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Meerut News: मंदिर में स्कूल...पहले पूजा, फिर पढ़ाई
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बागपत। मवीकलां प्राथमिक विद्यालय के बच्चे मंदिर में पढ़ाई करते हैं। मंदिर में सुबह पहले पूजा होती है और इसके बाद मंदिर के बरामदे में शुरू होती है बच्चों की पढ़ाई। मंदिर परिसर में चल रहे विद्यालय में बच्चों को सुविधाओं के लिए भी जूझना भी पड़ रहा है।
इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांचवीं तक 140 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। दो कक्षों की हालत ज्यादा खराब थी, जो किसी भी समय गिर सकते थे, इसलिए दो साल पहले उनको ध्वस्त करा दिया गया। दो साल बाद अभी तक विद्यालय के उन कक्षों का निर्माण नहीं कराया जा सका है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। कक्षों का निर्माण नहीं होने से दूसरी और तीसरी कक्षा के 62 बच्चे मंदिर के बरामदे में पढ़ाई करते हैं।
मंदिर में गांव के लोग सुबह साढ़े सात बजे तक पूजा करते हैं और इसके बाद बच्चों की पढ़ाई शुरू होती है। इसके बाद भी इक्का-दुक्का लोग पूजा करने आते हैं। इससे वहां पढ़ाई में बाधा पहुंचती है। मंदिर परिसर में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है। वहां यदि लाइट चली जाती है तो उन्हें गर्मी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है और किताबों से हवा करनी पड़ती है।
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अन्य कक्षाओं के बच्चे भी परेशान
प्राथमिक विद्यालय के दो कमरे ध्वस्त होने के बाद कक्षा दो व तीन के बच्चों को मंदिर परिसर में पढ़ाया जा रहा है, जबकि कक्षा चार व पांच के बच्चों को एक कमरे में बैठाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसके अलावा कक्षा एक के बच्चों को प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। इस तरह बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती
प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती है। इनमें प्रभारी प्रधानाध्यापक खुशबू तोमर, भावना तोमर, सहनारा, राशू व मोनिका हैं तो एक शिक्षा मित्र अर्चना मान हैं।
बंदरों व कुत्तों से बच्चे परेशान
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक व मंदिर परिसर में पढ़ने वाले बच्चे बंदरों व कुत्तों के कारण भी परेशान हैं। यहां आए दिन बंदर बच्चों पर हमला बोल देते हैं। बच्चे मिड-डे-मील खाने के लिए परिसर में बैठते हैं और बंदर खाने को देखकर बच्चों पर हमला कर देते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों को डंडे लेकर खड़ा होना पड़ता है। जब तक बच्चे खाना नहीं खाते, तब तक वे डंडे लेकर खड़े रहते हैं। मंदिर परिसर में बरामदा खुला होने के कारण वहां कुत्ते भी बच्चों के बीच आ जाते हैं।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में दो कक्ष जर्जर होने पर दो साल पहले ध्वस्त करा दिए गए थे। कक्षों का अभी तक निर्माण नहीं कराया गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, क्योंकि उनको मंदिर परिसर में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
-दीपक
प्राथमिक विद्यालयों के भवनों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और वहां बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, तभी बच्चे सही से पढ़ाई कर सकेंगे। विद्यालय में कक्षों का जल्द निर्माण कराया जाए, जिससे बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो।
-कृष्णपाल
वर्जन
मवीकलां गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में कक्षों का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके लिए शासन से 15.67 लाख रुपये का बजट मंजूर हो गया है। बजट आते ही कक्षों का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसके बाद बच्चों को विद्यालय में शिफ्ट किया जाएगा।
-गीता चौधरी, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांचवीं तक 140 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। दो कक्षों की हालत ज्यादा खराब थी, जो किसी भी समय गिर सकते थे, इसलिए दो साल पहले उनको ध्वस्त करा दिया गया। दो साल बाद अभी तक विद्यालय के उन कक्षों का निर्माण नहीं कराया जा सका है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। कक्षों का निर्माण नहीं होने से दूसरी और तीसरी कक्षा के 62 बच्चे मंदिर के बरामदे में पढ़ाई करते हैं।
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मंदिर में गांव के लोग सुबह साढ़े सात बजे तक पूजा करते हैं और इसके बाद बच्चों की पढ़ाई शुरू होती है। इसके बाद भी इक्का-दुक्का लोग पूजा करने आते हैं। इससे वहां पढ़ाई में बाधा पहुंचती है। मंदिर परिसर में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है। वहां यदि लाइट चली जाती है तो उन्हें गर्मी में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है और किताबों से हवा करनी पड़ती है।
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अन्य कक्षाओं के बच्चे भी परेशान
प्राथमिक विद्यालय के दो कमरे ध्वस्त होने के बाद कक्षा दो व तीन के बच्चों को मंदिर परिसर में पढ़ाया जा रहा है, जबकि कक्षा चार व पांच के बच्चों को एक कमरे में बैठाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसके अलावा कक्षा एक के बच्चों को प्रधानाध्यापक के कार्यालय में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। इस तरह बच्चों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती
प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षकों की तैनाती है। इनमें प्रभारी प्रधानाध्यापक खुशबू तोमर, भावना तोमर, सहनारा, राशू व मोनिका हैं तो एक शिक्षा मित्र अर्चना मान हैं।
बंदरों व कुत्तों से बच्चे परेशान
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक व मंदिर परिसर में पढ़ने वाले बच्चे बंदरों व कुत्तों के कारण भी परेशान हैं। यहां आए दिन बंदर बच्चों पर हमला बोल देते हैं। बच्चे मिड-डे-मील खाने के लिए परिसर में बैठते हैं और बंदर खाने को देखकर बच्चों पर हमला कर देते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए शिक्षकों को डंडे लेकर खड़ा होना पड़ता है। जब तक बच्चे खाना नहीं खाते, तब तक वे डंडे लेकर खड़े रहते हैं। मंदिर परिसर में बरामदा खुला होने के कारण वहां कुत्ते भी बच्चों के बीच आ जाते हैं।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में दो कक्ष जर्जर होने पर दो साल पहले ध्वस्त करा दिए गए थे। कक्षों का अभी तक निर्माण नहीं कराया गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, क्योंकि उनको मंदिर परिसर में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।
-दीपक
प्राथमिक विद्यालयों के भवनों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और वहां बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए, तभी बच्चे सही से पढ़ाई कर सकेंगे। विद्यालय में कक्षों का जल्द निर्माण कराया जाए, जिससे बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो।
-कृष्णपाल
वर्जन
मवीकलां गांव के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक में कक्षों का निर्माण जल्द शुरू कराया जाएगा। इसके लिए शासन से 15.67 लाख रुपये का बजट मंजूर हो गया है। बजट आते ही कक्षों का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसके बाद बच्चों को विद्यालय में शिफ्ट किया जाएगा।
-गीता चौधरी, बेसिक शिक्षा अधिकारी