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झोलाछाप सेल में ‘नोटों की छपाई’
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 10 Jan 2016 02:17 AM IST
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संचालित होने वाली एंटी क्वेकरी सेल (झोलाछाप विंग) जमकर वसूली के काम में लगी है। 10 हजार से लेकर 30 हजार रुपये सीजन के हिसाब से वसूले जा रहे हैं और शिकायतों के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है। विंग के ड्राइवर से लेकर चिकित्सक तक वसूली में लिप्त हैं। फोन रिकार्डिंग के आधार पर सामने आए ऑडियो स्टिंग से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह ऑडियो अमर उजाला के पास उपलब्ध है।
ऑडियो रिकार्डिंग में झोलाछाप विंग के नोडल ऑफिसर वीके गुप्ता साफ कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि रामराज के झोलाछाप चिकित्सक शाहिद पर एफआईआर दर्ज कराने वाला था, लेकिन सीएमओ ने मना कर दिया। इसी तरह झोलाछाप सेल का बाबू राजन भी वसूली के गेम में लिप्त है। ऑडियो रिकार्डिंग में उसके द्वारा भी 30 हजार रुपये लेने की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग का एक ड्राइवर भी वसूली में लगा है, जिसका नाम सामने आया है। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) की तरफ से किए गए ऑडियो स्टिंग में झोलाछाप विंग के खेल का पर्दाफाश हो रहा है। उधर, सारे मामले पर सीएमओ की प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, न ही कॉल बैक की।
- मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। सारे मामले की जांच होनी चाहिये। डॉ. विनय झोलाछाप है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - राजन, बाबू स्वास्थ्य विभाग
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- शाहिद पर कार्रवाई की जानी है, लेकिन सीएमओ साहब ने कहा कि अभी रुक जाओ तो इसलिए अभी तक उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। बाकी सारे मामले में मुझे गलत फंसाया जा रहा है।
- डॉ. वीके गुप्ता, नोडल ऑफिसर झोलाछाप विंग
ऑडियो रिकॉर्डिंग -1
(नीमा के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र की झोलाछाप सेल के नोडल अधिकारी डॉ. वीके गुप्ता से बातचीत)
डा. नागेंद्र : आपने शिकायत के बाद भी झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई नहीं की है।
डॉ. गुप्ता : सर पांच लोगों को नोटिस दिया था, लेकिन जवाब नहीं आया, वो शाहिद भी आया था। मैंने उसे साफ कह दिया कि बेटा जेल जाने की तैयारी कर लो। पांच दिन पहले रामराज भी गया था, तब भी उससे साफ कह दिया था। लेकिन जिस दिन राज्यपाल आए, उसी दिन सीएमओ साहब का फोन आया कि यार सपा के कुछ नेताओं का फोन आ रहा है, ये शाहिद का क्या मसला है? मैंने बताया कि वो झोलाछाप है और फर्जी तरीके से प्रैक्टिस कर रहा है, जिस पर उन्होंने कहा कि अब रहने दो। अब सर बिना सीएमओ साहब की मंजूरी के तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
ऑडियो रिकॉर्डिंग -2
(नीमा सदस्य की पूठी, किला परीक्षितगढ़ स्थित झोलाछाप डॉ. विनय से बातचीत)
नीमा सदस्य : यार वो सीएमओ कार्यालय से सर्टिफिकेट सत्यापित होने की क्या बात चल रही है।
डॉ. विनय : मेरे पास डिप्लोमा इन फिजियोथैरेपी (डीपीटी) है, जिसे सीएमओ ऑफिस में तैनात बाबू राजन ने 30 हजार रुपये लेकर सत्यापित कराने की बात कही है। उसने कहा है कि सत्यापन के बाद डीपीटी पर ही एलोपैथी की प्रैक्टिस कर सकते हो।
ऑडियो रिकार्डिंग - 3
(नीमा अध्यक्ष डा. नागेंद्र की बाबू राजन से बातचीत)
