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Meerut News: राजकोषीय अनुशासन और इंफ्रास्ट्रक्चर से मिलेगी विकास को रफ्तार

Mon, 02 Feb 2026 02:57 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 02:57 AM IST
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Fiscal discipline and infrastructure will accelerate growth.
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर दिनेश कुमार ने केंद्रीय बजट 2026-27 को सुधारों पर आधारित और आर्थिक निरंतरता का दस्तावेज बताया है। प्रोफेसर दिनेश कुमार के अनुसार यह बजट वैश्विक चुनौतियों जैसे भू राजनीतिक तनाव, वित्तीय अस्थिरता और व्यापार विभाजन के बीच आर्थिक नीति में निरंतरता बनाए रखते हुए प्राथमिकताओं में सकारात्मक बदलाव लाता है।
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प्रोफेसर दिनेश कुमार का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश 53.5 लाख करोड़ रुपये के इस मेगा बजट में राजकोषीय घाटे को पिछले वर्ष के 4.4% से घटाकर 4.3% पर लाया गया है। प्रोफेसर दिनेश के अनुसार, केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ और कुल गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। देश की जीडीपी वृद्धि 7.4% रही है जबकि मुद्रास्फीति नियंत्रित होकर 2% के करीब पहुंच गई है। ऋण-जीडीपी अनुपात भी घटकर 55.6% रह गया है।
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सरकार ने सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को 9% बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यह निवेश रक्षा, सड़क, रेलवे, बंदरगाह और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को गति प्रदान करेगा। 2018 के मुकाबले यह व्यय चार गुना बढ़ चुका है, जिससे निजी निवेश के लिए अनुकूल माहौल बना है। एमएसएमई में 10,000 करोड़ का विकास कोष और आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं शिक्षा हेतु 1.39 लाख करोड़ और स्वास्थ्य मंत्रालय हेतु 99,858 करोड़ (9.78% वृद्धि) रुपये आवंटित हैं। कैंसर दवाओं पर राहत, मानसिक स्वास्थ्य हेतु एनआईएमएचएएनएस 2.0 और बालिकाओं के लिए हर जिले में छात्रावास की घोषणा की गई है।
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अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित होगी। ऊर्जा, आईटी और उद्योग पर फोकस बढ़ाया गया है। हालांकि पूर्वोत्तर और विदेश मंत्रालय जैसे क्षेत्रों में आवंटन कम होने पर भविष्य में ध्यान देने की जरूरत है। प्रोफेसर दिनेश कुमार के अनुसार यह बजट लोक-लुभावन न होकर दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित है जो वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करेगा।
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