{"_id":"5e3c7ace8ebc3ee5ad3b42fc","slug":"dont-afraid-being-hindi-linguestic-meerut-news-mrt4676392153","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंदी भाषी होने से घबराएं नहीं, योग्यत अनुसार भाषा चुनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंदी भाषी होने से घबराएं नहीं, योग्यत अनुसार भाषा चुनें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेरठ। देश में अंग्रेजी का वर्चस्व अंग्रेजी पढ़े अधिकारियों एवं नेताओं की वजह से बना रहा है। जिससे जनमानस में भारतीय भाषाओं के प्रति हीनभावना बनी रही। अंग्रेजी ज्ञान का आधार नहीं, भाषा मात्र है। दुर्भाग्य से यह भारत के शैक्षिक ढांचे में ज्ञान का आधार बन गई। इससे 80-90 फीसदी छात्रों को हानि हो रही है। वे अपनी योग्यता एवं प्रतिभा को अंग्रेजी के कारण अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं। यह विचार बृहस्पतिवार को सीसीएसयू के बृहस्पति भवन में युवा प्रतियोगी परीक्षाएं और सफलता की राह विषय पर अयोजित व्याख्यान में कु़लपति प्रो. एनके तनेजा ने रखा।
उन्होंने आईएएस निशांत जैन का उदाहरण देते हुए प्रेरणा दी कि वे हिंदी भाषी होने से घबराएं नहीं। जापान, मैक्सिको एवं फ्रांस अपनी भाषा में विज्ञान, आर्थिक जगत के क्षेत्र में स्थान बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में सिविल सेवा परीक्षा हिंदी माध्यम से प्रारंभ हुई। तभी से हिंदी भाषी प्रतियोगी भी परीक्षा में स्थान बना रहे हैं। उन्होंने छात्रों को स्वयं को पहचानकर वैज्ञानिक पद्धति से परिश्रम करने की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने निशांत जैन को स्मृति चिह्न भेंट किया।
सिविल सेवा परीक्षा 2014 में 13वीं रैंक और हिंदी माध्यम में प्रथम स्थान पाने वाले राजस्थान कैडर में वित्त विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत आईएएस निशांत जैन ने कहा कि छात्र इच्छाशक्ति एवं योग्यता के अनुसार ही भाषा का चयन करें। उन्होंने हिंदी प्रेम एवं हिंदी के प्रभाव के कई किस्से उन्होंने सुनाए। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सफलता के बीज मंत्र बताए। जिनमें अपनी लकीर बड़ी करो, मजबूरी को मजबूती बनाओ, घबराओ नहीं, हवा में न उड़ो (कल्पनाओं में न जिओ), सकारात्मक सोच व उत्साह से ही जीत होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं की सिविल सेवा परीक्षा संबंधी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। निशांत जैन ने प्रो. नवीन चंद्र लोहनी का उदाहरण देकर छात्रों को प्रेरणा दी कि वे अंग्रेजी-हिंदी की समस्या को सर्वोपरि न बनाएं। श्रोताओं को हिंदी के प्रति आशान्वित रहने का संदेश दिया। इस मौके पर कुलपति द्वारा निशांत जैन की पुस्तक रुक जाना नहीं का लोकार्पण किया गया। प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने सभी का आभार जताया।
विज्ञापन
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रो. वीरपाल सिंह, प्रो. असलम जमशेदपुरी, प्रो. शैलेंद्र गौरव, प्रो. शैलेंद्र शर्मा, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. राजीव सिजेरिया, डॉ. यज्ञेश कुमार, डॉ. आरती राणा, डॉ. अंजू, डॉ. विद्यासागर, डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. धनपाल, डॉ. रविप्रकाश, मनीष मिश्रा, शरद, मोहनी कुमार, मोहित कुमार, सचिन कुमार, सपना, अनिता, उपेंद्र कुमार, शिवा शर्मा, चेतना, ममता और अमित आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
उन्होंने आईएएस निशांत जैन का उदाहरण देते हुए प्रेरणा दी कि वे हिंदी भाषी होने से घबराएं नहीं। जापान, मैक्सिको एवं फ्रांस अपनी भाषा में विज्ञान, आर्थिक जगत के क्षेत्र में स्थान बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि 80 के दशक में सिविल सेवा परीक्षा हिंदी माध्यम से प्रारंभ हुई। तभी से हिंदी भाषी प्रतियोगी भी परीक्षा में स्थान बना रहे हैं। उन्होंने छात्रों को स्वयं को पहचानकर वैज्ञानिक पद्धति से परिश्रम करने की प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने निशांत जैन को स्मृति चिह्न भेंट किया।
विज्ञापन
सिविल सेवा परीक्षा 2014 में 13वीं रैंक और हिंदी माध्यम में प्रथम स्थान पाने वाले राजस्थान कैडर में वित्त विभाग में सचिव के पद पर कार्यरत आईएएस निशांत जैन ने कहा कि छात्र इच्छाशक्ति एवं योग्यता के अनुसार ही भाषा का चयन करें। उन्होंने हिंदी प्रेम एवं हिंदी के प्रभाव के कई किस्से उन्होंने सुनाए। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सफलता के बीज मंत्र बताए। जिनमें अपनी लकीर बड़ी करो, मजबूरी को मजबूती बनाओ, घबराओ नहीं, हवा में न उड़ो (कल्पनाओं में न जिओ), सकारात्मक सोच व उत्साह से ही जीत होगी। उन्होंने छात्र-छात्राओं की सिविल सेवा परीक्षा संबंधी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। निशांत जैन ने प्रो. नवीन चंद्र लोहनी का उदाहरण देकर छात्रों को प्रेरणा दी कि वे अंग्रेजी-हिंदी की समस्या को सर्वोपरि न बनाएं। श्रोताओं को हिंदी के प्रति आशान्वित रहने का संदेश दिया। इस मौके पर कुलपति द्वारा निशांत जैन की पुस्तक रुक जाना नहीं का लोकार्पण किया गया। प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने सभी का आभार जताया।
विज्ञापन
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रो. वीरपाल सिंह, प्रो. असलम जमशेदपुरी, प्रो. शैलेंद्र गौरव, प्रो. शैलेंद्र शर्मा, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. राजीव सिजेरिया, डॉ. यज्ञेश कुमार, डॉ. आरती राणा, डॉ. अंजू, डॉ. विद्यासागर, डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. धनपाल, डॉ. रविप्रकाश, मनीष मिश्रा, शरद, मोहनी कुमार, मोहित कुमार, सचिन कुमार, सपना, अनिता, उपेंद्र कुमार, शिवा शर्मा, चेतना, ममता और अमित आदि मौजूद रहे।