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अघोषित बिजली कटौती के चलते संकट में किसान, मांग और आपूर्ति में भारी अंतर
Mon, 16 Sep 2019 01:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 16 Sep 2019 01:19 AM IST
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power cut
भीषण गर्मी और उमस में बिजली की बेतहाशा कटौती के चलते शहर से लेकर गांवों तक लोग परेशान हैं। मांग और आपूर्ति में आए भारी अंतर के चलते ट्रांसमिशन से लेकर डिस्ट्रिब्यूशन एंड पर लगातार अघोषित कटौती कराई जा रही है।
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स्थिति देहात में ज्यादा प्रभावित है। नलकूपों को दस के बजाय चार से पांच घंटे बिजली आपूर्ति होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित होने लगी है। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो न केवल फसलों का उत्पादन गिरेगा बल्कि उन्हें घाटा भी उठाना पड़ेगा।
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मानसून की बेरुखी और भीषण गर्मी ने बिजली की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी है। बरसात में एसी और कूलर लगातार चल रहे हैं। इससे न केवल सिस्टम पर लोड पड़ रहा है बल्कि कोयला उत्पादक राज्यों में बाढ़ की वजह से विद्युत जनरेशन प्लांट भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। सेंट्रल पूल से मांग के सापेक्ष बिजली नहीं मिलने का खामियाजा उपभोक्ताओं को बिजली कटौती के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
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पीवीवीएनएल में क्षेत्र के 14 जिलों में बिजली की मांग करीब 7000 मेगावाट से ज्यादा है। लेकिन मांग के सापेक्ष कंपनी को करीब 6000 मेगावाट बिजली ही आपूर्ति की जा रही है। पिछले एक साल के अंदर प्रधानमंत्री हर घर बिजली सौभाग्य योजना के तहत करीब 12 लाख उपभोक्ता और बढ़े हैं। इस सबके चलते कंपनी को मांग के सापेक्ष बिजली आपूर्ति करना भारी पड़ रहा है।
यहां बिजली सर्वाधिक प्रभावित
गांव को 18 घंटे बिजली आपूर्ति करने के लिए सरकार ने गांवों और नलकूपों को बिजली आपूर्ति की लाइनों को अलग कर दिया है। गांवों को 16 से 18 और नलकूपों को 10 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। लेकिन बिजली संकट के चलते दोनों जगह इसका पालन नहीं हो पा रहा है। गांव में जहां बिजली आपूर्ति घटकर 12-13 घंटे रह गई है। वहीं, नलकूपों को भी 5-6 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है।
इतनी कम बिजली से किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। जबकि बारिश नहीं होने से फसलों की सिंचाई को पानी की आवश्यकता पड़ रही है। सिंचाई नहीं होने से न केवल धान की फसल प्रभावित हो रही है बल्कि गन्ने की फसल को भी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि पानी की कमी से फसल का उत्पादन गिरेगा और लागत बढ़ने से उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा।
सेंटर कटवा रहा बिजली
राज्य की बिजली कंपनियों की मांग और आपूर्ति पर स्टेट लोड डिस्पेच सेंटर नजर रखता है। सेंटर पूल से बिजली कम मिलने के चलते सेंटर ट्रांसमिशन को कोड भेजकर कटौती करा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से शेड्यूल का पालन का पालन नहीं किया जा रहा है। सर्वाधिक बिजली कटौती देहात में कराई जा रही है।
बिजली की मांग में उछाल
बारिश नहीं होने से बिजली की मांग में भारी उछाल आया है। लेकिन आपूर्ति मांग के सापेक्ष नहीं हो पा रही है। जितनी बिजली ट्रांसमिशन से उपलब्ध कराई जा रही है, उतनी उपभोक्ताओं को दी जा रही है। फाल्ट आदि होने के चलते ही बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है। -आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल