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ऋषि दुर्वासा ने स्थापित किया था शिवलिंग, दर्शन करने से ही पूरी हो जाती है मनोकामना
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Wed, 22 Feb 2017 03:16 PM IST
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फिरोजपुर महादेव मंदिर
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हस्तिनापुर और आसपास की धरती अपने ऐतिहासिक खजाना छिपाए हुए हैं। इसी खजाने में से दुर्वासा ऋषि द्वारा स्थापित फिरोजपुर महादेव मंदिर है। यह आज भी बिना छत के है। लाखों लोगों की आस्था के केंद्र इस मंदिर की मान्यता है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटा है। सभी की मन्नते भगवान शिव पूरी करते हैं। हर शिवरात्रि पर यहां मेला लगता है।
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कौरव-पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर से 12 किलोमीटर दूर स्थित फिरोजपुर महादेव मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसे दुर्वासा ऋषि ने स्थापित किया था। वे यहां तपस्या करते थे। महाभारत युद्ध के दौरान कुंती और गांधारी यहां अपने पुत्रों की विजयश्री का आशीर्वाद लेने आई थी। महादेव मंदिर पर जिसने सच्चे मन से पूजा-अर्चना की है उसे निराशा नहीं मिली। इस मंदिर में वर्ष में दो बार विशाल कांवड़ मेला लगता है। देश के कोने-कोने से आकर हजारों शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। किवदंती है कि मुगलों का शासन स्थापित होने पर फिरोजपुर महादेव मंदिर का शिवलिंग झाड़ियों में विलुप्त हो गया था। फिरोजपुर गांव का सैयद हैदर अली जमींदार था। गांव के ग्वाले गाय चराने इस मंदिर के पास जाते थे। गायों के झुंड से निकलकर एक बछिया झाड़ियों के बीच चली जाती थी। जब कई दिन ऐसा हुआ, तो ग्वालों ने बछिया का पीछा किया। वे देखकर दंग रह गए कि बछिया के थन से शिवलिंग पर दूध की धार पड़ रही है। इसकी चर्चा जमींदार हैदर अली तक पहुंची। उसने कुछ मजदूरों को शिवलिंग की खुदाई के लिए भेजा। बताया जाता है कि जितनी खुदाई की जाती शिवलिंग उतना ही नीचे धंसता चला जाता था। रात में मजदूर वापस चले गए तथा उन्होंने जमींदार को अवगत कराया। अगले दिन हैदर स्वयं वहां पहुंचा और मजदूरों से पत्थर तोड़ने का आदेश दिया। मजदूरों ने उसे हथौडे़ से तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके। हैदर अली इसे आरे से काटने का आदेश दिया परंतु सफलता नहीं मिली। जमींदार प्रथा समाप्त होने के बाद हैदर अली गांव से चला गया।
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पुजारी ने बताया कि कुछ माह बाद गांव के एक व्यक्ति को सपना दिखाई दिया। उसने स्वप्न के अनुसार सुबह उठकर गंगा स्नान करके शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। उस समय गंगा रामराज के निकट से बहती थी। उसी समय से फिरोजपुर महादेव मंदिर पर जलाभिषेक किया जा रहा है। यहां सावन और फाल्गुन माह में विशाल कांवड़ मेला लगता है। यह भी किवदंती है कि मंदिर में आज तक छत नहीं पड़ पाई है। पुजारी धर्मपाल ने बताया कि छत डालने का कई बार प्रयास किया जा चुका है, लेकिन कुछ अड़चन आ जाती है। इसके पीछे हो सकता है कुछ अच्छाई हो जो जनसाधारण की समझ से परे हैं।
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मेले की तैयारी जोरों पर
सिद्धपीठ फिरोजपुर महादेव मंदिर पर लगने वाले तीन दिवसीय कांवड़ मेले की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। मेले में लगनी वाली दुकानें सजने लगी हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कांवड़ मेले में बच्चों के लिए झूला और खिलौने की दुकानें सजनी लगी हैं। कांवड़ मेले में हरिद्वार गोमुख से जल लेकर आने वाले शिव भक्तों के लिए खाने-पीने और ठहरने की समुचित व्यवस्था मंदिर समिति की ओर से की जाएगी। इंस्पेक्टर संजय शर्मा का कहना है कि लगने वाले मेले की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।