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अवैध कब्जों के मामले में आवास विकास अपने ही जाल में फंसा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jun 2017 01:07 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अर्जित भूमि पर अवैध कब्जों के मामले में आवास विकास अपने ही जाल में फंस गया है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी जानकारी में इस जमीन पर कब्जा होने का दावा कर दिया। मौकेपर आवास विकास के कब्जे की जगह सघन आबादी है। मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है जिसमें 12 जून को जस्टिस विक्रमनाथ की अवकाश कालीन बैंच में सुनवाई होगी। अब आवास विकास का कहना है कि पावर नहीं है तो कब्जा कैसे हटाएं।
यह है पूरा प्रकरण
आवास विकास परिषद ने गढ़ रोड तथा आसपास शास्त्रीनगर योजना सात के लिए 163 खसरा नंबर की कुल 63.063 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। नया मामला तब सामने आया जब विशाल मेगा मार्ट पर एमडीए ने सील लगा दी। जांच की तो पता चला कि यह आवास विकास परिषद की अधिग्रहीत जमीन पर बना है। विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि न केवल विशाल मेगा मार्ट बल्कि ऐसे कई कांप्लेक्स अर्जित जमीन पर ही बने हैं। आवास विकास परिषद ने अपने दस्तावेज खंगालकर विशाल मेगा मार्ट संचालक नीरज दुरेजा और हरीश चांदना को नोटिस तो जारी कर दिया पर कार्रवाई कैसे होगी यहां मामला फंस गया है। कार्रवाई की पावर अभी परिषद को एमडीए से मिली नहीं है। दूसरे अन्य निर्माणों पर एक्शन कैसे होगा?
अपने ही जाल में उलझा आवास विकास
इस बाबत जन सूचना के अधिकारी में लोकेश खुराना द्वारा मांगी जानकारी में दस्तावेजों ने यह शो किया है कि इस जमीन पर आवास विकास परिषद का कब्जा है। दूसरे दस्तावेज में खुद ही कह रहे हैं कि यहां सघन आबादी है तो कब्जा कैसे लें? हैरत की बात यह है कि केवल एक ही खसरा नंबर का मुआवजा भू स्वामी को न्यायालय द्वारा परिषद के खातों को कुर्क कर दिलाया गया। अब आवास विकास को रास्ता ही नहीं सूझ रहा है कि क्या करे? इस बाबत आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में रिट दायर की है जिस पर 12 जून को अवकाश कालीन बैंच में सुनवाई होनी है। दरअसल कहा यह गया है कि यदि अब तक इस जमीन पर कब्जा ही नहीं लिया जा सका तो अधिग्रहण प्रक्रिया को ही समाप्त कर आवास विकास परिषद अपना पैसा किसानों से वसूले। या फिर कब्जा ले। चूंकि यह तो सरकारी धन की हानि हुई है। जहां आज यह निर्माण हो चुकेहैं वहां सर्किल रेट ही डेढ लाख रुपये मीटर से ज्यादा है। आवास विकास जवाब देने की तैयारी में है।
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यह है पूरा प्रकरण
आवास विकास परिषद ने गढ़ रोड तथा आसपास शास्त्रीनगर योजना सात के लिए 163 खसरा नंबर की कुल 63.063 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। नया मामला तब सामने आया जब विशाल मेगा मार्ट पर एमडीए ने सील लगा दी। जांच की तो पता चला कि यह आवास विकास परिषद की अधिग्रहीत जमीन पर बना है। विस्तृत जांच में खुलासा हुआ कि न केवल विशाल मेगा मार्ट बल्कि ऐसे कई कांप्लेक्स अर्जित जमीन पर ही बने हैं। आवास विकास परिषद ने अपने दस्तावेज खंगालकर विशाल मेगा मार्ट संचालक नीरज दुरेजा और हरीश चांदना को नोटिस तो जारी कर दिया पर कार्रवाई कैसे होगी यहां मामला फंस गया है। कार्रवाई की पावर अभी परिषद को एमडीए से मिली नहीं है। दूसरे अन्य निर्माणों पर एक्शन कैसे होगा?
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अपने ही जाल में उलझा आवास विकास
इस बाबत जन सूचना के अधिकारी में लोकेश खुराना द्वारा मांगी जानकारी में दस्तावेजों ने यह शो किया है कि इस जमीन पर आवास विकास परिषद का कब्जा है। दूसरे दस्तावेज में खुद ही कह रहे हैं कि यहां सघन आबादी है तो कब्जा कैसे लें? हैरत की बात यह है कि केवल एक ही खसरा नंबर का मुआवजा भू स्वामी को न्यायालय द्वारा परिषद के खातों को कुर्क कर दिलाया गया। अब आवास विकास को रास्ता ही नहीं सूझ रहा है कि क्या करे? इस बाबत आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में रिट दायर की है जिस पर 12 जून को अवकाश कालीन बैंच में सुनवाई होनी है। दरअसल कहा यह गया है कि यदि अब तक इस जमीन पर कब्जा ही नहीं लिया जा सका तो अधिग्रहण प्रक्रिया को ही समाप्त कर आवास विकास परिषद अपना पैसा किसानों से वसूले। या फिर कब्जा ले। चूंकि यह तो सरकारी धन की हानि हुई है। जहां आज यह निर्माण हो चुकेहैं वहां सर्किल रेट ही डेढ लाख रुपये मीटर से ज्यादा है। आवास विकास जवाब देने की तैयारी में है।
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