गंगा में डाॅल्फिन की गिनती शुरू, दूसरे दिन भी अठखेलियां करती आईं नजर, हस्तिनापुर क्षेत्र में चला अभियान
- हस्तिनापुर क्षेत्र के सिर्जोपुर से कुंडा गांव तक चला अभियान
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मेरठ के हस्तिनापुर में डॉल्फिन के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए डब्लूडब्लूएफ और वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से मेरी डॉल्फिन मेरी सूंस अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दूसरे दिन गांव सिर्जोपुर से डॉल्फिन की गणना की गई। 25 किलोमीटर दूर कुंडा गांव तक अभियान चलाया गया।
मंगलवार को वन विभाग के रेंजर नवरत्न सिंह, संसार सिंह, डब्लूडब्लूएफ के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी संजीव यादव, अभियान के कोऑर्डिनेटर शाहनवाज खान आदि ने दो बोट पर सवार होकर डॉल्फिन की गणना की। संजीव यादव ने बताया कि 11 अक्टूबर को डॉल्फिन की गणना के आंकड़े स्पष्ट हो पाएंगे।
अभियान बिजनौर बैराज से नरोरा बैराज तक चलाया जा रहा है। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन विलुप्त होती जा रही है। यह आईयूसीएन की लुप्त प्राय जीवों की सूची में शामिल है। इसलिए प्रतिवर्ष इनकी गणना की जाती है। मार्च से अक्टूबर तक डॉल्फिन का प्रजनन का समय रहता है। इस दौरान वन विभाग और डब्लूडब्लूएफ के अधिकारी इनकी खास निगरानी रखते हैं।
डॉल्फिन की गणना के साथ-साथ वन विभाग और डब्लूडब्लूूएफ की टीमें गंगा किनारे के गांवों में डॉल्फिन को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाएंगे ताकि ग्रामीण भी मेरी डॉल्फिन मेरी सूंस अभियान का हिस्सा बन सकें।
सोमवार को इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रीय स्वच्छता गंगा मिशन अभियान के निदेशक जनरल राजीव रंजन मिश्रा के नेतृत्व में हैदपुर बैराज से डॉल्फिन गणना की शुरुआत की गई। इस मौके पर गंगा में संकटग्रस्त प्रजाति के 30 कछुओं को छोड़ा गया।