आठ करोड़ की टैक्स चोरी में दो बिल्डर गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल
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करीब आठ करोड़ रुपये की सर्विस टैक्स की चोरी करने के आरोप में डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलीजेंस मेरठ (डीजीसीईआई) ने नोएडा स्थित मैसर्स पोपुलरटी इंफ्राटेक कंपनी पर छापा मारा। जहां से दो निदेशकों सतेंद्र सिंह तोमर और अतुल विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर मेरठ की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों बिल्डरों को जेल भेज दिया।
डीजीसीईआई के अधिकारियों के मुताबिक रियल एस्टेट में ग्राहकों द्वारा दिए गए करीब 187 करोड़ रुपये के टर्नओवर पर करीब 7-8 करोड़ का सर्विस टैक्स अदा न करने के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जिस पर विभाग ने वैधानिक कार्रवाई करते हुए दोनों बिल्डरों को गिरफ्तार कर न्यायालय स्पेशल सीजेएम निशा सिंह की कोर्ट में शनिवार को पेश कर धारा 89 (1) (11) फाइनेंस एक्ट के तहत न्यायिक रिमांड मांगा। अभियोजन पक्ष (इंटेलीजेंस के अधिकारी) ने कहा कि आरोपियों को 18 जनवरी को भी नोटिस दिया गया था।
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अधिवक्ता ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं तथा करोड़ों रुपये के सरकारी धन का गबन किया गया है। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता विनोद काजीपुर, तरुण ढाका, रामकुमार शर्मा ने बिल्डरों की गिरफ्तारी गैरकानूनी रूप से करना बताया। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए। आरोपियों की ओर से कोर्ट में शाम को जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, जिसे खारिज कर दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।
जिला अस्पताल में कराया मेडिकल
इंटेलीजेंस अधिकारियों ने दोनों आरोपियों का जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। इसकी जानकारी पर देहली गेट थाने की पुलिस भी अस्पताल पहुंची। पुलिस ने आरोपियों के बारे में पूछा। लेकिन इंटेलीजेंस के अधिकारियों ने इसके बारे में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। वहीं, इस दौरान दोनों बिल्डर मीडिया के सामने मुंह छिपाते रहे।
पांच बिल्डरों की और तलाश
अफसरों के अनुसार इस मामले में मेरठ इंटेलीजेंस ने सात बिल्डरों को आरोपी बनाया है। दो आरोपी जेल चले गए, जबकि पांच फरार हैं। जिनकी तलाश में विभागीय अधिकारी लगे हैं। इन फरार बिल्डरों को कई बार विभाग की तरफ से नोटिस दिए जा चुके हैं। जल्द ही उनको भी गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा।
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