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Dussehra In Meerut: अव्यवस्था का अट्टहास मिटाने का संकल्प, शहर की इन बुराइयों का हो दहन
Tue, 24 Oct 2023 01:58 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 24 Oct 2023 01:58 PM IST
सार
आज विजयादशमी के दिन अपने शहर की दस बुराइयों के दहन का संकल्प लें। रावण के दहन के साथ अमर उजाला ने शहर की दस अव्यवस्थाओं की और ध्यान खींचा है।
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आज होगा रावण दहन
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
आज दशहरा है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक। रावण दहन के साथ नए संकल्प लिए जाएंंगे। व्यक्तिगत अवगुणों को मिटाने का प्रयत्न खुद ही करना है, लेकिन सामाजिक व्यवस्थाओं से जुड़ी बुराइयों का अंत तो सरकारी विभागों को ही करना है। अमर उजाला रावण के दस सिरों जैसी इन अव्यवस्थाओं की तरफ अफसरों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। इसके दहन का संकल्प विभागों को ही लेना है। आम जनता इन बुराइयों को मिटाने में विभागों के सहयोग का संकल्प लें।
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फिर चमकें टूटी सड़कें
अभी शहर की कई सड़कें गड्ढों में तब्तील हैं। नगर निगम नए सदन के गठन के बाद से एक भी सड़क नहीं बना सका है। सड़कों के निर्माण के लिए जारी टेंडर कभी 20 साल की गारंटी वाली सड़कों में अटक गए कभी मानक के मुताबिक आवेदन न आने के चक्कर में अटक गए। अब टेंडर प्रक्रिया पूरी हो सकी है, लेकिन इस बार दशहरे में लोगों को टूटी सड़कों से ही गुजरना होगा। लेकिन निगम से गुजारशि है कि जल्द ही टूटी सड़क के दानव का अंत हो लोग चमचमाती सड़कों पर रफ्तार भर सकें।
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मिटे सड़कों का अंधेरा
निगम ने शहर में 72 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने का दावा किया था। लेकिन अभी भी शहर में कई जगहों पर अंधेरा है। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं। जिस कंपनी को स्ट्रीट लाइट ठीक करने का ठेका दिया गया है, उसने भुगतान न होने के चलते काम करने से मना कर दिया है। नतीजा अधिकांश स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई हैं। अब निगम से उम्मीद है कि दीपावली तक शहर का अंधेरा मिटाकर को उजाले से रोशन कर दे।
निगम ने शहर में 72 हजार स्ट्रीट लाइटें लगाने का दावा किया था। लेकिन अभी भी शहर में कई जगहों पर अंधेरा है। स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं। जिस कंपनी को स्ट्रीट लाइट ठीक करने का ठेका दिया गया है, उसने भुगतान न होने के चलते काम करने से मना कर दिया है। नतीजा अधिकांश स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई हैं। अब निगम से उम्मीद है कि दीपावली तक शहर का अंधेरा मिटाकर को उजाले से रोशन कर दे।
मिलावटखोरी का दानव मरे
मिलावटखोरी का दैत्य जागा हुआ है। त्योहारों में तो यह और सक्रिय हो जाता है। इस साल एफएडीए ने खाद्य पदार्थों के 225 नमूने लिए हैं, जिनमें से 133 फेल निकले हैं। दूध, पनीर, बर्फी, रसगुल्ला, तेल, मिर्च और हल्दी के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। यह न सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि खराब खाद्य पदार्थ लेने से आर्थिक नुकसान भी होता है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन कार्रवाई भी करता है, मगर सुधार नहीं हो रहा है। विभाग मिलावट के खिलाफ अभियान छेड़े और लोग जागरुक हों तभी मिलावटखोरी का दैत्य मरेगा।
मिलावटखोरी का दैत्य जागा हुआ है। त्योहारों में तो यह और सक्रिय हो जाता है। इस साल एफएडीए ने खाद्य पदार्थों के 225 नमूने लिए हैं, जिनमें से 133 फेल निकले हैं। दूध, पनीर, बर्फी, रसगुल्ला, तेल, मिर्च और हल्दी के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। यह न सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि खराब खाद्य पदार्थ लेने से आर्थिक नुकसान भी होता है। खाद्य सुरक्षा प्रशासन कार्रवाई भी करता है, मगर सुधार नहीं हो रहा है। विभाग मिलावट के खिलाफ अभियान छेड़े और लोग जागरुक हों तभी मिलावटखोरी का दैत्य मरेगा।
अपराध पर लगे लगाम
अपराध रूपी रावण खत्म नहीं हो रहा है। ऐसा कोई दिन नहीं जब शहर में कोई वारदात न होती हो। लूट, हत्या और वाहन चोरी के मामले रिकाॅर्ड तोड़ रहे हैं। साइबर क्राइम के मामले भी बेतहाशा सामने आ रहे हैं। ठगी के शिकार हो रहे लोगों के बैंक खाते खाली हो रहे हैं। पुलिस फिर भी अपराधियों पर लगाम और कानून-व्यवस्था के राज का राग अलाप रही है।
अपराध रूपी रावण खत्म नहीं हो रहा है। ऐसा कोई दिन नहीं जब शहर में कोई वारदात न होती हो। लूट, हत्या और वाहन चोरी के मामले रिकाॅर्ड तोड़ रहे हैं। साइबर क्राइम के मामले भी बेतहाशा सामने आ रहे हैं। ठगी के शिकार हो रहे लोगों के बैंक खाते खाली हो रहे हैं। पुलिस फिर भी अपराधियों पर लगाम और कानून-व्यवस्था के राज का राग अलाप रही है।
हटे अतिक्रमण तो मिटे जाम
जाम रूपी समस्या लगातार बढ़ रही है। रैपिडएक्स के काम के साथ ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। वाहन चालकों को जाम में फंसकर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह सड़क किनारे खड़े बेतरतीब वाहन भी जाम की वजह बनते हैं। इसके अलावा अतिक्रमण से सिकुड़ती सड़कों पर त्योहारों के समय तो बाजारों से निकलना ही मुश्किल हो जाता है। नगर निगम, संभागीय परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस लोगों की सहूलियत के लिए इस अतिक्रमण और जाम से मुक्ति दिलाए।
जाम रूपी समस्या लगातार बढ़ रही है। रैपिडएक्स के काम के साथ ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। वाहन चालकों को जाम में फंसकर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जगह-जगह सड़क किनारे खड़े बेतरतीब वाहन भी जाम की वजह बनते हैं। इसके अलावा अतिक्रमण से सिकुड़ती सड़कों पर त्योहारों के समय तो बाजारों से निकलना ही मुश्किल हो जाता है। नगर निगम, संभागीय परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस लोगों की सहूलियत के लिए इस अतिक्रमण और जाम से मुक्ति दिलाए।
बने मल्टीलेवल पार्किंग तो मिले राहत
शहर में मल्टीलेवल पार्किंग की कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। मेडा ने दो साल पहले बोर्ड बैठक में मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव पारित किया था। इसी के साथ मल्टीपरपज हॉल भी बनाया जाना था, लेकिन यह सब फाइलों में ही अटका रह गया। मेडा में आने वालों के वाहन यातायात पुलिस चालान कर ले जाती है। वहीं कैंट विधायक अमित अग्रवाल की ओर से कचहरी परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल पुराने शहर का है। दोपहिया वाहन से भी निकलना दुश्वार है। यहां भी लोग पार्किंग को तरस रहे हैं। इन पार्किंग की योजना को रफ्तार मिले तो शहर के बाजार जाम से मुक्त हों।
शहर में मल्टीलेवल पार्किंग की कवायद परवान नहीं चढ़ सकी। मेडा ने दो साल पहले बोर्ड बैठक में मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव पारित किया था। इसी के साथ मल्टीपरपज हॉल भी बनाया जाना था, लेकिन यह सब फाइलों में ही अटका रह गया। मेडा में आने वालों के वाहन यातायात पुलिस चालान कर ले जाती है। वहीं कैंट विधायक अमित अग्रवाल की ओर से कचहरी परिसर में मल्टीलेवल पार्किंग की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सबसे ज्यादा बुरा हाल पुराने शहर का है। दोपहिया वाहन से भी निकलना दुश्वार है। यहां भी लोग पार्किंग को तरस रहे हैं। इन पार्किंग की योजना को रफ्तार मिले तो शहर के बाजार जाम से मुक्त हों।
राशन की रुके कालाबाजारी
गरीब परिवारों के राशन पर डाका है। जहां पात्र परिवारों के राशन को अमीर अपात्र गटक रहे हैं वहीं राशन डीलर जनता को पूरा राशन तक नहीं देते। सरकारी राशन कालाबाजार पहुंच रहा है। जिले में 5,40771 पात्र गृहस्थी और 9229 अंत्योदय परिवारों के राशन कार्ड हैं। सरकार ने भले ही राशन वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए पॉशमशीनें लगाई हों, लेकिन राशन डीलर राशन कार्डों में फर्जी नाम जुडवाकर खेल कर रहे हैं। इस भ्रष्टाचार को लेकर आए दिन आवाज उठती है, लेकिन यह भ्रष्टाचार रूपी रावण मरने का नाम नहीं ले रहा है।
