कोरोना के मरीजों पर की गई स्टडी, खास रिपोर्ट में पढ़िए- किस उम्र के युवाओं से हार जाता है कोरोना
- बेरहम है... पर सेहतमंद और युवाओं से हार जाता है कोरोना
- उम्र नहीं देखता लेकिन 96 प्रतिशत मरीज हो सकते हैं ठीक
- सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य, उम्रदराज बरतें खास सावधानी
विस्तार
दुनिया भर में खौफ का दूसरा नाम अब कोरोना है। मेरठ में अब तक मिले कोरोना के 74 मरीजों पर की गई स्टडी में इसके खौफ को लेकर दो बातें साफ हुई हैं। एक अच्छी और एक बुरी। बुरी यह है कि यह कोरोना बड़ा बेरहम है... उम्र कतई नहीं देखता है और अगर पहले से बीमार हैं व उम्रदराज हैं तो हो सकता है कि ये आपको न बख्शे। अच्छी बात यह है कि सेहतमंद और युवाओं से यह आसानी से हार जाता है। ऐसे में जरूरत सावधानी और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने की है।
स्टडी के अनुसार कोरोना के तीन मरीजों की मौत हुई है, जो सिर्फ चार प्रतिशत है। 96 प्रतिशत ठीक हो सकते हैं, जिनमें से 23 प्रतिशत ठीक हो भी चुके हैं। मरीजों में कुल 73 प्रतिशत पुरुष और 27 प्रतिशत महिला वर्ग के हैं। 16 प्रतिशत बच्चे-किशोरावस्था वाले हैं। इनमें चार साल से लेकर 16 साल तक के बच्चे, किशोर और किशोरियां शामिल हैं। जिन तीन लोगों की मौत हुई है उनकी उम्र 52, 57 और 72 साल है। ये तीनों ही पहले से बीमार थे। शुगर और हृदय रोग के मरीज थे। ऐसे में उम्रदराज लोगों का खास ध्यान रखने की जरूरत है।
कोरोना के मरीज का करीबी कमजोर कड़ी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि मरीजों पर रखी जा रही गहन निगरानी में यह बात भी पता चल रही है कि यह ज्यादा उसी व्यक्ति पर हमला करता है जो कोरोना के मरीज के ज्यादा करीब रहते हैं। अगर सोशल डिस्टेंसिंग रखी जाए और थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो इससे आसानी से बचा जा सकता है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि जो 17 मरीज अब तक ठीक हुए हैं वह 12 साल से लेकर 60 साल तक के हैं। इनमें अधिकांश युवा हैं। इन सभी ने कोरोना होने के बाद पूरी सावधानी बरती और ठीक हो गए। अगर मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है तो वह इसे आसानी से मात दे सकता है।
यह भी पढ़ें: कोरोना: मेरठ में एक गर्भवती महिला समेत मिले सात नए मरीज, एक संदिग्ध की मौत, अब ये इलाका भी हॉटस्पॉट
बस बचाव ही इसका उपचार
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि ऐसे में यह सही है कि बचाव ही इसका उपचार है। सोशल डिस्टेंसिंग सबसे ज्यादा जरूरी है। अपने हाथ बार-बार मुंह, नाक व आंख पर नहीं लगाएं, ताकि वायरस शरीर के अंदर नहीं जा पाए। कोरोना पॉजिटिव आए मरीजों की एक नहीं दो-दो बार जांच की गई। पता चला कि जो कोरोना के मरीज के साथ घर में रहे भी। लेकिन उसके ज्यादा पास नहीं रहे उनमें से बहुतों को कोरोना नेगेटिव आया है।
चिंताजनक पहलू: कई मरीजों में नहीं थे लक्षण, निकला कोरोना
कोरोना पॉजिटिव आए इन 74 मरीजों में कई मरीज ऐसे भी थे जिन्हें जांच से पहले कोरोना जैसे लक्षण नहीं थे। वे पूरी तरह से स्वस्थ नजर आ रहे थे। लेकिन जब उनके संपर्क वाला कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव आया और फिर इनकी जांच कराई गई तो पता चला यह भी कोरोना पॉजिटिव हैं। संतोष अस्पताल के अकाउंटेंट चंद्रपाल के 16 वर्षीय पुत्र के साथ ऐसा ही है। उसमें कोरोना जैसे लक्षण नहीं हैं। इसके अलावा अधिकांश जमातियों के साथ भी इसी तरह की स्थिति थी, यही वजह थी कि इस तरह की अफवाह फैलाई जा रही थी कि जमातियों को कोरोना नहीं है।
कई दिन तक जिंदा रह सकता है कोरोना
चीन के वुहान से शुरू होकर दुनिया भर में फैले कोरोना के कहर से लोग खौफजदा हैं। उनके मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल भी हैं। जिनमें एक है कि वायरस कितने वक्त तक जिंदा रह सकता है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ. अमित गर्ग बताते हैं कि कोरोना वायरस शरीर से बाहर कई दिन तक जिंदा रह सकता है, जबकि मेटल पर ये करीब 12 घंटे तक जिंदा रह सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, स्किन पर ये वायरस महज 10 मिनट ही जिंदा रह पाता है। ऐसे में किसी मेटल या संक्रमित चीज को छूने के बाद अच्छे से हाथ धोकर इसकी चपेट में आने से बचाव किया जा सकता है।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/