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उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए परीक्षा की घड़ी शुरू
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उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए परीक्षा की घड़ी शुरू
मेरठ। शहर में ज्यादातर सूक्ष्म लघु और लघु औद्योगिक इकाइयां कार्य कर रही हैं। एकाएक लॉकडाउन होने के कारण कंपनियों को स्टॉक और कच्चे माल को मैनेज करने का समय नहीं मिला। अब लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है। इस बीच इंडस्ट्री चालू न होने के कारण उद्यमियों को करोड़ों का नुकसान होने की संभावना है। कई कंपनी संचालक सशर्त इंडस्ट्री चालू करने की भी तैयारी कर रहे हैं। लॉकडाउन के बाद उद्यमियों ने मार्च माह की सैलरी कर्मचारियों को दे दी है, लेकिन अप्रैल की सैलरी देने को लेकर बहुत से व्यापारी विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ उद्यमी सैलरी में कटौती करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में उद्यमियों को सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद है। सरकार अगर वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट, विद्युत बिल के फिक्स चार्ज और अन्य टैक्स माफ कर देती है तो उद्यमियों को मिलने वाली इस राहत का लाभ कर्मचारियों को प्राप्त होगा। परीक्षा की इस घड़ी में उद्यमी और कर्मचारी सभी सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ उद्यमी किराया माफ करने की मांग उठा रहे हैं।
लघु उद्योगों को दें संभलने का मौका
कंपनी के अंतर्गत 45 कर्मचारी हैं, वहीं अन्य कार्य कॉन्ट्रेक्ट बेस पर कराया जाता है। कर्मचारियों की सैलरी दे दी गई है। हालांकि, 20 लाख से अधिक का प्रतिमाह नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के कारण देशभर में माल की सप्लाई रुक गई है। वहीं, मेन्युफेक्चरिंग इकाई भी प्रभावित हो रही है। तीन फैक्ट्री हैं, जिसमें दो मेरठ और एक कुंडली क्षेत्र में है। 50 से 52 दिन बाद मार्केट खुला, तब भी दो महीने मार्केट संभलने में लग जाएंगे। सरकार को लघु उद्योगों को बचाने के लिए लॉकडाउन पीरियड में लिमिट आदि पर ब्याज माफ करना चाहिए। - राजीव गुप्ता, एमडी, पैंथर इलेक्ट्रिक व्हीकल, यूनीक इंटरनेशनल।
अब डिस्काउंट के साथ आएगा समर कलेक्शन
शहर में गारमेंट के स्टोर संचालित हैं। इनमें मुख्य रूप से पोलो, लिवाइस, एलन सोली, वेनहुसैन, न्यू फिलिप आदि इंडियन ब्रांड की सेल होती है। समर कलेक्शन की सेल मार्च मध्य से शुरू हो जाती है। इस बार पूरा अप्रैल लॉकडाउन में चला गया। शोरूम में लगभग 48 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी मार्च माह की सैलरी दे दी गई है। लॉकडाउन के बावजूद कर्मचारियों को 50 प्रतिशत से अधिक सैलरी देने का प्रयास किया जाएगा। इस बीच शोरूम रेंट, इलेक्ट्रिसिटी बिल, वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट आदि का भुगतान करना होगा। सरकार को व्यापार को बचाने के लिए कुछ अहम फैसले लेने चाहिए। - यश गोयल, एमडीए, फेंटास्टिक स्टोर्स।
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बड़े खतरे से बचने के लिए छोटा नुकसान मंजूर
मेरठ और नोएडा में चैन ऑफ रेस्टोरेंट संचालित हैं। बड़े खतरे से हमें बचने के लिए छोटा नुकसान मंजूर है। आने वाला समय एक नई रोशनी के साथ आएगा, इसकी उम्मीद है। फूड इंडस्ट्री को संभलने में तीन माह तक का समय लग जाएगा। रेस्टोरेंट में 60 के आसपास कर्मचारी हैं। इनमें 10 प्रतिशत बाहर के हैं। रेस्टोरेंट में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। एक रेस्टोरेंट से अभी ऑनलाइन सप्लाइ की जा रही है। इसमें जोमेटो और स्वीगी की मदद ली गई है। - विजय गर्ग, डायरेक्टर, एसएफ फूड्स
सूक्ष्म लघु उद्योगों के अस्तित्व को खतरा
शहर में काम कर रही सूक्ष्म लघु और लघु उद्योगों के लिए अब अपने अस्तित्व को बचाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को लॉकडाउन के समय का बैंक ब्याज और टैक्स आदि माफ करने चाहिए। विद्युत बिल पर फिक्स चार्ज नहीं वसूला जाना चाहिए। उद्योगों ने जिन्हें माल सप्लाई किया था, वहां से पैसा नहीं आया है। कच्चा माल फैक्ट्रियों में खराब हो रहा है। मार्च की सैलरी देने के बाद उद्यमियों के पास अप्रैल की सैलरी दे पाना संभव नहीं है। वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन पर ब्याज माफ होना चाहिए। लॉकडाउन के समय में कर्मचारियों को सैलरी ईएसआई के पैसे से दी जानी चाहिए। उद्योगों को 20 अप्रैल के बाद पुन: चालू करने की अनुमति दी जाए।
