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Meerut News: उज्बेकिस्तान के विशेषज्ञों ने साझा किए कृषि-शोध के नए आयाम

Thu, 12 Mar 2026 02:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:10 AM IST
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Experts from Uzbekistan share new dimensions of agricultural research
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कृषि तकनीक तथा शोध उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। यह सम्मेलन अटल सभागार में हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया।
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कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला की मौजूदगी में सम्मेलन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रो. वीरपाल सिंह, डॉ. दिलराबो एर्नाजारोवा, प्रो. दिनेश कुमार सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित थे। संस्थान के निदेशक डॉ. नीरज सिंघल ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, तकनीकी तथा शोध उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सीसीएस विश्वविद्यालय ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। खासकर उन्नत भारत अभियान को छात्रों के लिए अनुभव आधारित शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। डॉ. आशुतोष मिश्रा का कहना था कि इस अभियान के जरिए छात्र ग्रामीण समुदायों से सीधे जुड़कर नवाचार करते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। प्रो. आरके सोनी ने ग्रामीण विकास को भारत की प्रगति के लिए अनिवार्य बताते हुए गांवों की चुनौतियों और संभावनाओं पर बल दिया। प्रो. वीरपाल सिंह ने विश्वविद्यालय की एनआईआरएफ रैंकिंग में शीर्ष 50 में शामिल होने और निरंतर प्रगति का उल्लेख किया। सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उज्बेकिस्तान से विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. दिलफुजा जब्बोरोवा ने बायोचार को कृषि में क्रांतिकारी तकनीक करार दिया, जो फसल वृद्धि करता है और लवणीय तनाव जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पौधों को मजबूती प्रदान करता है। डॉ. इल्हाम कुर्बानोव ने सोयाबीन की जैव-रासायनिक विविधता पर अपने शोध निष्कर्ष साझा किए। अन्य विशेषज्ञों ने बैक्टीरियल स्ट्रेन्स, अरबस्कुलर माइकोराइजा और सूखे की स्थिति में फसल उत्पादन बढ़ाने के परिणाम प्रस्तुत किए।
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