वसीम रिजवी के बयान पर देबवंदी उलमा ने जताई नाराजगी, कहा- गवाह है मदरसों का इतिहास
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उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने एक बार फिर यूपी के मदरसों को लेकर विवादित बयान दिया है जिस पर उलमा ने नाराजगी जताई है। उलमा ने कहा कि रिजवी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं। उन्हें मदरसों पर शक है तो वह दाखिला लेकर देखें कि वहां किस तरह की तालीम दी जाती है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि वसीम रिजवी सरकार के आदमी हैं और उनके किसी भी बयान का कोई एतबार नहीं है। वो कब क्या कह दें यह उन्हें खुद भी पता नहीं है। उनकी उल्टी सीधी बयानबाजी के कारण ही शिया समुदाय ने उनका बायकाट किया हुआ है।
जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा की वसीम रिजवी सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए इस तरह की बयानबाजी करते हैं। साथ ही उन्हें फिरकापरस्त संगठनों का संरक्षण प्राप्त है। उन्हें मदरसों पर शक है तो वह यूपी के किसी भी मदरसे में दाखिला लेकर देखें कि इन मदरसों में किस तरह की तालीम दी जाती है।
उन्होंने कहा कि मदरसों का इतिहास गवाह है कि यहां से मौलाना अबुल कलाम आजाद और शेखुल हिंद जैसे महापुरुष पैदा हुए हैं। कहा कि वसीम रिजवी मदरसों और उलमा के इतिहास से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। इसलिए वह इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्हें चाहिए कि वह पहले इतिहास के पन्ने पलट कर देखें उसके बाद मदरसों पर सवालिया निशान खड़ा करें।
बता दें कि रविवार को वसीम रिजवी ने बयान में कहा कि यूपी के मदरसों में आजकल किताबों की जगह हथियार बरामद हो रहे हैं और इनमें आईएसआईएस के सिपाही तैयार किए जा रहे हैं। जो आने वाले वक्त में हिंदुस्तान के लिए बड़ा खतरा हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह ऐसे मदरसों को बंद करे।
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