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विज्ञान के फनकार, साहित्य के शिल्पकार
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 02 May 2016 02:30 AM IST
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पिता और पुत्र।
- फोटो : अमर उजाला
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अपने पेशे के अलावा हुनर रखने वाले कम ही मिलते हैं। खासतौर पर वह जिन्होंने पेशे और शौक दोनों में पहचान कायम की हो। जूलॉजी के बड़े साइंटिस्ट और लेखक प्रो. हरि राज सिंह नूर ऐसा ही एक नाम है। देश के बड़े विश्वविद्यालयों में प्रो. हरि राज की किताबें पढ़ाई जाती हैं। साहित्य में रुचि ने उन्हें साहित्यकार बना दिया।
14 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनके बेटे डॉ. नीरज कुमार भी इसी राह पर हैं। तकनीक के दौर में वह बड़े ट्विटर हैंडलर हैं। दुनिया के 120 देशों में उनके फॉलोवर हैं। अमेरिका का प्रकाशन पैट्रिज जल्द ही पिता-पुत्र की लिखी किताब प्रकाशित करने जा रहा है। 16 मई को अमेजॉन पर किताब ऑनलाइन होगी।
कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी निवासी हरि राज 2003 से 2005 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इनके कार्यकाल में ही इलाहाबाद विवि सेंट्रल यूनिवर्सिटी बना। उन्होंने 36 पीएचडी कराईं। विषय की आठ किताबें और सात किताबों की एडिटिंग की। कई किताबें देश के बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। उनकी बचपन से ही साहित्य में रुचि है। प्रो. हरि राज बताया कि जब वे कक्षा नौ में थे, तब पहले कविता लिखी थी।
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वे मूल रूप से मुरादाबाद के सैदपुर गंगू के रहने वाले हैं। साहित्य के क्षेत्र में नाम के आगे नूर मुरादाबादी लगाते हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स से उनकी किताब प्रकाशित हुई हैं। कविता, गीत, शायरी, समीक्षा और लेख लिखे हैं। 2005 में रिटायर होने के बाद लिखने और पढ़ने का रुटीन नहीं बदला। घर में साहित्य की 27 मैगजीन हर महीने आती हैं।
ये लिखीं किताबें
मेरे घोंसले के शिल्प, दूर उस पार, आई हैव नो मिरर, नील गगन की ओर, तारों की अंजुमन, नभ के तारे, जाफरान के फूल, बात ही बात में, इक बात मगर छूट गई शामिल हैं।
बेटा भी साहित्य की राह पर
प्रो. हरि राज के बेटे डॉ. नीरज कुमार मेरठ कॉलेज में जूलॉजी डिपार्टमेंट में शिक्षक हैं। डॉ. नीरज ट्विटर हैंडलर के रूप में एक्टिव हैं। 120 देशों में उनके करीब पांच हजार फॉलोवर हैं। वह प्रकृति, अध्यात्म, शांत रहने और लव एनर्जी पर लिखते हैं। बाप-बेटे ने मिलकर एक किताब इंडियन वाइल्ड लाइफ थ्रू पोयम्स लिखी है। इस किताब को अमेरिका का प्रकाशन पैट्रिज ब्लूमिंगटन प्रकाशित कर रहा है। इसमें जंगली जानवर जैसे, बारहसिंहा, हाथी, मधुमक्खी, चींटी, कोबरा, कोयल, उल्लू, घड़ियाल आदि पर कविताएं लिखी हैं।
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14 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनके बेटे डॉ. नीरज कुमार भी इसी राह पर हैं। तकनीक के दौर में वह बड़े ट्विटर हैंडलर हैं। दुनिया के 120 देशों में उनके फॉलोवर हैं। अमेरिका का प्रकाशन पैट्रिज जल्द ही पिता-पुत्र की लिखी किताब प्रकाशित करने जा रहा है। 16 मई को अमेजॉन पर किताब ऑनलाइन होगी।
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कंकरखेड़ा के श्रद्धापुरी निवासी हरि राज 2003 से 2005 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। इनके कार्यकाल में ही इलाहाबाद विवि सेंट्रल यूनिवर्सिटी बना। उन्होंने 36 पीएचडी कराईं। विषय की आठ किताबें और सात किताबों की एडिटिंग की। कई किताबें देश के बड़े विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। उनकी बचपन से ही साहित्य में रुचि है। प्रो. हरि राज बताया कि जब वे कक्षा नौ में थे, तब पहले कविता लिखी थी।
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वे मूल रूप से मुरादाबाद के सैदपुर गंगू के रहने वाले हैं। साहित्य के क्षेत्र में नाम के आगे नूर मुरादाबादी लगाते हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स से उनकी किताब प्रकाशित हुई हैं। कविता, गीत, शायरी, समीक्षा और लेख लिखे हैं। 2005 में रिटायर होने के बाद लिखने और पढ़ने का रुटीन नहीं बदला। घर में साहित्य की 27 मैगजीन हर महीने आती हैं।
ये लिखीं किताबें
मेरे घोंसले के शिल्प, दूर उस पार, आई हैव नो मिरर, नील गगन की ओर, तारों की अंजुमन, नभ के तारे, जाफरान के फूल, बात ही बात में, इक बात मगर छूट गई शामिल हैं।
बेटा भी साहित्य की राह पर
प्रो. हरि राज के बेटे डॉ. नीरज कुमार मेरठ कॉलेज में जूलॉजी डिपार्टमेंट में शिक्षक हैं। डॉ. नीरज ट्विटर हैंडलर के रूप में एक्टिव हैं। 120 देशों में उनके करीब पांच हजार फॉलोवर हैं। वह प्रकृति, अध्यात्म, शांत रहने और लव एनर्जी पर लिखते हैं। बाप-बेटे ने मिलकर एक किताब इंडियन वाइल्ड लाइफ थ्रू पोयम्स लिखी है। इस किताब को अमेरिका का प्रकाशन पैट्रिज ब्लूमिंगटन प्रकाशित कर रहा है। इसमें जंगली जानवर जैसे, बारहसिंहा, हाथी, मधुमक्खी, चींटी, कोबरा, कोयल, उल्लू, घड़ियाल आदि पर कविताएं लिखी हैं।