डा. नागेंद्र : आप लोग अवैध तरीके से झोलाछाप चिकित्सकों को बढ़ावा दे रहे हैं। फिजियोथैरेपी का डिप्लोमा लेकर प्रैक्टिस करने वाले डॉ. विनय को किस आधार पर लीगल परमिशन दे रहे हो और तुम पर 30 हजार रुपये लेने का भी आरोप लग रहा है।
राजन : सारे आरोप निराधार हैं। किसी से कोई पैसा नहीं मांगा है। चाहे तो आप उसे अभी बुला लो। काफी लोगों को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन जवाब नहीं आया है। अब जब जवाब आएगा, तभी तो कार्रवाई होगी।
400 नोटिस, एफआईआर जीरो
मेरठ। अप्रैल से लेकर दिसंबर 2015 तक जिले के करीब 400 झोलाछाप चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन किसी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। अमर उजाला ने जब भी स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी, तो बीते पांच सालों की एफआईआर जोड़कर बताई जाती रही। विभाग ने सही आंकड़े कभी नहीं दिए। इससे साफ हो जाता है कि सारा सिस्टम वसूली की लाइन पर काम कर रहा है।
यहां नोटिस जारी कर एक-एक को निशाना बनाया जा रहा है। सेटिंग का गेम कुछ इस तरह का है कि जिन लोगों के खिलाफ दो-चार साल पहले झोलाछाप के तौर पर प्रैक्टिस करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, वे अब दोबारा क्लीनिक खोल कर बैठे हैं। जबकि अगर कोई व्यक्ति एफआईआर दर्ज होने के बाद भी प्रैक्टिस करता है, तो उसे जमानत भी नहीं मिल सकती। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र और कस्बों में झोलाछाप अधिक सक्रिय हैं। उधर, अब स्वास्थ्य विभाग दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहा है, लेकिन वे कौन है, उनका नाम बताने को तैयार नहीं है।
एक कारण ये भी
झोलाछाप डॉक्टर गांव-देहात और कस्बों में ही अधिक सक्रिय होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गांव-देहात में प्रैक्टिस करने में डॉक्टरों की रुचि कम ही होती है। ऐसे में स्थानीय लोगों को मजबूरी में झोलाछाप पर ही निर्भर रहता पड़ता है। इसके अलावा झोलाछाप की फीस भी कम होती है, या वे फीस लेते ही नहीं। अपने पास से दवा देकर उसके पैसे ले लेते हैं। ऐसे में गांव की गरीब जनता के लिए वे मुफीद साबित होते हैं।
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ऑडियो रिकार्डिंग में झोलाछाप विंग के नोडल ऑफिसर वीके गुप्ता साफ कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि रामराज के झोलाछाप चिकित्सक शाहिद पर एफआईआर दर्ज कराने वाला था, लेकिन सीएमओ ने मना कर दिया। इसी तरह झोलाछाप सेल का बाबू राजन भी वसूली के गेम में लिप्त है। ऑडियो रिकार्डिंग में उसके द्वारा भी 30 हजार रुपये लेने की बात सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग का एक ड्राइवर भी वसूली में लगा है, जिसका नाम सामने आया है। नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) की तरफ से किए गए ऑडियो स्टिंग में झोलाछाप विंग के खेल का पर्दाफाश हो रहा है। उधर, सारे मामले पर सीएमओ की प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, न ही कॉल बैक की।
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- मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। सारे मामले की जांच होनी चाहिये। डॉ. विनय झोलाछाप है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - राजन, बाबू स्वास्थ्य विभाग
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- शाहिद पर कार्रवाई की जानी है, लेकिन सीएमओ साहब ने कहा कि अभी रुक जाओ तो इसलिए अभी तक उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। बाकी सारे मामले में मुझे गलत फंसाया जा रहा है।
- डॉ. वीके गुप्ता, नोडल ऑफिसर झोलाछाप विंग
