फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Exclusive: Crow species in danger due to pesticides and poisonous water, shocking revelation in research

Exclusive: रासायनिक खाद् और जहरीले पानी से कौवे की प्रजाति संकट में, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 11 Oct 2023 11:04 AM IST
Dimple Sirohi मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ
मुकेश पंवार, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 11 Oct 2023 11:04 AM IST
सार

घरों की मुंडेर पर अतिथि के आगमन की सूचना देने वाले और पितरों तक श्राद्ध को पहुंचाने वाले कौए अब दिखाई ही नहीं देते। रासायनिकों खादों के प्रयोग और प्रदूषण के कारण कौवे की प्रजाति खतरे में है।

विज्ञापन
Exclusive: Crow species in danger due to pesticides and poisonous water, shocking revelation in research
कौवा-प्रतीकात्मक - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कौवों की प्रजाति खेतों में अत्यधिक रासायनिक खादों के इस्तेमाल व प्रदूषण के कारण तेजी से घट रही है। खेतों का पानी रासायनिक खादों के इस्तेमाल से जहरीला हो गया है, जिसे पीने से कौवे की प्रजनन क्षमता कम हो रही है। आपको जानकार हैरानी होगी कि कैल्यिशम कार्बोनेट से बनी कौवे के अंडे की कठोर परत भी कमजोर पड़ गई है। इससे अंडा का सुरक्षा कवच समय से पहले ही टूट जाता है। इसके चलते कौवे की प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है।

विज्ञापन


अतिथि के आगमन की सूचना देने वाले और पितरों तक श्राद्ध को पहुंचाने वाले कौए अब दिखाई ही नहीं देते। लगातार प्रदूषण के कारण तेजी से कौवे की संख्या घट रही है। जनता वैदिक कॉलेज बड़ौत के जन्तु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देवेन्द्रपाल सिंह ने शोध किया तो खुलासा हुआ है कि अब खेतों का पानी भी पूरी तरह से जहरीला हो चुका है, क्योंकि अच्छा उत्पादन लेने के चक्कर में किसान खेतों में अत्यधिक रासायनिक खादों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कौवा किसानों का मित्र है, वह शाकाहारी के साथ मांसाहारी भी है।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: UP: पेस्टीसाइड ने बिगाड़ा बासमती का स्वाद, निर्यात में 15 फीसदी गिरावट, 10 कीटनाशक प्रतिबंधित

विज्ञापन
विज्ञापन

रासायनिक खाद, कीटनाशक दवाओं के प्रचलन, शहरीकरण के साथ मोबाइल टावर से निकलने वालीं तरंगें पक्षियों के अस्तित्व को खत्म कर रही हैं। यही कारण है कि कौवे की संख्या दिनों दिन घटती जा रही है। पेड़-पौधे कट रहे हैं, जिसके कारण इनके रहने के स्थान कम हो रहे हैं।

गांव के बाहर, सड़क के किनारे मरे जानवर सड़ते रहते हैं। इनको खाने वाले गिद्ध, चील और कौए दूर तक नजर नहीं आते हैं। वर्तमान समय में कौवा भी पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों में सम्मिलित हो गया है। इसमें काला कौवा तो एकदम गायब हो रहा है।

शोध में यह हुआ खुलासा 
डा़ सिंह ने छह माह के शोध के बाद बताया कि कौवे के अंडे का सुरक्षा कवच कैल्यिशम कार्बोनेट की कठोर परत से बना होता है। मगर रासायनिक खादों के प्रयोग से खेतों का पानी जहरीला होता जा रहा है। प्यास लगने के दौरान जब कौवा पानी पीता है तो रासायनिक तत्व कौवे के शरीर में चले जाते हैं, जो कौवे के प्रजनन के बाद अंडे के सुरक्षा कवच काे कमजोर बना देते हैं। यही कारण है कि समय से पहले ही अंडे का सुरक्षा कवच टूटकर नष्ट हो जाता है। इससे कौवा की संख्या लगातार घट रही है।

श्राद्ध पक्ष में ढूंढे नहीं मिलते कौवे
लगातार कौवे की संख्या घट रही है, जिस कारण श्राद्ध पक्ष में लोगों को कौवे ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में लोगों को श्राद्ध का भोजन अथवा प्रसाद गायों को देना पड़ रहा है। पंचवटी मंदिर के पुजारी कुंदन भारद्वाज का कहना है कि श्राद्ध में कौवे को छत पर जाकर अन्न-जल देना बहुत ही पुण्य का कार्य माना जाता है।

हमारे पितृ कौवे के रूप में आकर श्राद्ध का अन्न ग्रहण करते हैं। इस पक्ष में कौवों को भोजन कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है, लेकिन अब कौवे नहीं मिल रहे तो लोगों ने गायों को ही भोजन देना शुरू कर दिया है।

 कौवा पर्यावरण के लिए बहुत ही जरूरी है। बदलते परिवेश से कौवे अब शहरों को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में सिमट गए हैं। इनकी संख्या कम होती जा रही है। वन विभाग ने कभी इनकी गणना तो नहीं कराई है। -सुनेन्द्र सिंह वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed