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Meerut News: किसानों को नहीं मिल रही है डीएपी, अधिकारी बोले खाद की कमी नहीं
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- किसान कर रहे हैं संपर्क और अधिकारी सुनने को तैयार नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आलू की बुवाई के लिए किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रही है। इसे लेकर किसानों का आक्रोश फूटने लगा है। उधर, सहकारिता विभाग के अधिकारी जिलेभर में खाद की कमी न होने की बात कर रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि किसान जरूरत से अधिक खाद लेने का दबाव बनाते हैं, जिस कारण कुछ समितियों पर समस्या खड़ी हो रही है। सोमवार के बाद यह समस्या भी खत्म करने का प्रयास है।
आलू की बुवाई चल रही है। इसके बाद गेहूं की बुवाई भी शुरू होने वाली है। फसलों की बुवाई के दौरान डीएपी, एनपीके की अधिक खपत होती है। इस कारण प्रतिवर्ष इस दौरान खाद की कमी होती है। इसके बावजूद प्रशासन समय रहते डीएपी और एनपीके खाद की व्यवस्था नहीं करता है। जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। जिलेभर में 84 सहकारी समितियां हैं। किसानों का आरोप है कि इनमें से अधिकतर समितियों पर डीएपी की कमी है। समितियों पर कम संख्या में खाद के बोरे आपूर्ति किए जाने के कारण किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पाता है। इस कारण फसलों की बुवाई में दिक्कत आती है। एक सप्ताह से जिलेभर में डीएपी की किल्लत है। एक दिन पहले ही खरखौदा क्षेत्र की कैली सहकारी समिति पर किसानों ने खाद वितरण को लेकर हंगामा किया। हालांकि सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कैली समिति पर पर्याप्त एनपीके भेजी जा चुकी है। सोमवार के बाद डीएपी भी भेजी जाएगी। जिलेभर में भले ही खाद न मिलने से किसान परेशान हों, लेकिन अपर जिला सहकारी अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि जिलेभर में उर्वरक की कोई कमी नहीं हैं। किसान आलू की बुवाई में इस्तेमाल होने वाले खाद के अलावा गेहूं की बुवाई के लिए भी अभी खाद लेना चाहते हैं। इस कारण कुछ समितियों पर दिक्कत आ रही है। रविवार या सोमवार को डीएपी खाद की आपूर्ति होने वाली है। सभी समितियों पर खाद भेजी जाएगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आलू की बुवाई के लिए किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रही है। इसे लेकर किसानों का आक्रोश फूटने लगा है। उधर, सहकारिता विभाग के अधिकारी जिलेभर में खाद की कमी न होने की बात कर रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि किसान जरूरत से अधिक खाद लेने का दबाव बनाते हैं, जिस कारण कुछ समितियों पर समस्या खड़ी हो रही है। सोमवार के बाद यह समस्या भी खत्म करने का प्रयास है।
आलू की बुवाई चल रही है। इसके बाद गेहूं की बुवाई भी शुरू होने वाली है। फसलों की बुवाई के दौरान डीएपी, एनपीके की अधिक खपत होती है। इस कारण प्रतिवर्ष इस दौरान खाद की कमी होती है। इसके बावजूद प्रशासन समय रहते डीएपी और एनपीके खाद की व्यवस्था नहीं करता है। जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। जिलेभर में 84 सहकारी समितियां हैं। किसानों का आरोप है कि इनमें से अधिकतर समितियों पर डीएपी की कमी है। समितियों पर कम संख्या में खाद के बोरे आपूर्ति किए जाने के कारण किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पाता है। इस कारण फसलों की बुवाई में दिक्कत आती है। एक सप्ताह से जिलेभर में डीएपी की किल्लत है। एक दिन पहले ही खरखौदा क्षेत्र की कैली सहकारी समिति पर किसानों ने खाद वितरण को लेकर हंगामा किया। हालांकि सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कैली समिति पर पर्याप्त एनपीके भेजी जा चुकी है। सोमवार के बाद डीएपी भी भेजी जाएगी। जिलेभर में भले ही खाद न मिलने से किसान परेशान हों, लेकिन अपर जिला सहकारी अधिकारी मनोज कुमार का कहना है कि जिलेभर में उर्वरक की कोई कमी नहीं हैं। किसान आलू की बुवाई में इस्तेमाल होने वाले खाद के अलावा गेहूं की बुवाई के लिए भी अभी खाद लेना चाहते हैं। इस कारण कुछ समितियों पर दिक्कत आ रही है। रविवार या सोमवार को डीएपी खाद की आपूर्ति होने वाली है। सभी समितियों पर खाद भेजी जाएगी।
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