गरीब परिवारों के राशन पर डाका है। जहां पात्र परिवारों के राशन को अमीर अपात्र गटक रहे हैं वहीं राशन डीलर जनता को पूरा राशन तक नहीं देते। सरकारी राशन कालाबाजार पहुंच रहा है। जिले में 5,40771 पात्र गृहस्थी और 9229 अंत्योदय परिवारों के राशन कार्ड हैं। सरकार ने भले ही राशन वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए पॉशमशीनें लगाई हों, लेकिन राशन डीलर राशन कार्डों में फर्जी नाम जुडवाकर खेल कर रहे हैं। इस भ्रष्टाचार को लेकर आए दिन आवाज उठती है, लेकिन यह भ्रष्टाचार रूपी रावण मरने का नाम नहीं ले रहा है।
हटे कूड़ा तो उभरे स्वच्छ भारत की तस्वीर
मंगतपुरम और हापुड़ रोड में बने कूड़े के पहाड़ लोगों के लिए आफत बने हैं। इनको हटाने के लिए कई बार मांग उठ चुकी हैं। इसके अलावा शहर के भीतर भी कई स्थानों में कूड़े के ठेर लगे रहते हैं। आए दिन पार्षद स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इसके लिए हंगामा भी करते हैं। मुस्लिम क्षेत्र के लिए तो कूड़ा उठान को लेकर नगर निगम पर भेदभाव के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में कूड़ा उठान और निस्तारण को लेकर कोई कार्ययोजना बने तो स्वच्छ भारत की तस्वीर हकीकत में बदले।
मंगतपुरम और हापुड़ रोड में बने कूड़े के पहाड़ लोगों के लिए आफत बने हैं। इनको हटाने के लिए कई बार मांग उठ चुकी हैं। इसके अलावा शहर के भीतर भी कई स्थानों में कूड़े के ठेर लगे रहते हैं। आए दिन पार्षद स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इसके लिए हंगामा भी करते हैं। मुस्लिम क्षेत्र के लिए तो कूड़ा उठान को लेकर नगर निगम पर भेदभाव के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में कूड़ा उठान और निस्तारण को लेकर कोई कार्ययोजना बने तो स्वच्छ भारत की तस्वीर हकीकत में बदले।
पाटे जाएं मौत के नाले
शहर के सिल्ट से भरे नाले लोगों की जान ले रहे हैं। पिछले एक साल में नाले कई लोगों की मौत की वजह बने हैं। ओडियन और आबू नाला समेत यहां 250 से अधिक नाले हैं। नालों की सफाई पर हर साल करीब दो करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन हकीकत में सफाई नहीं होती। नतीजतन, इन नालों की वजह से न सिर्फ बीमारियां पनप रही हैं, बल्कि ये जानलेवा भी साबित हो रहे हैं। ऐसे में नाले ठके जाएं तो बात बने।
शहर के सिल्ट से भरे नाले लोगों की जान ले रहे हैं। पिछले एक साल में नाले कई लोगों की मौत की वजह बने हैं। ओडियन और आबू नाला समेत यहां 250 से अधिक नाले हैं। नालों की सफाई पर हर साल करीब दो करोड़ रुपये खर्च होते हैं, लेकिन हकीकत में सफाई नहीं होती। नतीजतन, इन नालों की वजह से न सिर्फ बीमारियां पनप रही हैं, बल्कि ये जानलेवा भी साबित हो रहे हैं। ऐसे में नाले ठके जाएं तो बात बने।
प्रदूषण पर लगे लगाम
वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। आबादी के बीच औद्योगिक इकाइयां होना भी इसका कारण है। इसके अलावा लोगों का जागरूक न होना और वाहनों की बढ़ती तादाद भी वजह है। एनजीटी और अन्य स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त आदेशों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, एक्यूआई काफी बढ़ा रहता है, जो लोगों को सांस का रोगी बना रहा है। ऐसे में विभागों के साथ-साथ लोग भी अपनी जिम्मेेदारी समझें और वायुमंडल के शुद्ध रखने की कार्ययोजना से कार्य करें।
वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। आबादी के बीच औद्योगिक इकाइयां होना भी इसका कारण है। इसके अलावा लोगों का जागरूक न होना और वाहनों की बढ़ती तादाद भी वजह है। एनजीटी और अन्य स्तर पर प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त आदेशों के बावजूद इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, एक्यूआई काफी बढ़ा रहता है, जो लोगों को सांस का रोगी बना रहा है। ऐसे में विभागों के साथ-साथ लोग भी अपनी जिम्मेेदारी समझें और वायुमंडल के शुद्ध रखने की कार्ययोजना से कार्य करें।