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तीन तलाक बिल लोकसभा में पेश किए जाने पर देवबंदी उलमा नाराज, कही ये बड़ी बात

Fri, 21 Jun 2019 06:46 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 21 Jun 2019 06:46 PM IST
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Deobandi Ulama angry at introduced three divorce bills in Lok Sabha
देवबंद

केंद्र सरकार द्वारा एक बार फिर से तीन तलाक बिल लोकसभा में पेश किए जाने को लेकर इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम समेत देवबंदी उलमा ने इसका पुरजोर विरोध किया है। उलमा का कहना है कि संविधान सभी को धर्म के मुताबिक जिंदगी गुजारने की आजादी देता है। तीन तलाक इस्लाम धर्म और शरीयत का अभिन्न हिस्सा है। इस पर कानून बनाना शरीयत में खुला हस्तक्षेप है। 

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दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने शुक्रवार को तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिला विधेयक (विवाह अधिकार संरक्षण) लोकसभा में पेश किए जाने को लेकर कहा कि हम शुरू से यह कहते आ रहे हैं कि तीन तलाक का मसला खालिस शरीयत का मामला है और इसे उलमा को सौंप देना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद भी इसमें लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि तीन तलाक मजहब-ए-इस्लाम और शरीयत का अभिन्न अंग है। इस पर किसी भी तरह का कानून बनाया जाता है तो यह शरीयत में खुल्लमखुल्ला दखलअंदाजी है। भारतीय संविधान सभी धर्मों के लोगों को अपने धर्म के मुताबिक जिंदगी जीने का अधिकार देता है।
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वहीं जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि बेवजह तीन तलाक को मुद्दा बनाकर इसे सियासी लाभ के लिए तूल दिया जा रहा है। साफ है कि तीन तलाक का मसला शरीयत से जुड़ा है और संविधान कहता है कि हर धर्म के व्यक्ति को उसके मजहब के मुताबिक जिंदगी गुजारने का पूरा अधिकार है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वह अपनी जिद छोड़कर इस मसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सुपुर्द कर दे।

मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि साजिश के तहत कुछ महिलाओं को सामने लाकर खड़ा कर दिया और दिखाया गया कि वह तीन तलाक का विरोध कर रही हैं, जबकि करोड़ों मुस्लिम महिलाएं इसकी एकसुर में मुखालफत कर रही हैं। यह बात समझ से परे है कि आखिर सरकार मुसलमानों की तरक्की को दरकिनार कर तीन तलाक के पीछे क्यों पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को बिना वजह तूल देना बंद करना चाहिए और इस मुस्लिम धर्मगुरुओं पर छोड़ देना चाहिए। 

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