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Meerut News: ठंड पर आस्था भारी, गंगा स्नान के लिए उमड़ा सैलाब
Sun, 18 Jan 2026 08:35 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 18 Jan 2026 08:35 PM IST
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भीमकुंड गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत ग्रामीण स्रोत संवाद
मौनी अमावस्या पर मखदूमपुर और भीमकुंड गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर मांगी मनोकामना
पूजा अर्चना कर सुख शांति, समृद्धि की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। रविवार को मौनी अमावस्या पर क्षेत्र के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी पड़ी। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी स्नान के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मखदूमपुर और भीमकुंड गंगा घाटों पर विधि-विधान से गंगा स्नान कर परिवार की सुख शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की।
तड़के से ही घाटों पर श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के जयकारों के बीच मां गंगा में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मौन का पालन करते हुए नजर आए, जो मौनी अमावस्या की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान किया। गंगा घाटों के आसपास साधु-संतों और जरूरतमंदों को दान देते हुए लोग दिखाई दिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है।
तारापुर की सागर कूटी के महंत सागर गिरी महाराज ने बताया कि मौनी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन तिल दान को विशेष रूप से उत्तम माना गया है। साथ ही अन्न, वस्त्र, गो, भूमि अथवा स्वर्ण दान करने की भी परंपरा है।
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मौन व्रत से होती है मन की शुद्धि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का विधान है। मौन व्रत का पालन करने से मन की शुद्धि होती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। कई लोगों ने गंगा तट पर पूजा कर मौत व्रत रखा। मौनी अमावस्या के अवसर पर गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ से हस्तिनापुर एक बार फिर धर्म और आस्था के रंग रंगा नजर आया।
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पूजा अर्चना कर सुख शांति, समृद्धि की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। रविवार को मौनी अमावस्या पर क्षेत्र के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड पर आस्था भारी पड़ी। बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी स्नान के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मखदूमपुर और भीमकुंड गंगा घाटों पर विधि-विधान से गंगा स्नान कर परिवार की सुख शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की।
तड़के से ही घाटों पर श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के जयकारों के बीच मां गंगा में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मौन का पालन करते हुए नजर आए, जो मौनी अमावस्या की परंपरा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान किया। गंगा घाटों के आसपास साधु-संतों और जरूरतमंदों को दान देते हुए लोग दिखाई दिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन किया गया दान कई गुना फलदायी माना जाता है।
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तारापुर की सागर कूटी के महंत सागर गिरी महाराज ने बताया कि मौनी अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने बताया कि इस दिन तिल दान को विशेष रूप से उत्तम माना गया है। साथ ही अन्न, वस्त्र, गो, भूमि अथवा स्वर्ण दान करने की भी परंपरा है।
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मौन व्रत से होती है मन की शुद्धि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि को भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का विधान है। मौन व्रत का पालन करने से मन की शुद्धि होती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। कई लोगों ने गंगा तट पर पूजा कर मौत व्रत रखा। मौनी अमावस्या के अवसर पर गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ से हस्तिनापुर एक बार फिर धर्म और आस्था के रंग रंगा नजर आया।

भीमकुंड गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत ग्रामीण स्रोत संवाद

भीमकुंड गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत ग्रामीण स्रोत संवाद