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Meerut News: रामलीला के मंचन में लक्ष्मण का किरदार निभाते थे दुष्यंत

Sun, 01 Sep 2024 01:52 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Sep 2024 01:52 AM IST
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Dushyant used to play the role of Laxman in the staging of Ramleela.
कवि रामधारी सिंह दिनकर के साथ दुष्यंत कुमार। फाइल फोटो
- साहित्यकार दुष्यंत कुमार की जयंती पर विशेष
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- अभिनय से लोगों का दिल जीत लेते थे साहित्यकार दुष्यंत कुमार








संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद(बिजनौर)। हिंदी के गजल के प्रेणता दुष्यंत कुमार महान साहित्यकार तो थे ही, उनके भीतर एक मंचीय कलाकार और आर्थिक रूप से कमजोरों के लिए हमदर्दी का जज्बा भी छिपा था। दशहरा से पूर्व दुष्यंत अपने गांव राजपुर नवादा आकर रामलीला मंचन में लक्ष्मण की भूमिका में सबका दिल जीत लेते थे।

नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 को जन्मे हिंदी गजल के प्रेणता दुष्यंत कुमार को उनके बालसखा 92 वर्षीय सत्य कुमार त्यागी भुला नहीं पाते। बाल सखा बताते हैं कि बाल्यकाल से ही दुष्यंत काव्य सृजन से जुड़े उनके काव्य में आम आदमी की पीड़ा शामिल रही। हिंदी गजल से उन्होंने दुनिया में अपना नाम रोशन किया।
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सत्य कुमार त्यागी कहते हैं कि दुष्यंत कुमार को रामलीला के मंचन में विशेष रूचि थी। दुष्यंत कुमार लक्ष्मण का जबरदस्त अभिनय किया करते थे। दशहरा से करीब दो सप्ताह पहले गांव आकर दुष्यंत ग्रामीणों को जोड़कर रामलीला का आयोजन करते थे। उनके भीतर अद्भुत कलाकार छिपा था। मधुर आवाज और स्वयं लक्ष्मण की भूमिका के सशक्त अभिनय के लिए दुष्यंत काफी लोकप्रिय थे।
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मंचीय कलाकारों और ग्रामीणों का हौसला बढ़ाते थे दुष्यंत

हरेवाली निवासी पूर्व प्रधान राकेश त्यागी कहते हैं कि जमींदार घराने से ताल्लुक रखने वाले साहित्यकार दुष्यंत के सीने में कलाकारों और ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के प्रति हमदर्दी का जज्बा था। रामलीला मंचन के दौरान कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी जेब से एक-दो रुपये आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों के जरिए रामलीला के मंचीय कलाकारों को दिलवाते थे।



अंजान लोगों से मिलवाती थी दुष्यंत की खटारा कार

खटारा कार और दुष्यंत कुमार का लंबा साथ रहा। दुष्यंत कुमार भोपाल से जब गांव आते तो खटारा कार से ही सफर करते थे। आते जाते रास्ते में अक्सर कार खराब होती थी तब उनके चेहरे पर शिकन नहीं होती थी। खटारा कार का लोग राज मालूम करते थे तो दुष्यंत यही कहा करते थे खटारा कार रास्ते में रुकने पर नए लोगों और कार मैकेनिकों से मुलाकात होती है। गपशप होती है, उनकी जिंदगी को जानने, नजदीक से समझने और उसे काव्य विधा में समेटने का मुझे मौका मिलता है।



दुष्यंत ने घर में बनाया था पुस्तकालय

दुष्यंत कुमार ने अपने घर के एक कमरे में पुस्तकालय की स्थापना की थी। गांव में अखबार, पत्रिकाएं आदि नहीं पहुंचते थे। दुष्यंत जब भी गांव आते अपने साथ पत्रिकाएं और अखबार लाते थे। ग्रामीणों को उन पत्र पत्रिकाओं को पढ़वाते थे और स्वयं भी पढ़ा करते थे। पुस्तकालय कक्ष खस्ताहाल हालत में है। पिता भगवत सहाय को लिखीं हस्त लिखित चिट्ठियां आज भी सुरक्षित बताई जातीं हैं।




जल्द पूरा होगा संग्रहालय का स्वप्न

शासन ने 5.63 करोड़ रुपये की लागत से पैतृक गांव राजपुर नवादा में दुष्यंत स्मृति भव्य संग्रहालय, पुस्तकालय आदि का निर्माण करने का बीड़ा उठाया है। साहित्य का दुष्यंत के पुत्रों आलोक त्यागी और कर्नल अपूर्व त्यागी ने संग्रहालय पुस्तकालय आदि निर्माण के लिए दुष्यंत कुमार की खंडहर नुमा हवेली हाल ही में सरकार के नाम की है।
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