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मत्स्य पालन बेहतर रोजगार का अवसर : सुनील
Wed, 10 Jun 2026 07:58 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 10 Jun 2026 07:58 PM IST
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मोदीपुरम - भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान में आयोजित बैठक में शामिल।
एक्वेरियम एवं सजावटी मत्स्य पालन से स्वरोजगार के गुर सीखे
संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम में एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन (एबीआई) इकाई के तत्वावधान में दो दिवसीय एक्वेरियम एवं सजावटी मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सजावटी मछली पालन, एक्वेरियम प्रबंधन तथा इससे जुड़े स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों की तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि सजावटी मत्स्य पालन से जुड़कर किसानों और युवाओं के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी स्रोत बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से इस क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। एबीआई के प्रधान अन्वेषक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने आईएफएस मॉडल में मत्स्य पालन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को वर्ष भर नियमित आय प्राप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने मत्स्य पालन आधारित उद्यमों की आर्थिक उपयोगिता और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पीयूष पुनिया ने सजावटी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके पालन-पोषण, प्रबंधन और विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम में एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन (एबीआई) इकाई के तत्वावधान में दो दिवसीय एक्वेरियम एवं सजावटी मत्स्य पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सजावटी मछली पालन, एक्वेरियम प्रबंधन तथा इससे जुड़े स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों की तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
संस्थान के निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि सजावटी मत्स्य पालन से जुड़कर किसानों और युवाओं के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी स्रोत बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से इस क्षेत्र में उपलब्ध रोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। एबीआई के प्रधान अन्वेषक डॉ. राजेंद्र प्रसाद मिश्रा ने आईएफएस मॉडल में मत्स्य पालन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को वर्ष भर नियमित आय प्राप्त करने में मदद मिलती है। उन्होंने मत्स्य पालन आधारित उद्यमों की आर्थिक उपयोगिता और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पीयूष पुनिया ने सजावटी मछलियों की विभिन्न प्रजातियों, उनके पालन-पोषण, प्रबंधन और विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
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