चुनाव 2022 : रास्ता नहीं तो वोट नहीं..., ग्रामीणों ने चौराहों पर लगाए पोस्टर, सिवालखास में भाजपा प्रत्याशी मंनिंदर पाल का जमकर विरोध
ग्रामीणों के अनुसार अगर उनके गांव के कट को जल्द नही खोला गया तो सभी गांव के लोग इस बार अपने गांव में वोटिंग नही होने देगे।
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इन पोस्टरों पर लिखा है कि अगर गांव का मेन रास्ते का कट खोला नही गया तो इस बार गांव में वोटिग नही होगी । गांव के लोगों ने इकठ्ठा होकर नारेबाजी की ओर वोटों का बहिष्कार कर दिया है।
वहीं गांव के रहने वाले संदीप शर्मा ओमप्रकाश राजवीर संजय आदि का कहना है उनके गांव का मेन कट 35 सालों से खुला हुआ थाए जिसको कुछ दिन पहले बंद कर दिया गया है। कट के बंद होने से गांव के लोगो को आने जाने मे काफी दिक्कतों का सामना करना पड रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार अगर उनके गांव के कट को जल्द नही खोला गया तो सभी गांव के लोग इस बार अपने गांव में वोटिंग नही होने देगे। जिसका वह बहिष्कार कर रहे हैं, अगर कोई भी उम्मीदवार गांव में वोट भी मांगने आता है तो उसको गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। कट नही खुलेगा तो वोट नही।
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प्रचार करने पहुंचे भाजपा प्रत्याशी का विरोध
शुक्रवार की देर रात पथौली गांव में चुनाव प्रचार को पहुंचे सिवालखास से भाजपा प्रत्याशी मनिंदरपाल सिंह और उनके साथियों को उल्टे पांव लौटना पड़ा। यहां जाट बाहुल्य गांव पाथोली में भाजपा प्रत्याशी के सामने रालोद कार्यकर्ताओं ने जयंत चौधरी जिंदाबाद और रालोद के जमकर नारेबाजी की। जिसके विरोध के चलते भाजपा प्रत्याशी को अपना प्रचार रोकना पड़ा।
इस दौरान रालोद कार्यकर्ताओं और भाजपा की समर्थक में टकराव की नौबत बन गई यहां टकराव के दौरान रालोद कार्यकर्ताओं ने जमकर जयंत चौधरी के समर्थन में नारेबाजी की और भाजपा के खिलाफ भी नारेबाजी की से लेकर माहौल गरमा गया। बाद में कुछ गणमान्य लोग मौके पर पहुंचे और भाजपा प्रत्याशी के विरोध में नारेबाजी कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया गया।
विरोध के चलते खुद भाजपा प्रत्याशी मनिंदर पाल सिंह व उनके समर्थकों को उल्टे पांव हम गाड़ी में बैठकर लौटना पड़ा। इसे लेकर गांव में माहौल गरमा गया हालांकि सूचना पुलिस तक नहीं पहुंची लेकिन राजनीतिक माहौल गरमा गया।
गौरतलब है कि जाट बाहुल्य गांव पथौली में पहले भी भाजपा नेताओं का विरोध होता रहा है। यह गांव रालोद का गढ़ माना जाता है जहां शुक्रवार की देर रात भाजपा प्रत्याशी मनिंदर पाल सिंह समर्थकों के साथ में प्रचार को पहुंचे लेकिन विरोध के चलते उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।