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Meerut News: पैरा नेशनल में फातिमा ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीते
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। भुवनेश्वर में चल रहे 24वें पैरा नेशनल एथलेटिक्स गेम्स में मेरठ के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे है। मेरठ की फातिमा खातून ने भी प्रतियोगिता में दो पदक जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण तो भाला फेंक में कांस्य पदक जीता। अब उनकी नजर पैरा एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक लाने पर है।
फातिमा ने डिस्कस थ्रो में प्रतिभाग करते हुए 18.45 मीटर थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा भाला फेंक में 16.33 मीटर दूरी तय की और रजत पदक जीता। इस मौके पर उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने उन्हें पदक पहनाकर सम्मानित किया। फातिमा खातून उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में नौकरी करती हैं। वह इससे पहले पैरा एशियन गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अभी हाल ही में दुबई में हुए पैरा ग्रैंड प्रिक्स खेलों में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता। वर्ष 2016 में एक सड़क हादसे में पैर गंवाने के बाद उन्होंने पैरा खेलों में भाग लिया। इसके बाद कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और देश का नाम रोशन किया। फातिमा खातून ने एक हादसे में पैर खो देने के बावजूद हार नहीं मानी और पैरालंपिक तक का सफर तय किया। हादसे के बाद उनके शरीर में 196 टांके लगे थे और शरीर में 11 प्लेट पड़ीं थीं।
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मेरठ। भुवनेश्वर में चल रहे 24वें पैरा नेशनल एथलेटिक्स गेम्स में मेरठ के खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे है। मेरठ की फातिमा खातून ने भी प्रतियोगिता में दो पदक जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो में स्वर्ण तो भाला फेंक में कांस्य पदक जीता। अब उनकी नजर पैरा एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक लाने पर है।
फातिमा ने डिस्कस थ्रो में प्रतिभाग करते हुए 18.45 मीटर थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा भाला फेंक में 16.33 मीटर दूरी तय की और रजत पदक जीता। इस मौके पर उड़ीसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने उन्हें पदक पहनाकर सम्मानित किया। फातिमा खातून उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन में नौकरी करती हैं। वह इससे पहले पैरा एशियन गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अभी हाल ही में दुबई में हुए पैरा ग्रैंड प्रिक्स खेलों में भी उन्होंने कांस्य पदक जीता। वर्ष 2016 में एक सड़क हादसे में पैर गंवाने के बाद उन्होंने पैरा खेलों में भाग लिया। इसके बाद कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और देश का नाम रोशन किया। फातिमा खातून ने एक हादसे में पैर खो देने के बावजूद हार नहीं मानी और पैरालंपिक तक का सफर तय किया। हादसे के बाद उनके शरीर में 196 टांके लगे थे और शरीर में 11 प्लेट पड़ीं थीं।
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