ने गैंग के दो बदमाशों का गिरफ्तार कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए हैं। यह गिरोह बिजली विभाग को अब तक करोड़ों रुपये का चूना लगा चुका है। फिलहाल पुलिस आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश में लगी है। आरोपियों ने बताया कि अब तक वह 500 से भी ज्यादा घरों में लगे मीटर की रीडिंग शून्य कर चुके हैं।
एसओजी प्रभारी तपेश्वर सागर के अनुसार, एक मुखबिर ने सूचना दी की नौचंदी क्षेत्र के जैदी फार्म में बिजली के मीटर को शून्य करने वाला गैंग काम कर रहा है। इस पर उन्होंने नौचंदी थाने के एसएसआई वरुण शर्मा के साथ जैदी फार्म निवासी आरोपी अकील को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर साथी साजिद निवासी श्याम नगर लिसाड़ी गेट को भी दबोच लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होेंने यह काम यूट्यूब से सीखा। इसके लिए माइक्रोवेव ओवन की मदद से उपकरण तैयार किया। इस उपकरण में करीब 250 रुपये कीमत की चिप लगाते थे। एक चिप एक ही बार उपयोग में आती है।
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उपकरण को मीटर के करीब ले जाते ही यह चंद में मीटर की रीडिंग शून्य कर देता है। उसके बाद मीटर हैंग हो जाता और स्क्रीन खराब हो जाती है। आरोपियों ने बताया कि वह फैक्ट्रियों में भी यह काम करते थे। बिजली बिल के अनुसार ही पैसों की डील करते थे।
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एसओजी प्रभारी तपेश्वर सागर के अनुसार, एक मुखबिर ने सूचना दी की नौचंदी क्षेत्र के जैदी फार्म में बिजली के मीटर को शून्य करने वाला गैंग काम कर रहा है। इस पर उन्होंने नौचंदी थाने के एसएसआई वरुण शर्मा के साथ जैदी फार्म निवासी आरोपी अकील को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर साथी साजिद निवासी श्याम नगर लिसाड़ी गेट को भी दबोच लिया।
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पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होेंने यह काम यूट्यूब से सीखा। इसके लिए माइक्रोवेव ओवन की मदद से उपकरण तैयार किया। इस उपकरण में करीब 250 रुपये कीमत की चिप लगाते थे। एक चिप एक ही बार उपयोग में आती है।
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उपकरण को मीटर के करीब ले जाते ही यह चंद में मीटर की रीडिंग शून्य कर देता है। उसके बाद मीटर हैंग हो जाता और स्क्रीन खराब हो जाती है। आरोपियों ने बताया कि वह फैक्ट्रियों में भी यह काम करते थे। बिजली बिल के अनुसार ही पैसों की डील करते थे।
पुलिस ने आरोपियों से डेमो कराया
दोनों शातिरों ने नौचंदी थाने के पीछे एक उपभोक्ता के यहां अपनी जुगाड़ मशीन का डेमो दिखाया। मौके पर मीटर लैब में तैनात जेई आशुतोष शर्मा और गौतम राठी मौजूद थे। इंवर्टर के खाली खोल में फिट किए गए माइक्रोवेव ओवन से निकाली गई मशीन को जैसे ही आरोपी ने मीटर के ऊपर लगाया तो पांच सेकेंड में ही मीटर की डिस्पले खराब हो गई।
उस समय मीटर में 565 रीडिंग थी। मीटर के नो डिस्पले होने के बाद विभाग ने इसे बदल दिया। जेई आशुतोष शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया माइक्रोवेव की हीट से मीटर की डिस्पेल खराब हो जाती है। हो सकता है कि मीटर का प्रोसेसर भी उड़ जाता हो। लैब में इसकी सघनता से जांच की जाएगी।
माइक्रोवेव से बंद हो रहे इलेक्ट्रानिक मीटर
बिजली विभाग अपने मीटरों को कितना भी सुरक्षित करार दे, लेकिन उसमें सेंधमारी लगातार जारी है। पहले सेमी इलेक्ट्रानिक मीटर मैग्नेट के जरिये बंद कर दिए जाते थे। इनकी काट के लिए लाए गए इलेक्ट्रानिक मीटरों को भी बंद करने का जुगाड़ तलाश लिया गया।
