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भगवान राम के आदर्शों को अपनाएं : अग्निहोत्री महाराज
Mon, 13 Jul 2026 09:31 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Mon, 13 Jul 2026 09:31 PM IST
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प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में चल रहे रामचरितमानस पाठ का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीरामचरितमानस पाठ का सोमवार कोसमापन हो गया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में मथुरा-वृंदावन से पधारे कथावाचक अग्निहोत्री महाराज ने श्रीरामचरितमानस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आदर्श मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सुखी, सफल और संस्कारित बना सकता है। मानस का नियमित पाठ परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं को हस्तिनापुर की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हस्तिनापुर प्राचीन काल से धर्म और संस्कृति की पावन भूमि रही है। भगवान श्रीराम के आदर्श और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में रामचरितमानस की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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हस्तिनापुर। कस्बे के पांडव टीले पर स्थित प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीरामचरितमानस पाठ का सोमवार कोसमापन हो गया। समापन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम में मथुरा-वृंदावन से पधारे कथावाचक अग्निहोत्री महाराज ने श्रीरामचरितमानस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला आदर्श मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन को सुखी, सफल और संस्कारित बना सकता है। मानस का नियमित पाठ परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं को हस्तिनापुर की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि हस्तिनापुर प्राचीन काल से धर्म और संस्कृति की पावन भूमि रही है। भगवान श्रीराम के आदर्श और सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने में रामचरितमानस की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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