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नए गृहकर के लिए स्वकर निर्धारण प्रपत्र वितरित करना भी चुनौती
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मेरठ। गृहकर जमा करने को लेकर भवन स्वामी असमंजस में हैं। निगम स्पष्ट नहीं कर पा रहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर नया गृहकर लेंगे या फिर पुराने बिल पर ही वसूली होगी। 10 महीने में निगम दो-तीन बार अपने नियम बदल चुका हैं। महापौर कहते हैं कि नया गृहकर लेने से पहले स्वकर निर्धारण प्रपत्र भवन स्वामियों से भरा जाएगा, जबकि निगम अपनी मनमानी करने पर लगा हुआ हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे ने महानगर में 4.49 लाख भवन चिह्नित किए हैं। इसमें निगम की जांच में करीब एक लाख भवन नहीं मिले, इसको लेकर करीब 3.50 लाख ही भवनों से नए गृहकर की वसूली करने की योजना बनाई गई। शहर में नए बिल वितरित करने शुरू किए गए, जिसमें दस गुना ज्यादा गृहकर बढ़ा देखकर भवन स्वामियों ने विरोध भी कर दिया था। भाजपा नेता, पार्षद, व्यापारी और आमजन में नए गृहकर की वसूली को लेकर सवाल उठने लगे, इसको देखते महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने पांच दिन पहले बिल वितरित करने पर रोक लगा दी। महापौर ने निगम अफसरों को निर्देश दिए कि डोर-टू-डोर स्वकर निर्धारण प्रपत्र वितरित कराएं। भवन स्वामियों को संतुष्ट कीजिए, उसके बाद ही वसूली होगी। निगम ने स्वकर प्रपत्र वितरित करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी के साथ अनुबंध करने का दावा किया। इसको लेकर भी निगम के सामने चुनौती बना हुआ है। भाजपा पार्षदों का कहना है कि जीआईएस सर्वे का भौतिक सत्यापन होना चाहिए था, जोकि निगम ने नहीं किया। प्राइवेट कंपनी द्वारा स्वकर प्रपत्र बांट सकते है, लेकिन भवन स्वामियों का गृहकर कैसे कम कर पाएंगे। यह निगम के सामने चुनौती बनेगा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि प्राइवेट कंपनी के साथ निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। भवन स्वामियों को समझाएंगे और गृहकर की वसूली भी कराएंगे।
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भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे ने महानगर में 4.49 लाख भवन चिह्नित किए हैं। इसमें निगम की जांच में करीब एक लाख भवन नहीं मिले, इसको लेकर करीब 3.50 लाख ही भवनों से नए गृहकर की वसूली करने की योजना बनाई गई। शहर में नए बिल वितरित करने शुरू किए गए, जिसमें दस गुना ज्यादा गृहकर बढ़ा देखकर भवन स्वामियों ने विरोध भी कर दिया था। भाजपा नेता, पार्षद, व्यापारी और आमजन में नए गृहकर की वसूली को लेकर सवाल उठने लगे, इसको देखते महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने पांच दिन पहले बिल वितरित करने पर रोक लगा दी। महापौर ने निगम अफसरों को निर्देश दिए कि डोर-टू-डोर स्वकर निर्धारण प्रपत्र वितरित कराएं। भवन स्वामियों को संतुष्ट कीजिए, उसके बाद ही वसूली होगी। निगम ने स्वकर प्रपत्र वितरित करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी के साथ अनुबंध करने का दावा किया। इसको लेकर भी निगम के सामने चुनौती बना हुआ है। भाजपा पार्षदों का कहना है कि जीआईएस सर्वे का भौतिक सत्यापन होना चाहिए था, जोकि निगम ने नहीं किया। प्राइवेट कंपनी द्वारा स्वकर प्रपत्र बांट सकते है, लेकिन भवन स्वामियों का गृहकर कैसे कम कर पाएंगे। यह निगम के सामने चुनौती बनेगा। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि प्राइवेट कंपनी के साथ निगम के अधिकारी और कर्मचारी भी तैनात रहेंगे। भवन स्वामियों को समझाएंगे और गृहकर की वसूली भी कराएंगे।
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