{"_id":"65494cf88f2aa6cccb069257","slug":"farmers-should-avoid-burning-crop-residues-in-the-fields-dm-mawana-news-c-228-1-mwn1001-697-2023-11-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से बचें किसान : डीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फसल अवशेषों को खेतों में जलाने से बचें किसान : डीएम
विज्ञापन
हस्तिनापुर। कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में किसानों को जागरूक किया गया। इस दौरान कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि कंपनियों द्वारा स्टाल भी लगाए गए, जिनमें किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारी दी गईं।
कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि विभाग के तत्वावधान में प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन और इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेसिड्यू योजना के अंतर्गत जनपद स्तरीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में धान की पराली और गन्ने की पत्ती तथा कूड़ा अवशेष नहीं जलाने को लेकर किसानों को जागरूक किया गया।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि किसान खेत में गन्ने की पत्ती तथा कूड़े के अवशेष न जलाएं। सेटेलाइट द्वारा खेत में फसल अवशेष जलने की सूचना तुरंत प्राप्त हो जाती है। ऐसा करने पर किसान पर एनजीटी के निर्देशानुसार जुर्माना लगाया जाएगा। इससे बचने के लिए फसल अवशेष को खेत में ही जोत दें, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है और किसान मित्र कीट भी नष्ट होने से बच जाते हैं। इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन के तहत कई यंत्र भी आ गए हैं।
विज्ञापन
ब्लाॅक प्रमुख नितिन पोसवाल ने कहा कि खेत की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए फसल अवशेष को जलाने से बचना होगा। उन्होंने किसानों को मिलने वाले कृषि यंत्रों के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि किसान साइट खुलने का इंतजार करते रहते हैं और जब साइट खुलती है तब तक कृषि यंत्र के टोकन खत्म हो जाते हैं।
जिला कृषि अधिकारी राजीव सिंह ने विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। गोष्ठी में विभिन्न योजनाओं का प्रदर्शन करने वाले स्टॉल भी लगाए गए। जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याओं को भी सुना, जिसमें कई किसानों ने खादर में नष्ट हुई फसलों का मुआवजा, गन्ने का बेसिक कोटा कम होना, बाढ़ के समय किसानों का बिजली बिल माफ होना, सोती नदी में आने वाले जहरीले पानी से फसलें नष्ट होना, अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों के वितरण में धांधली की शिकायत की तथा कहा कि साइट खुलने का समय निर्धारित हो, जिससे किसान लाभांवित हो सकें। डीएम ने सभी समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की बात कही।
इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डा. ओमवीर सिंह, वैज्ञानिक नवीन चंद्रा, राकेश तिवारी आदि रहे।
विज्ञापन
कस्बे के स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र में कृषि विभाग के तत्वावधान में प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन और इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट ऑफ क्रॉप रेसिड्यू योजना के अंतर्गत जनपद स्तरीय किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में धान की पराली और गन्ने की पत्ती तथा कूड़ा अवशेष नहीं जलाने को लेकर किसानों को जागरूक किया गया।
विज्ञापन
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि किसान खेत में गन्ने की पत्ती तथा कूड़े के अवशेष न जलाएं। सेटेलाइट द्वारा खेत में फसल अवशेष जलने की सूचना तुरंत प्राप्त हो जाती है। ऐसा करने पर किसान पर एनजीटी के निर्देशानुसार जुर्माना लगाया जाएगा। इससे बचने के लिए फसल अवशेष को खेत में ही जोत दें, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है और किसान मित्र कीट भी नष्ट होने से बच जाते हैं। इसके लिए फसल अवशेष प्रबंधन के तहत कई यंत्र भी आ गए हैं।
विज्ञापन
ब्लाॅक प्रमुख नितिन पोसवाल ने कहा कि खेत की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए फसल अवशेष को जलाने से बचना होगा। उन्होंने किसानों को मिलने वाले कृषि यंत्रों के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि किसान साइट खुलने का इंतजार करते रहते हैं और जब साइट खुलती है तब तक कृषि यंत्र के टोकन खत्म हो जाते हैं।
जिला कृषि अधिकारी राजीव सिंह ने विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया। गोष्ठी में विभिन्न योजनाओं का प्रदर्शन करने वाले स्टॉल भी लगाए गए। जिलाधिकारी ने किसानों की समस्याओं को भी सुना, जिसमें कई किसानों ने खादर में नष्ट हुई फसलों का मुआवजा, गन्ने का बेसिक कोटा कम होना, बाढ़ के समय किसानों का बिजली बिल माफ होना, सोती नदी में आने वाले जहरीले पानी से फसलें नष्ट होना, अनुदान पर मिलने वाले कृषि यंत्रों के वितरण में धांधली की शिकायत की तथा कहा कि साइट खुलने का समय निर्धारित हो, जिससे किसान लाभांवित हो सकें। डीएम ने सभी समस्याओं के शीघ्र निस्तारण की बात कही।
इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डा. ओमवीर सिंह, वैज्ञानिक नवीन चंद्रा, राकेश तिवारी आदि रहे।