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Meerut News: कैली गांव में खेल मैदान भूमि पर कब्जे का विवाद गहराया
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खरखौदा के गांव कैली स्थित गांधी सताब्दी स्मारक इंटर कॉलेज का फोटो(सोशलमीडिया)
- ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से की निष्पक्ष जांच व कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गांव कैली में सड़क किनारे स्थित करोड़ों रुपये की भूमि पर विवाद गहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांधी शताब्दी स्मारक इंटर कॉलेज के खेल मैदान वाली भूमि कब्जाने की कोशिश हो रही है। यह मामला अभी भी राजस्व परिषद में विचाराधीन है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और विवादित पट्टा निरस्त करने की मांग की।
मंगलवार को ग्राम प्रधान बिजेंद्र के नेतृत्व में ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई न होने पर खेल मैदान पर स्थायी कब्जा हो सकता है। वर्ष 1965 में नायब तहसीलदार ने कथित रूप से ग्राम पंचायत भूमि अपने पुत्र के नाम पट्टा कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पट्टा नियमों के विपरीत और धोखाधड़ी से हुआ था। गांव के लोगों ने उस समय इस आवंटन का न्यायालय में विरोध किया था। वर्ष 1974 में यह पट्टा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी मामला विभिन्न स्तरों पर चलता रहा।
मूल पट्टाधारक विजय गोयल की मृत्यु के बाद भूमि उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पट्टे वाली भूमि सड़क से पीछे थी, जबकि वर्तमान विवाद सड़क किनारे की भूमि पर है। यह भूमि वर्षों से कॉलेज के खेल मैदान के रूप में उपयोग हो रही है। संबंधित पक्षों ने प्रशासनिक मिलीभगत से विवादित भूमि की रजिस्ट्री झारखंड निवासी विक्रम प्रताप सिंह के नाम कराई। रजिस्ट्री के बाद बिना सार्वजनिक जानकारी के दाखिल-खारिज भी पूरी कर ली गई।
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ग्रामीणों का विरोध और चेतावनी
ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंगलवार को कुछ लोग विवादित भूमि पर कब्जा लेने पहुंचे। ग्रामीणों के विरोध के बाद कब्जा करने आए लोग वहां से लौट गए। प्रधान पति बिजेंद्र, ओमकार त्यागी और जनेश्वर त्यागी समेत कई ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गांव कैली में सड़क किनारे स्थित करोड़ों रुपये की भूमि पर विवाद गहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांधी शताब्दी स्मारक इंटर कॉलेज के खेल मैदान वाली भूमि कब्जाने की कोशिश हो रही है। यह मामला अभी भी राजस्व परिषद में विचाराधीन है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और विवादित पट्टा निरस्त करने की मांग की।
मंगलवार को ग्राम प्रधान बिजेंद्र के नेतृत्व में ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई न होने पर खेल मैदान पर स्थायी कब्जा हो सकता है। वर्ष 1965 में नायब तहसीलदार ने कथित रूप से ग्राम पंचायत भूमि अपने पुत्र के नाम पट्टा कराई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पट्टा नियमों के विपरीत और धोखाधड़ी से हुआ था। गांव के लोगों ने उस समय इस आवंटन का न्यायालय में विरोध किया था। वर्ष 1974 में यह पट्टा निरस्त कर दिया गया। इसके बाद भी मामला विभिन्न स्तरों पर चलता रहा।
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मूल पट्टाधारक विजय गोयल की मृत्यु के बाद भूमि उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पट्टे वाली भूमि सड़क से पीछे थी, जबकि वर्तमान विवाद सड़क किनारे की भूमि पर है। यह भूमि वर्षों से कॉलेज के खेल मैदान के रूप में उपयोग हो रही है। संबंधित पक्षों ने प्रशासनिक मिलीभगत से विवादित भूमि की रजिस्ट्री झारखंड निवासी विक्रम प्रताप सिंह के नाम कराई। रजिस्ट्री के बाद बिना सार्वजनिक जानकारी के दाखिल-खारिज भी पूरी कर ली गई।
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ग्रामीणों का विरोध और चेतावनी
ग्रामीणों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। मंगलवार को कुछ लोग विवादित भूमि पर कब्जा लेने पहुंचे। ग्रामीणों के विरोध के बाद कब्जा करने आए लोग वहां से लौट गए। प्रधान पति बिजेंद्र, ओमकार त्यागी और जनेश्वर त्यागी समेत कई ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।