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धाराओं के खेल में फंसी जागृति विहार एक्सटेंशन की लगभग 400 एकड़ जमीन

Thu, 29 Dec 2016 11:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 29 Dec 2016 11:07 AM IST
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game caught in currents approximately 400 acres of awakening Vihar Extension
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

धाराओं के खेल में जागृति विहार एक्सटेंशन की लगभग 400 एकड़ जमीन फंस गई है। एक तरफ विशेष भू अध्यापित अधिकारी ने आवास विकास अधिकारियों से कहा है कि वर्तमान अधिग्रहण प्रक्रिया इस पर लागू हो सकती है, तो आवास विकास ने इससे इंकार कर दिया है। उधर, बिजलीघर को दिए गए एक रास्ते का लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिजलीघर निर्माण पर यह रास्ता बंद कर दिया गया है।

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यह है प्रकरण
आवास विकास परिषद ने वर्ष 2002 में जागृति विहार एक्सटेंशन के लिए काजीपुर, घोसीपुर, सरायकाजी आदि गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया था। 265 हेक्टेयर की यह पूरी योजना है। इस योजना के प्रथम फेज में करीब 171 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। सेकेंड फेज में 94 हेक्टेयर जमीन का और अधिग्रहण कर लिया गया। इस बाबत किसानों से करार हुए तो घोसीपुर निवासी किसान जावेद अली ने उच्च न्यायालय की शरण ली। उन्होंने दावा किया कि उन्हें नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से प्रतिकर दिया जाए। अदालत ने आदेश दिए कि इस मामले का निस्तारण किया जाए। इस पर एडीएम भू अध्यापित मुकेश चंद्र ने अधिशासी अभियंता उप्र आवास विकास को पत्र लिखकर कहा कि नई नीति के हिसाब से इन किसानाें का दावा बनता है।
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आवास विकास ने दिया था झटका
इस प्रकरण पर आवास विकास अधिकारियों ने किसानों को तगड़ा झटका दिया है। कहा है कि इन किसानों का दावा नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से बनता ही नहीं है? 60-70 प्रतिशत जमीन पर जब अर्जन निकाय का कब्जा है, तो नया एक्ट इन पर लागू ही नहीं होता। 600 एकड़ से ज्यादा जमीन पर आवास विकास का कब्जा है। लगभग 400 एकड़ पर ही विवाद है।
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एडीएम को करना है निर्णय
आवास विकास अधिकारियों के इस जवाब पर निर्णय एडीएम एलए को करना है, पर यह तय है कि यदि नई नीति से मुआवजा तय हुआ, तोे आवास विकास अदालत की शरण लेगा। इसकी तैयारी की जा रही है। इस चक्कर में यह जमीन फंस गई है। न तो सही तरीके से इस पर डेवलपमेंट हो रहा है और न ही अन्य कार्य।


अब खड़ा हुआ रास्ते का विवाद
आवास विकास ने यहां पावर कारपोरेशन को जमीन दी है। यहां बिजलीघर का निर्माण हो रहा है। ऐसे में यहां एक चकरोड काटकर बिजलीघर की दीवार बना दी गई है। इस पर किसान जावेद आदि का कहना है कि यह खेतों की तरफ जाने वाला रास्ता है, जो रोक दिया गया है। यह ठीक नहीं। रास्ता तो बचना ही चाहिए था। उधर आवास विकास अधिकारियों का कहना है कि अधिग्रहण रास्तों और नालियां का भी हुआ है। इसी सरकारी जमीन के बदले इसी योजना में एसटीपी लगाने के लिए 10 हेक्टेयर जमीन निशुल्क नगर निगम को दी गई है।

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