Meerut News: शहर की हर सातवीं महिला मानसिक रोगों की शिकार, शोध में हुए चौंकाने वाले खुलासे
मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में हुए शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 15 से 49 साल तक की 267 महिलाओं पर किए गए शोध में सामने आया है कि जिले की हर सातवीं महिला मानसिक रोग का शिकार है। वहीं शोध को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सिल्वर जुबली कांफ्रेंस में पहला पुरस्कार मिला है।
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मेरठ जिले की महिलाएं मानसिक रोगों का शिकार हो रही हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 15 से 49 साल की 267 महिलाओं पर किए गए शोध में खुलासा हुआ है कि हर सातवीं महिला मानसिक रोगों से पीड़ित है, जिसमें डिप्रेशन, घबराहट, चिड़चिड़ापन और बिना वजह का डर आदि शामिल हैं। इंडियन प्रिवेंटिव एंड मेडिसिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चैप्टर कीकन्नौज के राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई 25वीं वार्षिक सिल्वर जुबली कांफ्रेंस में इस शोध को पहला पुरस्कार मिला है।
यह शोध कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर डॉ. सीमा जैन, प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार की देखरेख में मेडिकल कॉलेज के स्नातकोत्तर के छात्र डॉ. रक्षित चौधरी ने किया। डॉ. रक्षित ने बताया कि देशभर में मानसिक रोगों से पीड़ित महिलाओं का औसत करीब 8 प्रतिशत है, यानी 100 में से हर 13वीं महिला किसी न किसी मानसिक रोग से पीड़ित है। मेरठ में यह 15.4 प्रतिशत आया है, यानी देश के औसत से करीब दोगुना है।
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ये निकले मानसिक रोगों के कारण
- तलाक या पति से अलगाव
- आर्थिक रूप से कमजोरी
- घरेलू कलह
- अविवाहित युवतियों में शादी न होने की फिक्र
- 40 से 49 साल की महिला में मेनोपॉज
हर चौथा व्यक्ति मधुमेह की चपेट में आने के कगार पर
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में शोध खुलासा हुआ है कि हर चौथा व्यक्ति मधुमेह की चपेट में आने के कगार पर है। 503 लोगों पर हुुए शोध में 136 लोग प्री डायबिटिक रेंज में निकले हैं।
इसकी वजह यह निकली है कि ये लोग कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट ज्यादा खाते हैं और व्यायाम या तो करते ही नहीं है या बहुत कम करते हैं। इसी तरह का जीवन जीते रहने पर यह आने वाले दो से तीन साल में मधुमेह की चपेट में आ सकते हैं।
यह शोध करने वाले मेडिकल के स्नातकोत्तर के छात्र डॉ. मोहित सैनी को कन्नौज के राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुई 25वीं वार्षिक सिल्वर जुबली कांफ्रेंस में तृतीय पुरस्कार मिला है। डॉ. मोहित सैनी ने बताया कि शोध करने के चार कैटेगिरी बनाई गई थीं। इसमें उम्र, कमर की चौड़ाई, पारिवारिक इतिहास (किसी को मधुमेह तो नहीं रहा) और व्यायाम को लिया गया।
रिस्क स्कोर 100 पर इन्हें परखा गया तो 136 लोगों का रिस्क स्कोर 70 से 90 के बीच रहा, जबकि 211 का रिस्क स्कोर 60-70 के बीच और 75 का 50 से 60 के बीच रहा। इनमें 81 लोग ऐसे रहे, जिन्हें कोई रिस्क फैक्टर नहीं निकला। ये वे लोग थे, जिनकी तोंद नहीं है। हर सप्ताह करीब 150 मिनट व्यायाम करते हैं और ज्यादा कैलोरी नहीं खाते हैं।
डॉ. सीमा जैन को मिला फेलोशिप पुरस्कार
कन्नौज में हुई कांफ्रेंस में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. हरिवंश चोपड़ा लाइफटाइम अवार्ड और डॉ. सीमा जैन को फेलोशिप से सम्मानित किया गया। फेलोशिप पुरस्कार उत्तर प्रदेश में प्रथम बार किसी महिला संकाय सदस्य को दिया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि कांफ्रेंस का मुख्य उद्देश्य मातृ शिशु स्वास्थ्य के संबंध में पोषण संरक्षण एवं संवर्धन के नए आयामों को नवीनतम शोधों के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना रहा।