ऑडियो रिकॉर्डिंग -1
(नीमा के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र की झोलाछाप सेल के नोडल अधिकारी डॉ. वीके गुप्ता से बातचीत)
डा. नागेंद्र : आपने शिकायत के बाद भी झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई नहीं की है।
डॉ. गुप्ता : सर पांच लोगों को नोटिस दिया था, लेकिन जवाब नहीं आया, वो शाहिद भी आया था। मैंने उसे साफ कह दिया कि बेटा जेल जाने की तैयारी कर लो। पांच दिन पहले रामराज भी गया था, तब भी उससे साफ कह दिया था। लेकिन जिस दिन राज्यपाल आए, उसी दिन सीएमओ साहब का फोन आया कि यार सपा के कुछ नेताओं का फोन आ रहा है, ये शाहिद का क्या मसला है? मैंने बताया कि वो झोलाछाप है और फर्जी तरीके से प्रैक्टिस कर रहा है, जिस पर उन्होंने कहा कि अब रहने दो। अब सर बिना सीएमओ साहब की मंजूरी के तो मैं कुछ नहीं कर सकता।
ऑडियो रिकॉर्डिंग -2
(नीमा सदस्य की पूठी, किला परीक्षितगढ़ स्थित झोलाछाप डॉ. विनय से बातचीत)
नीमा सदस्य : यार वो सीएमओ कार्यालय से सर्टिफिकेट सत्यापित होने की क्या बात चल रही है।
डॉ. विनय : मेरे पास डिप्लोमा इन फिजियोथैरेपी (डीपीटी) है, जिसे सीएमओ ऑफिस में तैनात बाबू राजन ने 30 हजार रुपये लेकर सत्यापित कराने की बात कही है। उसने कहा है कि सत्यापन के बाद डीपीटी पर ही एलोपैथी की प्रैक्टिस कर सकते हो।
ऑडियो रिकार्डिंग - 3
(नीमा अध्यक्ष डा. नागेंद्र की बाबू राजन से बातचीत)
डा. नागेंद्र : आप लोग अवैध तरीके से झोलाछाप चिकित्सकों को बढ़ावा दे रहे हैं। फिजियोथैरेपी का डिप्लोमा लेकर प्रैक्टिस करने वाले डॉ. विनय को किस आधार पर लीगल परमिशन दे रहे हो और तुम पर 30 हजार रुपये लेने का भी आरोप लग रहा है।
राजन : सारे आरोप निराधार हैं। किसी से कोई पैसा नहीं मांगा है। चाहे तो आप उसे अभी बुला लो। काफी लोगों को नोटिस दिए गए हैं, लेकिन जवाब नहीं आया है। अब जब जवाब आएगा, तभी तो कार्रवाई होगी।
400 नोटिस, एफआईआर जीरो
मेरठ। अप्रैल से लेकर दिसंबर 2015 तक जिले के करीब 400 झोलाछाप चिकित्सकों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन किसी के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। अमर उजाला ने जब भी स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी, तो बीते पांच सालों की एफआईआर जोड़कर बताई जाती रही। विभाग ने सही आंकड़े कभी नहीं दिए। इससे साफ हो जाता है कि सारा सिस्टम वसूली की लाइन पर काम कर रहा है।
यहां नोटिस जारी कर एक-एक को निशाना बनाया जा रहा है। सेटिंग का गेम कुछ इस तरह का है कि जिन लोगों के खिलाफ दो-चार साल पहले झोलाछाप के तौर पर प्रैक्टिस करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, वे अब दोबारा क्लीनिक खोल कर बैठे हैं। जबकि अगर कोई व्यक्ति एफआईआर दर्ज होने के बाद भी प्रैक्टिस करता है, तो उसे जमानत भी नहीं मिल सकती। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र और कस्बों में झोलाछाप अधिक सक्रिय हैं। उधर, अब स्वास्थ्य विभाग दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहा है, लेकिन वे कौन है, उनका नाम बताने को तैयार नहीं है।
एक कारण ये भी
झोलाछाप डॉक्टर गांव-देहात और कस्बों में ही अधिक सक्रिय होते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गांव-देहात में प्रैक्टिस करने में डॉक्टरों की रुचि कम ही होती है। ऐसे में स्थानीय लोगों को मजबूरी में झोलाछाप पर ही निर्भर रहता पड़ता है। इसके अलावा झोलाछाप की फीस भी कम होती है, या वे फीस लेते ही नहीं। अपने पास से दवा देकर उसके पैसे ले लेते हैं। ऐसे में गांव की गरीब जनता के लिए वे मुफीद साबित होते हैं।