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किसानों को नहीं मिल रहा गेहूं का भुगतान
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किसानों को नहीं मिल रहा गेहूं का भुगतान
मेरठ। सरकार ने किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जनपद में विभिन्न स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र खोले हुए हैं। सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन तुलाई के नाम पर 20 रुपये प्रति क्विंटल लिए जा रहे हैं।
सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए किसान को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता है। जनपद के केवल 675 किसानों ने अभी तक सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए हैं। यानी इतने ही किसानों ने अभी तक सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं बेचा है। किसानों के अनुसार गेहूं क्रय केंद्रों पर उनसे 20 प्रति क्विंटल तुलाई आदि खर्च लिया जा रहा है। पिछले वर्ष यह धनराशि किसानों को भुगतान के साथ वापस लौटा दी गई थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।
शासनादेश के मुताबिक, किसानों से लिए जाने वाले 20 प्रति क्विंटल की धनराशि को अभी लौटाने के लिए कोई स्पष्ट आदेश भी नहीं है। जिससे यह माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के समय जहां किसानों को मौसम व बाजार में किसानों के मूल्य का उचित रेट न मिलने के कारण मार पड़ रही है, वहीं सरकार ने भी गेहूं खरीद में उन्हें राहत नहीं दी है। इस संबंध में स्थानीय आरएफसी विभाग के अधिकारी कुछ जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। विभाग से जानकारी मिली है कि जिन किसानों के खाते में 72 घंटे के बाद भी उनके गेहूं का भुगतान नहीं पहुंच रहा है, वह कहीं न कहीं गेहूं बिक्री के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय गलती का कारण है। हो सकता है कि किसान ने बैंक की खाता संख्या या अपने नाम के अक्षर में कुछ गलती कर दी हो। यह गलती सुधारने के बाद ही किसानों के खाते में पैसा पहुंच पाएगा।
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मेरठ। सरकार ने किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जनपद में विभिन्न स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र खोले हुए हैं। सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन तुलाई के नाम पर 20 रुपये प्रति क्विंटल लिए जा रहे हैं।
सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए किसान को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता है। जनपद के केवल 675 किसानों ने अभी तक सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेचने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए हैं। यानी इतने ही किसानों ने अभी तक सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं बेचा है। किसानों के अनुसार गेहूं क्रय केंद्रों पर उनसे 20 प्रति क्विंटल तुलाई आदि खर्च लिया जा रहा है। पिछले वर्ष यह धनराशि किसानों को भुगतान के साथ वापस लौटा दी गई थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है।
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शासनादेश के मुताबिक, किसानों से लिए जाने वाले 20 प्रति क्विंटल की धनराशि को अभी लौटाने के लिए कोई स्पष्ट आदेश भी नहीं है। जिससे यह माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के समय जहां किसानों को मौसम व बाजार में किसानों के मूल्य का उचित रेट न मिलने के कारण मार पड़ रही है, वहीं सरकार ने भी गेहूं खरीद में उन्हें राहत नहीं दी है। इस संबंध में स्थानीय आरएफसी विभाग के अधिकारी कुछ जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। विभाग से जानकारी मिली है कि जिन किसानों के खाते में 72 घंटे के बाद भी उनके गेहूं का भुगतान नहीं पहुंच रहा है, वह कहीं न कहीं गेहूं बिक्री के लिए ऑनलाइन आवेदन करते समय गलती का कारण है। हो सकता है कि किसान ने बैंक की खाता संख्या या अपने नाम के अक्षर में कुछ गलती कर दी हो। यह गलती सुधारने के बाद ही किसानों के खाते में पैसा पहुंच पाएगा।
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