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32 साल में पहली बार नहीं आएगी डीजे कांवड़
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32 साल में पहली बार नहीं आएगी डीजे कांवड़
मेरठ। नीलकंठ पर चढ़के पी गया एक बालटी भांग, भोला नू मटके... किस्मत वाले होते हैं जो कांवड़ लाते हैं... जैसे गीतों के साथ केसरिया सैलाब को देखने से इस बार शहर की जनता वंचित रहेगी। टोल प्लाजा पर इस बार डीजे के बीच प्रतियोगिता भी नहीं होगी। ऐसा इसीलिए क्योंकि कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए इस बार कांवड़ यात्रा रद्द है। ऐसे में खड़ी कांवड़, झूला कांवड़, डाक कांवड़ के साथ डीजे कांवड़ लाने वाले हजारों शिव भक्त भी निराश हैं।
55 लोगों की टीम लाती थी डीजे कांवड़
बागपत गेट भोला शंकर शिव मंदिर से प्रतिवर्ष महाकाल सेवा समिति विशाल डीजे कांवड़ लाती थी। 32 साल में यह पहला मौका है जब कांवड़ नहीं आएगी। समिति से जुड़े अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि शिवरात्रि से दस दिन पूर्व 55 लोगों की टीम डीजे और कांवड़ लेकर निकल जाती थी। इसकी तैयारी एक माह पूर्व ही हो जाती थी। अभिषेक ने बताया कि इस बार पंचमुखी शेर वाली कांवड़ लाने की तैयारी थी, लेकिन मौका नहीं मिला है।
समय के साथ बदला कांवड़ का स्वरूप
ऊं शिव महाकाल सेवा समिति से जुड़े सतीश राजपूत और राजकुमार लोधी ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ 2001 से नियमित रुप से कांवड़ ला रहे हैं। हालांकि इससे पूर्व भी डीजे कांवड़ ठेले पर आती थी, लेकिन कांवड़ का साइज भी समय के साथ बदलता चला गया है। अब मोर पंख की 22 फुटी कांवड़, भगवान शिव, महाकाल, पंचमुखी शेर वाली विशाल कांवड़ बनाई जाने लगी हैं। लेकिन इस बार सब तैयारी धरी रह गई।
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सात दिन में पूरी होती थी यात्रा
विशाल शर्मा और अर्पिल कंसल ने बताया कि हरिद्वार में कनखल में कांवड़ को सजाया जाता था। हर की पौड़ी से जल लाकर कांवड़ में रखा जाता था। यात्रा में पहला स्टॉपेज रुड़की होता था। इसके बाद पुजकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली और सकौती के बाद मेरठ टीम दो दिन पूर्व पहुंच जाती थी। हरिद्वार से मेरठ तक की यात्रा सात दिन में पूरी की जाती थी।
टोल प्लाजा पर होता था डीजे कंप्टीशन
पूर्व में बागपग गेट शिव मंदिर और बाबा औघड़नाथ मंदिर के पास बड़ी कांवड़ इकट्ठा होती थी जहां उन्हें इनाम दिए जाते थे। अब टोल प्लाजा पर लगभग 4 साल से डीजे प्रतियोगिता होती है। इसमें मेरठ के डीजे कसाना, अमर, हरीश, मित्रा आदि डीजे प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। इस बार लोग इस प्रतियोगिता से वंचित रहेंगे।
श्रावण सोमवार में नहीं मंदिर जाने की अनुमति
नियमति रुप से कांवड़ लाने वाले अर्पित कंसल और पंडित रोशन का कहना है कि श्रावण मास में भक्तों को मंदिर में जलाभिषेक की अनुमति देनी चाहिए। प्रदेश में अन्य जिलों में भक्तों के लिए मंदिर खुले हैं। सिर्फ मेरठ में ही प्रदेश और देश से अलग नियम लागू किया गया है
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मेरठ। नीलकंठ पर चढ़के पी गया एक बालटी भांग, भोला नू मटके... किस्मत वाले होते हैं जो कांवड़ लाते हैं... जैसे गीतों के साथ केसरिया सैलाब को देखने से इस बार शहर की जनता वंचित रहेगी। टोल प्लाजा पर इस बार डीजे के बीच प्रतियोगिता भी नहीं होगी। ऐसा इसीलिए क्योंकि कोरोना महामारी के खतरे को देखते हुए इस बार कांवड़ यात्रा रद्द है। ऐसे में खड़ी कांवड़, झूला कांवड़, डाक कांवड़ के साथ डीजे कांवड़ लाने वाले हजारों शिव भक्त भी निराश हैं।
55 लोगों की टीम लाती थी डीजे कांवड़
बागपत गेट भोला शंकर शिव मंदिर से प्रतिवर्ष महाकाल सेवा समिति विशाल डीजे कांवड़ लाती थी। 32 साल में यह पहला मौका है जब कांवड़ नहीं आएगी। समिति से जुड़े अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि शिवरात्रि से दस दिन पूर्व 55 लोगों की टीम डीजे और कांवड़ लेकर निकल जाती थी। इसकी तैयारी एक माह पूर्व ही हो जाती थी। अभिषेक ने बताया कि इस बार पंचमुखी शेर वाली कांवड़ लाने की तैयारी थी, लेकिन मौका नहीं मिला है।
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समय के साथ बदला कांवड़ का स्वरूप
ऊं शिव महाकाल सेवा समिति से जुड़े सतीश राजपूत और राजकुमार लोधी ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ 2001 से नियमित रुप से कांवड़ ला रहे हैं। हालांकि इससे पूर्व भी डीजे कांवड़ ठेले पर आती थी, लेकिन कांवड़ का साइज भी समय के साथ बदलता चला गया है। अब मोर पंख की 22 फुटी कांवड़, भगवान शिव, महाकाल, पंचमुखी शेर वाली विशाल कांवड़ बनाई जाने लगी हैं। लेकिन इस बार सब तैयारी धरी रह गई।
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सात दिन में पूरी होती थी यात्रा
विशाल शर्मा और अर्पिल कंसल ने बताया कि हरिद्वार में कनखल में कांवड़ को सजाया जाता था। हर की पौड़ी से जल लाकर कांवड़ में रखा जाता था। यात्रा में पहला स्टॉपेज रुड़की होता था। इसके बाद पुजकाजी, मुजफ्फरनगर, खतौली और सकौती के बाद मेरठ टीम दो दिन पूर्व पहुंच जाती थी। हरिद्वार से मेरठ तक की यात्रा सात दिन में पूरी की जाती थी।
टोल प्लाजा पर होता था डीजे कंप्टीशन
पूर्व में बागपग गेट शिव मंदिर और बाबा औघड़नाथ मंदिर के पास बड़ी कांवड़ इकट्ठा होती थी जहां उन्हें इनाम दिए जाते थे। अब टोल प्लाजा पर लगभग 4 साल से डीजे प्रतियोगिता होती है। इसमें मेरठ के डीजे कसाना, अमर, हरीश, मित्रा आदि डीजे प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। इस बार लोग इस प्रतियोगिता से वंचित रहेंगे।
श्रावण सोमवार में नहीं मंदिर जाने की अनुमति
नियमति रुप से कांवड़ लाने वाले अर्पित कंसल और पंडित रोशन का कहना है कि श्रावण मास में भक्तों को मंदिर में जलाभिषेक की अनुमति देनी चाहिए। प्रदेश में अन्य जिलों में भक्तों के लिए मंदिर खुले हैं। सिर्फ मेरठ में ही प्रदेश और देश से अलग नियम लागू किया गया है