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Meerut News: भक्ति सबसे सरल साधना, वीतरागता के लिए चारित्र आवश्यक
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के स्वर्णमयी पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय में फाल्गुन अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर श्री नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान का आयोजन पंडित आशीष जैन शास्त्री, दिलीप जैन विधानाचार्य के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ।
विधान के तृतीय दिन भक्तों ने भगवान शांतिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा करने का सौभाग्य शिखर चंद जैन, सुमन जैन, आशीष जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा में सौधर्म इंद्र के रूप में राकेश जैन ने सहयोग किया।
आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि यह विधान सर्वाधिक श्रद्धात्मक विधान है। इस विधान में शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है जिसमें प्रथम शब्द ही अर्हम कहा गया है। जिसमें आ से लेकर ह तक के शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सर्वप्रथम अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को अंककला एवं अक्षर कला का ज्ञान दिया। इसी कारण आज भी ब्राह्मी लिपि सबसे प्राचीन मानी गई है। जो धीर पुरुष वैराग्य सहित है वह अल्प समय में ही ज्ञान प्राप्त कर लेता है।
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श्रद्धालुओं ने 64 अर्घ्य समर्पित किए। मंडल पर अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्रवीण जैन, राकेश जैन, दिलीप कुमार जैन, मुकेश जैन, मनोज जैन, संजय जैन, सतेंद्र जैन, आशीष जैन, उमेश जैन, प्रधानाचार्य महेंद्र जैन, विनोद जैन, सुरेंद्र जैन आदि को प्राप्त हुआ। रतिकर पर्वत संबंधी आठ जिनालयों में पूजा की गई।
शास्त्रसभा में नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान के महत्व का सुंदर शब्दों में वाचन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, राजीव जैन प्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, आदि ने सहयोग किया।
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के स्वर्णमयी पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय में फाल्गुन अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर श्री नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान का आयोजन पंडित आशीष जैन शास्त्री, दिलीप जैन विधानाचार्य के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ।
विधान के तृतीय दिन भक्तों ने भगवान शांतिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा करने का सौभाग्य शिखर चंद जैन, सुमन जैन, आशीष जैन को प्राप्त हुआ। शांतिधारा में सौधर्म इंद्र के रूप में राकेश जैन ने सहयोग किया।
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आचार्य विमर्श सागर महाराज ने कहा कि यह विधान सर्वाधिक श्रद्धात्मक विधान है। इस विधान में शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है जिसमें प्रथम शब्द ही अर्हम कहा गया है। जिसमें आ से लेकर ह तक के शब्द ब्रह्म की आराधना की गई है। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सर्वप्रथम अपनी पुत्रियों ब्राह्मी और सुंदरी को अंककला एवं अक्षर कला का ज्ञान दिया। इसी कारण आज भी ब्राह्मी लिपि सबसे प्राचीन मानी गई है। जो धीर पुरुष वैराग्य सहित है वह अल्प समय में ही ज्ञान प्राप्त कर लेता है।
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श्रद्धालुओं ने 64 अर्घ्य समर्पित किए। मंडल पर अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य प्रवीण जैन, राकेश जैन, दिलीप कुमार जैन, मुकेश जैन, मनोज जैन, संजय जैन, सतेंद्र जैन, आशीष जैन, उमेश जैन, प्रधानाचार्य महेंद्र जैन, विनोद जैन, सुरेंद्र जैन आदि को प्राप्त हुआ। रतिकर पर्वत संबंधी आठ जिनालयों में पूजा की गई।
शास्त्रसभा में नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान के महत्व का सुंदर शब्दों में वाचन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, राजीव जैन प्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, आदि ने सहयोग किया।