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दो हजार शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 19 Aug 2016 02:19 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में करीब दो हजार शस्त्र लाइसेंस निरस्त हो सकते हैं। शासन से आई नई गाइड लाइन के अनुसार ऐसे शस्त्र लाइसेंस धारकों ने समय से अपने लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराए हैं। जिस कारण इन्हें यूनिक आईडी नंबर प्रदान नहीं किया गया है।
भारत सरकार ने पूरे देश के शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड एक ही साइट पर एकत्र करने के लिए यूनिक आईडी नंबर जारी करने का कार्यक्रम शुरू किया था। इन नंबरों के साइट पर डालते ही शस्त्र लाइसेंस धारक का पूरा डाटा सामने आ जाएगा। इस यूनिक आईडी नंबर के लिए पहले शासन ने जो गाइड लाइन जारी की थी, उसके अनुसार जिनके शस्त्र लाइसेंस 31 दिसंबर 2015 तक नवीनीकरण हुए थे, उन्हें जारी करना था। लेकिन इसके बाद जब देखा कि हजारों शस्त्र लाइसेंसधारक इससे बाहर हो रहे हैं, तो इसकी सीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई। जिनके लाइसेंस इस तिथि तक नवीनीकृत थे, उन्हें यूनिक आइडी नंबर जारी कर दिए गए।
जिले में करीब 17 हजार शस्त्र लाइसेंस धारकों का अंतिम आंकड़ा सामने आया था। हालांकि मेरठ में शस्त्र लाइसेंस इससे कहीं ज्यादा बने हैं। लेकिन समय-समय पर ये लाइसेंस या तो यहां से ट्रांसफर हो गए या फिर लाइसेंस धारक वर्तमान में जिस जनपद में रह रहे हैं, वहां से उन्होंने नवीनीकरण करा लिया। ऐसे में नवीनीकरण के आधार पर इनकी संख्या निकलकर करीब 17 हजार आई। शस्त्र अनुभाग ने अपने यहां से बने शस्त्र लाइसेंस और पिछली बार नवीनीकरण कराने वालों का जो अंतिम आंकड़ा निकाला है, वह 19 हजार के आसपास है। लेकिन यूनिक आईडी नंबर करीब 17 हजार को ही जारी हुआ है। जिस कारण ये दो हजार शस्त्र लाइसेंसों की निरस्तीकरण की रिपोर्ट तैयार हो रही है।
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न नवीनीकरण न शस्त्र
जनपद में दर्जनों ऐसे शस्त्र लाइसेंसधारक भी जांच में सामने आये हैं, जिन्होंने 10-15 साल पहले शस्त्र लाइसेंस तो ले लिये। लेकिन न तो उन पर शस्त्र खरीदा और न ही नवीनीकरण कराया। ऐसे शस्त्र लाइसेंस भी स्वत: निरस्तीकरण में चले गये हैं।
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भारत सरकार ने पूरे देश के शस्त्र लाइसेंसों का रिकॉर्ड एक ही साइट पर एकत्र करने के लिए यूनिक आईडी नंबर जारी करने का कार्यक्रम शुरू किया था। इन नंबरों के साइट पर डालते ही शस्त्र लाइसेंस धारक का पूरा डाटा सामने आ जाएगा। इस यूनिक आईडी नंबर के लिए पहले शासन ने जो गाइड लाइन जारी की थी, उसके अनुसार जिनके शस्त्र लाइसेंस 31 दिसंबर 2015 तक नवीनीकरण हुए थे, उन्हें जारी करना था। लेकिन इसके बाद जब देखा कि हजारों शस्त्र लाइसेंसधारक इससे बाहर हो रहे हैं, तो इसकी सीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई। जिनके लाइसेंस इस तिथि तक नवीनीकृत थे, उन्हें यूनिक आइडी नंबर जारी कर दिए गए।
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जिले में करीब 17 हजार शस्त्र लाइसेंस धारकों का अंतिम आंकड़ा सामने आया था। हालांकि मेरठ में शस्त्र लाइसेंस इससे कहीं ज्यादा बने हैं। लेकिन समय-समय पर ये लाइसेंस या तो यहां से ट्रांसफर हो गए या फिर लाइसेंस धारक वर्तमान में जिस जनपद में रह रहे हैं, वहां से उन्होंने नवीनीकरण करा लिया। ऐसे में नवीनीकरण के आधार पर इनकी संख्या निकलकर करीब 17 हजार आई। शस्त्र अनुभाग ने अपने यहां से बने शस्त्र लाइसेंस और पिछली बार नवीनीकरण कराने वालों का जो अंतिम आंकड़ा निकाला है, वह 19 हजार के आसपास है। लेकिन यूनिक आईडी नंबर करीब 17 हजार को ही जारी हुआ है। जिस कारण ये दो हजार शस्त्र लाइसेंसों की निरस्तीकरण की रिपोर्ट तैयार हो रही है।
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न नवीनीकरण न शस्त्र
जनपद में दर्जनों ऐसे शस्त्र लाइसेंसधारक भी जांच में सामने आये हैं, जिन्होंने 10-15 साल पहले शस्त्र लाइसेंस तो ले लिये। लेकिन न तो उन पर शस्त्र खरीदा और न ही नवीनीकरण कराया। ऐसे शस्त्र लाइसेंस भी स्वत: निरस्तीकरण में चले गये हैं।