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इच्छा मुक्त धर्म ही मोक्ष का मार्ग : भारत भूषण
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इच्छा मुक्त धर्म ही मोक्ष का मार्ग : भारत भूषण
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति व समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 19वें दिन शनिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आचार्य 108 भारतभूषण महाराज ने कहा कि इच्छा मुक्त धर्म ही मोक्ष मार्ग है। संशय रहित होकर जब तुम धर्म के मार्ग पर चलना तो निस्काम भाव से चलना। किसी भी इच्छा से युक्त होकर धर्म कार्य मत करना। इच्छा करने वाला कभी अच्छा कार्य नहीं पर पाता तुम भक्ति का कुआं खोदते रहना, फलरूपी पानी स्वयं ही प्राप्त हो जाएगा।
इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सुकांत जैन व शांतिधारा करने का सौभाग्य महेशचंद जैन, सुशील जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन निगम जैन, रंजीता जैन, दीपांशी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। विधान का विसर्जन कमल जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीना जैन सुकांत जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन उषा जैन, किरण जैन तथा चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन निर्मल जैन ने किया। अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन आदि का सहयोग रहा।
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शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना की गई
हस्तिनापुर। प्राचीन जयंती माता परिसर में शनि सिगनापुर से लाकर स्थापित किए गए भगवान शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना की गई। आचार्य मुकेश शांडिल्य ने बताया कि प्राचीन जयंती माता शक्ति पीठ मंदिर में दूरदराज से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं। मन्नत मांगते हैं और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो भगवान शनि देव के समक्ष भंडारे का आयोजन किया जाता है। कई भक्तों ने मनोकामना पूर्ण होने पर शनिवार को विशेष भंडारे का आयोजन किया और जिसमें क्षेत्र और कस्बे के सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित किया।
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति व समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 19वें दिन शनिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
आचार्य 108 भारतभूषण महाराज ने कहा कि इच्छा मुक्त धर्म ही मोक्ष मार्ग है। संशय रहित होकर जब तुम धर्म के मार्ग पर चलना तो निस्काम भाव से चलना। किसी भी इच्छा से युक्त होकर धर्म कार्य मत करना। इच्छा करने वाला कभी अच्छा कार्य नहीं पर पाता तुम भक्ति का कुआं खोदते रहना, फलरूपी पानी स्वयं ही प्राप्त हो जाएगा।
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इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य सुकांत जैन व शांतिधारा करने का सौभाग्य महेशचंद जैन, सुशील जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन निगम जैन, रंजीता जैन, दीपांशी जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। देव, शास्त्र, गुरु व आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ किया गया। 301 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। विधान का विसर्जन कमल जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन वीना जैन सुकांत जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन उषा जैन, किरण जैन तथा चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन निर्मल जैन ने किया। अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन आदि का सहयोग रहा।
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शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना की गई
हस्तिनापुर। प्राचीन जयंती माता परिसर में शनि सिगनापुर से लाकर स्थापित किए गए भगवान शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना की गई। आचार्य मुकेश शांडिल्य ने बताया कि प्राचीन जयंती माता शक्ति पीठ मंदिर में दूरदराज से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं। मन्नत मांगते हैं और जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है तो भगवान शनि देव के समक्ष भंडारे का आयोजन किया जाता है। कई भक्तों ने मनोकामना पूर्ण होने पर शनिवार को विशेष भंडारे का आयोजन किया और जिसमें क्षेत्र और कस्बे के सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित किया।