- डॉ. रामकुमार गुप्ता, एमडी, शुभम केमिकल्स आर्गेनिक्स लिमिटेड एवं अध्यक्ष वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कामर्स।
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मेरठ। शहर में ज्यादातर सूक्ष्म लघु और लघु औद्योगिक इकाइयां कार्य कर रही हैं। एकाएक लॉकडाउन होने के कारण कंपनियों को स्टॉक और कच्चे माल को मैनेज करने का समय नहीं मिला। अब लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई है। इस बीच इंडस्ट्री चालू न होने के कारण उद्यमियों को करोड़ों का नुकसान होने की संभावना है। कई कंपनी संचालक सशर्त इंडस्ट्री चालू करने की भी तैयारी कर रहे हैं। लॉकडाउन के बाद उद्यमियों ने मार्च माह की सैलरी कर्मचारियों को दे दी है, लेकिन अप्रैल की सैलरी देने को लेकर बहुत से व्यापारी विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ उद्यमी सैलरी में कटौती करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में उद्यमियों को सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद है। सरकार अगर वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट, विद्युत बिल के फिक्स चार्ज और अन्य टैक्स माफ कर देती है तो उद्यमियों को मिलने वाली इस राहत का लाभ कर्मचारियों को प्राप्त होगा। परीक्षा की इस घड़ी में उद्यमी और कर्मचारी सभी सरकार से राहत पैकेज की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ उद्यमी किराया माफ करने की मांग उठा रहे हैं।
लघु उद्योगों को दें संभलने का मौका
कंपनी के अंतर्गत 45 कर्मचारी हैं, वहीं अन्य कार्य कॉन्ट्रेक्ट बेस पर कराया जाता है। कर्मचारियों की सैलरी दे दी गई है। हालांकि, 20 लाख से अधिक का प्रतिमाह नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के कारण देशभर में माल की सप्लाई रुक गई है। वहीं, मेन्युफेक्चरिंग इकाई भी प्रभावित हो रही है। तीन फैक्ट्री हैं, जिसमें दो मेरठ और एक कुंडली क्षेत्र में है। 50 से 52 दिन बाद मार्केट खुला, तब भी दो महीने मार्केट संभलने में लग जाएंगे। सरकार को लघु उद्योगों को बचाने के लिए लॉकडाउन पीरियड में लिमिट आदि पर ब्याज माफ करना चाहिए। - राजीव गुप्ता, एमडी, पैंथर इलेक्ट्रिक व्हीकल, यूनीक इंटरनेशनल।
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अब डिस्काउंट के साथ आएगा समर कलेक्शन
शहर में गारमेंट के स्टोर संचालित हैं। इनमें मुख्य रूप से पोलो, लिवाइस, एलन सोली, वेनहुसैन, न्यू फिलिप आदि इंडियन ब्रांड की सेल होती है। समर कलेक्शन की सेल मार्च मध्य से शुरू हो जाती है। इस बार पूरा अप्रैल लॉकडाउन में चला गया। शोरूम में लगभग 48 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी मार्च माह की सैलरी दे दी गई है। लॉकडाउन के बावजूद कर्मचारियों को 50 प्रतिशत से अधिक सैलरी देने का प्रयास किया जाएगा। इस बीच शोरूम रेंट, इलेक्ट्रिसिटी बिल, वर्किंग कैपिटल इंटरेस्ट आदि का भुगतान करना होगा। सरकार को व्यापार को बचाने के लिए कुछ अहम फैसले लेने चाहिए। - यश गोयल, एमडीए, फेंटास्टिक स्टोर्स।
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बड़े खतरे से बचने के लिए छोटा नुकसान मंजूर
मेरठ और नोएडा में चैन ऑफ रेस्टोरेंट संचालित हैं। बड़े खतरे से हमें बचने के लिए छोटा नुकसान मंजूर है। आने वाला समय एक नई रोशनी के साथ आएगा, इसकी उम्मीद है। फूड इंडस्ट्री को संभलने में तीन माह तक का समय लग जाएगा। रेस्टोरेंट में 60 के आसपास कर्मचारी हैं। इनमें 10 प्रतिशत बाहर के हैं। रेस्टोरेंट में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। एक रेस्टोरेंट से अभी ऑनलाइन सप्लाइ की जा रही है। इसमें जोमेटो और स्वीगी की मदद ली गई है। - विजय गर्ग, डायरेक्टर, एसएफ फूड्स
सूक्ष्म लघु उद्योगों के अस्तित्व को खतरा
शहर में काम कर रही सूक्ष्म लघु और लघु उद्योगों के लिए अब अपने अस्तित्व को बचाना मुश्किल हो जाएगा। सरकार को लॉकडाउन के समय का बैंक ब्याज और टैक्स आदि माफ करने चाहिए। विद्युत बिल पर फिक्स चार्ज नहीं वसूला जाना चाहिए। उद्योगों ने जिन्हें माल सप्लाई किया था, वहां से पैसा नहीं आया है। कच्चा माल फैक्ट्रियों में खराब हो रहा है। मार्च की सैलरी देने के बाद उद्यमियों के पास अप्रैल की सैलरी दे पाना संभव नहीं है। वर्किंग कैपिटल और टर्म लोन पर ब्याज माफ होना चाहिए। लॉकडाउन के समय में कर्मचारियों को सैलरी ईएसआई के पैसे से दी जानी चाहिए। उद्योगों को 20 अप्रैल के बाद पुन: चालू करने की अनुमति दी जाए।
- डॉ. रामकुमार गुप्ता, एमडी, शुभम केमिकल्स आर्गेनिक्स लिमिटेड एवं अध्यक्ष वेस्टर्न यूपी चैंबर ऑफ कामर्स।