इस जुगाड़ से मात्र पांच सेकेंड में मीटर की डिस्पले खराब हो जाती है। इसके बाद उपभोक्ता मीटर खराब बताकर इसे बदलवा लेते हैं। इस खराब मीटर की आधुनिक लैब में भी जांच नहीं की जाती है और इसमें स्टोर रीडिंग का लाभ उपभोक्ता का मिल जाता है। लेकिन विभाग को राजस्व का नुकसान हो जाता है।
दोनों शातिरों ने नौचंदी थाने के पीछे एक उपभोक्ता के यहां अपनी जुगाड़ मशीन का डेमो दिखाया। मौके पर मीटर लैब में तैनात जेई आशुतोष शर्मा और गौतम राठी मौजूद थे। इंवर्टर के खाली खोल में फिट किए गए माइक्रोवेव ओवन से निकाली गई मशीन को जैसे ही आरोपी ने मीटर के ऊपर लगाया तो पांच सेकेंड में ही मीटर की डिस्पले खराब हो गई।
उस समय मीटर में 565 रीडिंग थी। मीटर के नो डिस्पले होने के बाद विभाग ने इसे बदल दिया। जेई आशुतोष शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया माइक्रोवेव की हीट से मीटर की डिस्पेल खराब हो जाती है। हो सकता है कि मीटर का प्रोसेसर भी उड़ जाता हो। लैब में इसकी सघनता से जांच की जाएगी।
माइक्रोवेव से बंद हो रहे इलेक्ट्रानिक मीटर
बिजली विभाग अपने मीटरों को कितना भी सुरक्षित करार दे, लेकिन उसमें सेंधमारी लगातार जारी है। पहले सेमी इलेक्ट्रानिक मीटर मैग्नेट के जरिये बंद कर दिए जाते थे। इनकी काट के लिए लाए गए इलेक्ट्रानिक मीटरों को भी बंद करने का जुगाड़ तलाश लिया गया।
इस जुगाड़ से मात्र पांच सेकेंड में मीटर की डिस्पले खराब हो जाती है। इसके बाद उपभोक्ता मीटर खराब बताकर इसे बदलवा लेते हैं। इस खराब मीटर की आधुनिक लैब में भी जांच नहीं की जाती है और इसमें स्टोर रीडिंग का लाभ उपभोक्ता का मिल जाता है। लेकिन विभाग को राजस्व का नुकसान हो जाता है।
रीमोट सेसिंग डिवाइस से बंद करते थे मीटर
इससे पहले भी मीटर बंद कराने के मामले सामने आते रहे हैं। लोग मीटर शंट करा लेते थे, जिससे रीडिंग धीमी हो जाती थी। लेकिन जांच में मीटर की सील आदि टूटी होने और लैब में परख होने पर मामला खुल जाता था। इसके बाद रीमोट सेसिंग डिवाइस से मीटर की रीडिंग पीछे कराई जाने लगी।
चार साल पहले इस काम करने वाला गैंग पकड़ा गया था। साल 2018 में भी मेरठ पुलिस ने रीडिंग कम करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस समय मीटर में एक चिप लगाते थे। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी पुराने वाले गिरोह से संबंध रखते हैं।
नो डिस्पले के बाद भी पकड़ी जाती है मीटर रीडिंग
अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह ने बताया कि मीटर की डिस्प्ले खराब होने के बाद लैब में मीटर के अंदर स्टोर रीडिंग पकड़ में आ जाती है। कुछ उपभोक्ता लालच में ऐसा काम कराते हैं। नो डिस्पले या मीटर फुंकने के बाद भी लैब में लगी अत्याधुनिक मीटर जांच मशीनों से मीटर की पूरी कुंडली निकाल ली जाती है।
इससे पहले भी मीटर बंद कराने के मामले सामने आते रहे हैं। लोग मीटर शंट करा लेते थे, जिससे रीडिंग धीमी हो जाती थी। लेकिन जांच में मीटर की सील आदि टूटी होने और लैब में परख होने पर मामला खुल जाता था। इसके बाद रीमोट सेसिंग डिवाइस से मीटर की रीडिंग पीछे कराई जाने लगी।
चार साल पहले इस काम करने वाला गैंग पकड़ा गया था। साल 2018 में भी मेरठ पुलिस ने रीडिंग कम करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस समय मीटर में एक चिप लगाते थे। पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी पुराने वाले गिरोह से संबंध रखते हैं।
नो डिस्पले के बाद भी पकड़ी जाती है मीटर रीडिंग
अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह ने बताया कि मीटर की डिस्प्ले खराब होने के बाद लैब में मीटर के अंदर स्टोर रीडिंग पकड़ में आ जाती है। कुछ उपभोक्ता लालच में ऐसा काम कराते हैं। नो डिस्पले या मीटर फुंकने के बाद भी लैब में लगी अत्याधुनिक मीटर जांच मशीनों से मीटर की पूरी कुंडली निकाल ली जाती है।