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Meerut News: असली के सीरियल नंबर घिसकर तैयार किए गए फर्जी स्टांप

Tue, 25 Mar 2025 01:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 01:42 AM IST
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Fake stamps were prepared by rubbing off the serial numbers of the originals
- पांच साल के फर्जी और असली स्टांप का मिलान से आरोपी होंगे चिन्हित
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- प्राक्कलन समिति की बैठक में डीआईजी, एआईजी सहित रजिस्ट्रार रहे मौजूद

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। असली स्टांप के सीरियल नंबर घिसकर फर्जी स्टांप बनाए गए हैं, जिसका खुलासा लखनऊ में प्राक्कलन समिति ने किया है। यह घपला कोषागार और रजिस्ट्री विभाग के अधिकारी या फिर कर्मचारियों की मिलीभगत से होने का अंदेशा है। पांच साल के फर्जी और असली स्टांप का मिलान करने से ही असली गुनहगार सामने आएगा। रजिस्ट्री विभाग 15 अप्रैल तक यह जांच पूरी करके रिपोर्ट देगा, जिसके आधार पर पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। प्राक्कलन समिति की बैठक में मेरठ से डीआईजी स्टांप, एआईजी, छह रजिस्ट्रार सहित प्रदेश के समस्त अधिकारी मौजूद रहे।
स्टांप घोटाले का मामला शासन तक पहुंचा है। पंजीयन एवं स्टांप मंत्री रवींद्र जायसवाल के निर्देश पर तीन साल से बढ़ाकर पांच साल के स्टांप की जांच कराई जा रही है। मेरठ में तीन साल की जांच में 997 फर्जी स्टांप मिले हैं। इसमें करीब 10 करोड़ के राजस्व की हानि होना बताया है। मेरठ पुलिस ने इस प्रकरण में मुख्य आरोपी विशाल वर्मा सहित पांच आरोपी जेल भेजे हैं। प्राक्कलन समिति अध्यक्ष मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल की अध्यक्षता में सोमवार को इस प्रकरण में लखनऊ में बैठक हुई है। इसमें समिति ने पांच साल की जांच रिपोर्ट मांगी। कहा है कि जो स्टांप फर्जी है, यानि सीरियल नंबर, हस्ताक्षर और मुहर लगाकर जारी हुए है, उसका असली स्टांप कब इस्तेमाल हुआ और वह स्टांप कहां है। फर्जी और असली स्टांप का मिलान कराया जाए, तभी असली गुनहगार सामने आएगा। सरकार की राजस्व हानि हुई है, जिसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही पुलिस की कार्रवाई भी बढ़ेगी। इस प्रकरण से संबंधित सभी आरोपियों पर कार्रवाई होना तय है।
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14 जनपद की जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
मेरठ मंडल से 14 जनपदों में स्टांप भेजा गया है। गाजियाबाद, नोएडा सहित 14 जनपदों से तीन साल की जांच और फर्जी स्टांप से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। इसमें से तीन जिलों से अभी रिपोर्ट नहीं आई है। प्राक्कलन समिति ने मंडल स्तर से पत्राचार कर रिपोर्ट मांगने की बात कही है। वहीं, फर्जी स्टांप पर लगी मुहर और हस्ताक्षर की जांच रिपोर्ट फॉरेंसिक लैब से नहीं आई। समिति ने फॉरेंसिक रिपोर्ट भी मंगवाने की बात कही है।
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कार्यालय बनाएं, राजस्व देने वालों को सहूलियत दें
प्राक्कलन समिति में प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालय को बड़ा बनाने और राजस्व देने वाले यानी पब्लिक के लिए सहूलियत देने की बात कही है। मेरठ रजिस्ट्री विभाग में बैनामा कराने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन कार्यालय में स्टांप और पब्लिक के लिए व्यवस्था नहीं है। प्राक्कलन समिति ने कहा कि रजिस्ट्री कार्यालय सरकारी जमीन पर होनी चाहिए। जमीन तलाश करें, शासन से बिल्डिंग के लिए पैसे की डिमांड कर लेंगे। कचहरी में रजिस्ट्री कार्यालय की हालत खस्ता है। एआईजी स्टांप का कार्यालय कचहरी में रजिस्ट्री कार्यालय से दूर कर दिया है।


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प्राक्कलन समिति की बैठक में मेरठ के अधिकारी भी मौजूद थे। स्टांप घोटाले की जांच पूरी हो, इसको लेकर पांच साल के दस्तावेजों की जांच चल रही है। अप्रैल महीने में सिर्फ ई-स्टांप ही चलेंगे। भौतिक स्टांप प्रतिबंधित कर दिए है। फर्जी स्टांप का पता लगाने के लिए असली स्टांप की जांच हो रही है।
अमित अग्रवाल, कैंट विधायक एवं प्राक्कलन समिति अध्यक्ष।
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